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बेनी ने पुनिया को बाहरी बताया, कांग्रेसी सकते में, शीतयुद्ध सतह पर

 बाराबंकी। केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा जब भड़ास निकालने पर उतरते हैं तो उनकी जबान फिसल ही जाती है और दिल का गुबार जुबां पर आ ही जाती है। ऐसे में आज जब उन्होंने कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया को पंजाब का निवासी बता डाला तो कांग्रेस की गुटबाजी भी उभरकर सामने आ गयी। फिलहाल पुनिया ने इस मुद्दे पर सधा जवाब देकर एक बार फिर यह साबित किया कि वे संगठन के दायरे में रहने वाले नेता हैं। कांग्रेस के बड़े नेताओं का दुरावपन प्रथम चरण के चुनाव के सम्पन्न होते ही सतह पर आता दिखाई दिया। यहां एक बार फिर बेनी प्रसाद वर्मा की बाराबंकी जनपद का नेता बनने की छटपटाहट प्रत्यक्ष तौर पर नजर आयी।

 बाराबंकी। केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा जब भड़ास निकालने पर उतरते हैं तो उनकी जबान फिसल ही जाती है और दिल का गुबार जुबां पर आ ही जाती है। ऐसे में आज जब उन्होंने कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया को पंजाब का निवासी बता डाला तो कांग्रेस की गुटबाजी भी उभरकर सामने आ गयी। फिलहाल पुनिया ने इस मुद्दे पर सधा जवाब देकर एक बार फिर यह साबित किया कि वे संगठन के दायरे में रहने वाले नेता हैं। कांग्रेस के बड़े नेताओं का दुरावपन प्रथम चरण के चुनाव के सम्पन्न होते ही सतह पर आता दिखाई दिया। यहां एक बार फिर बेनी प्रसाद वर्मा की बाराबंकी जनपद का नेता बनने की छटपटाहट प्रत्यक्ष तौर पर नजर आयी।

आज जब वर्मा सिरौलीगौसपुर में वोट डालने के लिए पहुंचे और वापस होने लगे तो उनसे सवाल किया गया कि क्या कांग्रेस में टिकट वितरण में कांग्रेस सांसद पुनिया की नहीं चली? क्या कांग्रेस में टकराव है? फिर पुनिया जी जिले में पार्टी के प्रचार से दूर क्यों रहे? इस बात पर एकाएक तमतमाये बेनी वर्मा बोले क्या बात करते हैं। पुनिया को बाराबंकी के बारे में क्या मालूम है। वह पंजाब से यहां आये हैं। मेरा दावा है कि हमारी पार्टी जिले की सभी आधा दर्जन सीटों पर विजय प्राप्त करेगी। इतना कहकर राहुल गांधी के लाडले वर्मा गाड़ी में बैठकर चलते बने। दूसरी तरफ बेनी के इस उवाच के बाद इसे लेकर सियासी जगत में खासा हंगामा खड़ा हो गया। क्योंकि कांग्रेसी सांसद पुनिया हरियाणा के रहने वाले हैं और अब तो उन्होंने बाराबंकी में ही अपना निजी आवास भी बना लिया है। ऐसे में उनके ही दल के एक वरिष्ठ नेता के द्वारा यह बात कहना कहीं न कहीं कांग्रेस में मचे घमासान की चुगली कर गया। जिसे लेकर विरोधी तो विरोधी कांग्रेस के लोग भी चर्चा परिचर्चा में गुथ कर रह गये।

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक बाराबंकी की कांग्रेस में टिकट वितरण से पहले अथवा बाद में बहुत कुछ सही नहीं चल रहा है। गाहे-बगाहे पुनिया व बेनी के बीच चल रहे शीतयुद्ध के दर्शन होते रहे हैं। यहां पुनिया पुराने कांग्रेसियों व संगठन को साथ लेकर चलते दिखाई दिये तो बेनी दूसरे दलों के नये कांग्रेसियों को टिकट दिलवाकर जिले में अपनी मनमानी कांग्रेस को मजबूत करने में जुटे रहे। कांग्रेस के नेता शिवशंकर शुक्ला तो उनके विरोध के कारण पार्टी से ही बाहर कर दिये गये। यही नहीं खबर तो यह भी है कि कई पुराने कांग्रेसियों ने चुनाव तक चुप रहने की सलाह पर अपने होंठ सिले हुए हैं। साफगोई से इस प्रकार यदि कहा जाये तो बेनी ने अपनी चलाकर पूरी कांग्रेस में पहले के सपाइयों को न सिर्फ मर्ज किया बल्कि उन्हें टिकट दिलवाकर पुनिया को उनके ही जिले में अपनी ताकत का एहसास भी कराया। खबर है कि यदि बेनी की चलती तो हैदरगढ़ के कांग्रेस प्रत्याशी को भी बदल दिया जाता। यही वजह रही कि पुनिया टकराव टालने के लिए एक दो मौके छोड़ जिले में प्रचार के दौरान बेनी के साथ एक मंच पर नहीं दिखाई दिये। हद तो तब दिखती है जब वर्मा के चहेते नवजात कांग्रेसी भी संगठन की बैठक में पुराने कांग्रेसियों को आंख दिखाते नजर आते हैं।

उधर दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद डा. पीएल पुनिया ने इस संबंध में पूछने पर कहा कि न तो दलित बेनी वर्मा जी के खिलाफ है और न ही बेनी जी के समर्थक मेरे खिलाफ हैं। हम सभी कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं। यदि ऐसा है तो यह हास्यस्पद है। उधर कांग्रेस के प्रभारी दिग्विजय सिंह ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए इस पूरे मामले को तोड़ मरोड़ कर पेश करने का आरोप मीडिया पर ही लगा डाला। लेकिन कहते हैं कि सत्य कभी छिपता नहीं। बेनी भले ही गोंडा के सांसद हों उन्हें वहां कांग्रेसियों ने बोलने तक न दिया हो लेकिन आज भी वे बाराबंकी का मोह छोड़ नहीं पाये हैं। यह इसलिए भी है कि क्योंकि यहां पर उनका लाडला पुत्र राकेश वर्मा चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में वर्मा किसी भी हालत में राकेश को जिताना ही चाहते हैं। खास बात यह भी है कि बेनी ने जब हैदरगढ़ में यह कहा कि यहां के प्रत्याशी को पुनिया ने खड़ा किया है। वर्मा बिरादरी के लोग इन्हें देख लें तो उसका असर यह हुआ कि उनका अपना कुनबा भाजपा की ओर चला गया। अर्थात जहां पुनिया का नाम दिखा बेनी ने वहां पर अपनी दुनिया का सिक्का चलाना चाहा। ऐसे में कांग्रेसी गुटबाजी उभरकर सामने आ ही गयी।

साभार : जनसत्‍ता

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