गोरखपुर : लालकृष्ण आडवाणी की बुधवार की शाम यहां होने वाली जनसभा की प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दी गई। प्रशासन द्वारा सभा कार्यक्रम को अचानक रद्द किए जाने की सदर सांसद योगी आदित्यनाथ ने तल्ख शब्दों में निंदा की है। प्रशासन के इस रवैये के विरोध स्वरूप उन्होंने टाउनहाल स्थित गांधी प्रतिमा स्थल पर पत्रकारवार्ता की और कहा कि सभा रद्द कर प्रशासन ने लोकतंत्र की हत्या की है। पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका बसपा के एजेंट जैसी है। इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता का दावा तार-तार हुआ है। आयोग को इस मामले की जांच करानी चाहिए। उन्होंने जनता से अपील की कि वह प्रशासन की इस निरंकुशता का जवाब 11 फरवरी को बैलेट से दे।
उन्होंने कहा कि प्रशासन इसके लिए सुरक्षा का जो तर्क दिया वह गले से नीचे उतरने वाली नहीं। 2007 में इसी जगह आडवाणी, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, सुषमा स्वराज और केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा की सभा हुई थी। ऐसे में कौन से हालात बन गए कि प्रशासन को सुरक्षा कारणों से सभा रद्द करनी पड़ी। अगर सुरक्षा कारण ही वजह है तो गुरुवार को यहां केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के सभा की अनुमति क्यों और कैसे दी गई? इस मौके पर गोरखपुर शहर और ग्रामीण से भाजपा उम्मीदवार क्रमश: डा.राधामोहन दास अग्रवाल, विजय बहादुर यादव, महानगर अध्यक्ष डा.धर्मेद्र सिंह भी मौजूद थे। तीनों ने विरोधस्वरूप मुंह पर काली पट्टी बांध रखी थी। मालूम हो कि बुधवार की शाम पांच बजे टाउनहाल स्थित कचहरी क्लब मैदान पर भाजपा के शहर और ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्याशियों के पक्ष में श्री आडवाणी और शत्रुघ्न सिन्हा की जनसभा होने वाली थी।
प्रशासन की इस भूमिका से बुद्धिजीवी मतदाताओं का रुझान एकतरफ़ा भाजपा की तरफ़ होने लगा है. सभी यही कह रहे हैं कि प्रशासन बसपा की तरफ़दारी में है. आडवाणी की सभा की अनुमति नहीं मिलने के प्रशासनिक निर्णय का भाजपा कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। नगर मजिस्ट्रेट ने बताया कि कचहरी क्लब मैदान में सभा के संबंध में एसपी सिटी की तरफ से सुरक्षा समेत पांच बिंदुओं पर आपत्ति जतायी गई। जिसके बाद कचहरी क्लब मैदान में सभा कराये जाने की अनुमति नहीं दी गई।






