: भाजपाइयों ने नहीं दिया भाव : देवरिया। कभी बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेता रहे बाबू सिंह कुशवाहा न घर के रहे न घाट के। जिस बसपा की सरकार में वे एक महत्वूपर्ण पद पर रह कर प्रदेश में अपनी हनक पैदा करते थे और उनकी तूती बोलती थी, आज उनकी स्थिति यह है कि वह जिला प्रशासन के प्रोटोकाल तक में शामिल नहीं है। यही नहीं वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही के प्रचार के लिए देवरिया जिले के पथरदेवा विधान सभा क्षेत्र में बड़ी उम्मीद लेकर आए थे लेकिन भाजपाइयों की बेरुखी और अपमानजनक व्यवहार से वह तीन में से दो जनसभाओं को बिना सम्बोधित किए हुए ही चले गए।
श्री कुशवाहा की हालात इतनी बदतर हो गई है कि कोई भी भाजपाई उनके बारे में बोलना तक पसन्द नहीं कर रहा है। पथरदेवा विधान सभा के जिस तरकुलवा क्षेत्र में वे गए थे वहां के एक भाजपा कार्यकर्ता अनिल ने बाबू सिंह कुशवाहा का नाम सुनते ही उन्हें काफी भला बुरा कहा। हांलाकि पुलिस थाना तरकुलवा के दरोगा गौरव सिंह के अनुसार भाजपा नेता अनिल के ही मित्र जय प्रकाश सिंह के यहां ही बाबू सिंह ने दिन का भोजन किया है। खुद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही तो इस मामले में बात तक करने के लिए तैयार नहीं दिखे। उन्होंने संवाददाता का फोन तक नहीं उठाया। यह अलग बात है कि श्री शाही के जिला मुख्यालय स्थित आवास से ही इस संवाददाता को बाबू सिंह कुशवाहा के भ्रमण कार्यक्रम का फोटो कापी देकर उनके भ्रमण कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी दी गई।
इस बारे में भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी विजय शुक्ल ने बहुत मुश्किल से कहा कि बाबू सिंह कुशवाहा भाजपा के सदस्य नहीं है। उनका अलग संगठन है। इसलिए भाजपा से उनको जोड़ना गलत है। कहा जा रहा है भारतीय जनता पार्टी के दामन को पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने बड़ी मजबूती एवं जिस उम्मीद के साथ पकड़ा था, वही भाजपा अब बाबू सिंह कुशवाहा से पीछा छुड़ाने के मूड में है। शायद तभी तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही की बात तो बहुत दूर है, उनके निर्वाचन क्षेत्र पथरदेवा विधान सभा में किसी भी भाजपा नेता या कार्यकर्ता तक ने उन्हें जरा भी भाव नहीं दिया। श्री कुशवाहा बड़े बे आबरु होकर देवरिया से विदा हो गए। शायद यही वजह रहा कि कुशवाहा आरक्षण बचाओ मोर्चा के संरक्षक के रूप में जिले में आए और खुलकर भाजपा के लिए वोट भी नहीं मांगने पाए। बताया जाता है कि कुशवाहा को अपनी उपेक्षा का आभास काफी पहले से ही हो गया था, इसी वजह से वे जिले में तीन स्थानों पर आयोजित जनसभा में से मात्र एक को ही थोड़ी देरे के लिए सम्बोधित किया और चले गए।
देवरिया से ओपी श्रीवास्तव की रिपोर्ट.






