लगता है अब पत्रकारों की नियुक्ति भी किसी वेटलिफ्टर या पहलवान की तरह किलो वर्ग के आधार पर होगी. इसकी शुरुआत की है भोपाल स्थित एशिया के पहले हिंदी पत्रकारिता को समर्पित माखनलाल विश्वविद्यालय के वर्तमान और चर्चित कुलपति कुठियाला ने. माखनलाल में जिम का शुभारंभ किया गया है… जहाँ भावी पत्रकार शरीर सौष्ठव का प्रदर्शन करते नजर आएंगे. पहले ही अपनी हड़तालों और हंगामों के चलते प्रसिद्ध इस विश्वविद्यालय में कोई आश्चर्य नहीं अगर पत्रकारों के मारपीट के किस्से सामने आएँ.
कमाल यह है कि यहाँ की लाइब्रेरी में नई किताबों के दर्शन दुर्लभ है.. दिमागी कसरत के लिए कोई सहूलियत उपलब्ध नहीं है तो शायद प्रशासन ने सोचा कि शरीर ही बना दिया जाए क्योंकि कहीं पढ़ा था कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है… भाई लोगों ने इस कहावत को अपने अंदाज पर समझ लिया. वैसे भी कुलपति मेहरबान तो पत्रकार पहलवान… शायद यह सही भी था क्योंकि कई दफा ऐसी खबरें सामने आती रहीं हैं कि पत्रकार पिट कर आ गए तो जरुरी है, शायद अब ऐसी खबरें सामने आएँ कि पत्रकारों ने फलाँ भ्रष्ट नेता की जमकर पिटाई की. पत्रकारिता को नई दिशा देने वाले प्रबंधन का सार्वजनिक सम्मान निहायत ही जरूरी है.

माखनलाल से सिर्फ 'पत्रकार' नहीं बल्कि 'पहलवान टाइप के पत्रकार' निकलेंगे। लंबे समय से परिवर्तन का इंतजार कर रहा माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय का स्टूडियो, जिसकी हालत अब भी दयनीय है, वो तो ठीक हुआ नहीं, हां लेकिन सेहत बनाने के लिए जिम अवश्य खुल गया है। क्या वाकई 'स्टूडियो' से ज्यादा आवश्यकता 'जिम' की है। यकीं ना हो तो इस फोटो पर गौर फरमाइये। कुछ जाने पहचाने चेहरे नजर आ ही जायेंगे (फोटो आशीष जोशी जी के प्रोफाइल से साभार लिया गया है)। क्या हिन्दी पत्रकारिता का गढ़ कहलाने वाला माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय कुछ लोगों के निजी स्वार्थों की आरामशाला बन गया है?
ऐसे में जबकि भोपाल के बिशन खेडी क्षेत्र में नए परिसर बनने का प्रस्ताव है. कुछ ही माह पूर्व इसका भूमिपूजन भी हुआ है, ऐसे में फिर इस पुराने और एक ऐसे भवन में जो साल दो साल में किसी दूसरे काम में लाया जाना हो, में इतना निवेश करना कहां तक उचित है? "अमां खां मिया कुठियाला साहब… यही पैसे किसी ऐसे काम में लगते जहाँ स्टूडेंट्स का भला होता तो शायद उचित होता… सच में दुःख होता है विश्वविद्यालय कि इस दशा को देखकर… एमसीयू का पास आउट होना मीडिया संस्थानों में गाली बनता जा रहा है… वैसे जिमखाना खोलने का आशय कुछ समझ नहीं आया… क्यूँ कि आपके सभी खासम-खास आशीष जोशी जी, सौरभ मालवीय जी, राघवेन्द्र प्रताप जी सहित अन्य तो काफी स्वस्थ हैं.. हाँ नन्द किशोर त्रिखा जी के सेहत कि चिंता हो सकती है लेकिन वो तो नॉएडा में हैं फिर ये किसके लिए..?? समझ नहीं आ रहा."
लेखक क्षितिज कुमार पांडेय एमसीयू से पास आउट हैं तथा फिलहाल एक बड़े दैनिक अखबार में कार्यरत हैं.






