इंटरनेट की खबरों में सेक्स, सेक्स रैकेट, देह व्यापार, ब्लू फिल्म जैसे शब्दों से जुड़ी खबर मिलते ही सभी वेबसाइटें जितनी तत्परता के साथ खबरें डालती हैं, उतनी तत्परता के साथ शायद लोकसभा में कैबिनेट की बैठक कवर नहीं की होगी…..। खैर इसका प्रमुख कारण यह है कि लोग इंटरनेट पर सबसे ज्यादा 'सेक्स' शब्द सर्च करते हैं। कर्नाटक विधानपरिषद में सदन के अंदर मंत्री जी ब्लू फिल्म देखते पकड़े जाते हैं, तो खबर पर तस्वीरें ब्लू फिल्म की लगा दी जाती हैं।
जबकि इस खबर के साथ कर्नाटक विधानसभा, कर्नाटक मैप या फिर मंत्री की फोटो लगायी जा सकती है। लेकिन कुछ वेबसाइट ऐसी हैं, जिन्हें यह गवारा नहीं। उन्हें इन सबकी जगह ब्लू फिल्म की सीधी बेडरूम से खींची गई तस्वीर लगाना ज्यादा शोभा देता है। क्या हम अखबार या न्यूज चैनल में ऐसा कर सकते हैं। शायद नहीं। क्या हमें इंटरनेट पत्रकारिता में आने के बाद अपने इन मूल्यों को ताक पर रख देना चाहिये। आज तमाम वेबसाइटें ऐसी हैं, जो अपने कंटेंट पर क्लिक पाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकती हैं।
जनता पर इसका क्या असर होता है? : न्यूज वेबसाइटों पर परोसे जाने सेक्स की वजह से आज आलम यह है कि लोग हम इंटरनेट पर काम करने वाले पत्रकारों को हलके में लेने लगे हैं। लोग सोचते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक चैनलों और अखबारों में जो वजन है, वो इंटरनेट पर नहीं। इसलिए आप इंटरनेट पर बड़ी से बड़ी खबर भी लिख देते हैं उसका असर नहीं होता, हां अगर कोई अखबार आपकी साइट से कॉपी कर के छाप दे, तो अधिकारी से लेकर नेता तक हिल जाते हैं।

मुझे लगता है कि अगर हमें अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक चैनलों की तरह अपनी पत्रकारिता में दम भरना है तो ऐसी अश्लील पत्रकारिता को छोड़ना होगा, महज हजार डेढ़ हजार क्लिक्स का मोह त्यागना होगा। अगर आप इंटरनेट पत्रकारिता से जुड़े हैं, तो इस बात को गंभीरता से सोचिए, कहीं ऐसा न हो कि भविष्य में हमारी पत्रकारिता महज पोर्न कंटेंट तक सीमित रह जाये।
अजय मोहन
बेंगलुरु





