वाशिंगटन। सुनकर अजीब लग सकता है, लेकिन यह सच है। सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक में उसी के संस्थापक और मुखिया मार्क जुकरबर्ग की नौकरी पक्की नहीं है। उन्हें कारण बताकर या बिना बताए कभी भी निकाला जा सकता है। यह बात उस वक्त सामने आई, जब बहुप्रतीक्षित आइपीओ लाने के लिए कंपनी ने अमेरिकी बाजार नियामक एसईसी के पास विवरण पुस्तिका दाखिल की।
इसके मुताबिक, अन्य कर्मचारियों की तरह कंपनी के सीईओ जुकरबर्ग कड़ी शर्तों के तहत काम करते हैं। इनमें में कई ऐसी हैं, जिनका उल्लंघन उनकी नौकरी खा जाने के लिए पर्याप्त है। फेसबुक के साथ जुकरबर्ग का रोजगार करार कहता है कि नौकरी करते हुए वह फेसबुक की प्रतिस्पर्धी कंपनी स्थापित नहीं कर सकते, न ही ऐसा करने में किसी की मदद कर सकते हैं। वह फेसबुक के किसी कर्मचारी या कंसल्टेंट को प्रतिद्वंद्वी कंपनी में भेज भी नहीं सकते हैं। उनके साथ ये शर्ते सीओओ शेरिल सैंडबर्ग, सीएफओ डेविड एबर्समैन और वाइस प्रेसीडेंट माइक शू्रफर पर भी लागू होती हैं।
वैसे, कंपनी को छोड़ने के बाद उन पर ये शर्ते लागू होती हैं या नहीं, इस पर करार में कुछ नहीं कहा गया है। कंपनी का कहना है कि करार के तहत जुकरबर्ग और उनके तीन सहयोगियों को वेतन और बोनस के रूप में करीब 20 लाख डॉलर [करीब 10 करोड़ रुपये] मिलेंगे। वहीं, इसके तहत ही कंपनी किसी भी समय, किसी कारण या बिना किसी कारण के उन्हें बर्खास्त कर सकती है। खुद जुकरबर्ग को भी कंपनी छोड़कर कभी भी बाहर जाने का अख्तियार है। (एजेंसी)





