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पांच लाख मिलने का जश्‍न नहीं मना पाए आशीष, हिंदुस्‍तान ने बैठाई जांच

: शिक्षा विभाग ने दिया है पत्रकार को ये पैसे : पटना का शिक्षा विभाग सौ साल पूरे होने पर इतना दरियादिल हो गया है कि किसी को भी पैसा बांट दे रहा है. जिसको मन कर रहा है उसको, तभी तो राष्‍ट्रीय सहारा ने कल खबर प्रकाशित किया है कि 'जश्‍न मनाना है तो शिक्षा विभाग आएं'. पर राष्‍ट्रीय सहारा की खबर ने पैसा पाकर जश्‍न मना रहे एक पत्रकार को मुश्किल में डाल दिया है. अब बेचारे पत्रकार को प्रबंधन के सवालों के जवाब देने पड़ रहे हैं. बेचारे कोस रहे होंगे उस घड़ी को जब राष्‍ट्रीय सहारा के पत्रकार ने यह खबर लिखी होगी.

: शिक्षा विभाग ने दिया है पत्रकार को ये पैसे : पटना का शिक्षा विभाग सौ साल पूरे होने पर इतना दरियादिल हो गया है कि किसी को भी पैसा बांट दे रहा है. जिसको मन कर रहा है उसको, तभी तो राष्‍ट्रीय सहारा ने कल खबर प्रकाशित किया है कि 'जश्‍न मनाना है तो शिक्षा विभाग आएं'. पर राष्‍ट्रीय सहारा की खबर ने पैसा पाकर जश्‍न मना रहे एक पत्रकार को मुश्किल में डाल दिया है. अब बेचारे पत्रकार को प्रबंधन के सवालों के जवाब देने पड़ रहे हैं. बेचारे कोस रहे होंगे उस घड़ी को जब राष्‍ट्रीय सहारा के पत्रकार ने यह खबर लिखी होगी.

पटना के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं आशीष कुमार मिश्र. हिंदुस्‍तान के ब्‍यूरो आफिस में काम करते हैं. सालों से शिक्षा बीट पर जमे हुए हैं. शिक्षा विभाग के लोगों से बहुत याराना हो गया है. सब मानते हैं. जब शिक्षा विभाग के सौ साल पूरे हुए तो सरकार की तरफ से उसे खर्च करने के लिए दस करोड़ रुपये मिले. अब इतनी बड़ी रकम वह कैसे खर्च करे यह समझ में नहीं आया, तब उसने ऐसे-वैसे तथा खास लोगों में पैसा बांटना शुरू किया. तो अपने पत्रकार मित्र को भी शिक्षा विभाग नहीं भूला. विभाग ने आशीष कुमार मिश्र को 4 लाख 95 हजार रुपये दिए. इसका किसी को पता नहीं चला. उनके अखबार हिंदुस्‍तान को भी नहीं.

पत्रकार महोदय खुश थे, विभाग भी उन्‍हें उपकृत करके खुश था, पर राष्‍ट्रीय सहारा की खबर में जश्‍न में खलल डाल दिया. खबर में पैसे पाने वालों की सूची में आशीष कुमार मिश्र नाम भी आ गया और शुरू हो गई बेचारे की खुशियों में खलल. प्रबंधन को भी पैसा वाली बात पता चल गई. और शुरू हो गई आशीषजी से पूछताछ. प्रबंधन ने पूछा भइया किस मद में शिक्षा विभाग ने आपको पैसा दिया है, वो भी पांच लाख में पांच हजार कम. ऐसा कौन सा काम आपने कर दिया कि शिक्षा विभाग आप पर मोहित हो गया है. इतनी पूछताछ होती तो गनीमत थी कि कुछ भी बताकर बचा जा सकता था. पर बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने जांच की कार्रवाई शुरू कर दी है.

प्रबंधन अब पता लगाने में जुटा हुआ है कि आखिर इतना पैसा शिक्षा विभाग ने इन्‍हें क्‍यों और किस मद में दिया है. क्‍या करने वाले हैं आशीष या क्‍या कर चुके हैं, जो इतनी बड़ी सरकारी रकम वो भी लीगल तरीके से इन्‍हें दी गई है. दूसरी तरफ ये खबर भी है कि शिक्षा बीट देखने वाले दूसरे अखबारों के पत्रकार भी अब शिक्षा विभाग से नाराज हो गए हैं. इन लोगों का मानना है कि जब मिश्र जी को उतना पैसा दिया जा सकता है तो कुछ पैसों पर तो उनलोगों का भी हक बनता ही था, आखिर वे लोग भी तो इस बीट को कवर करते हैं. खैर, अब देखना है कि इस मामले में हिंदुस्‍तान प्रबंधन क्‍या निर्णय लेता है. नीचे राष्‍ट्रीय सहारा में प्रकाशित खबर.  


                                जश्न मनाना है तो शिक्षा विभाग आयें

पटना। जश्न मनाने की इच्छा रखने वालों के लिए शिक्षा विभाग ने दरवाजा खोल दिया है। यह दरियादिली शिक्षा विभाग बिहार के सौ साल पूरा होने के उपलक्ष्य में दिखायी है। सरकार ने शिक्षा विभाग को बिहार दिवस के लिए नोडल विभाग घोषित किया है। विभाग ने भी सरकार की इस सोच को जमीन पर उतारने में कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती है। शिक्षा विभाग इसके आयोजन पर दस करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है। बिहार दिवस का मुख्य समारोह 22 से 24 मार्च तक गांधी मैदान में आयोजित होगा। गांधी मैदान के अंदर लाइव टेलीकॉस्ट करने के लिए शिक्षा विभाग ने साक्षी कम्युनिकेशन को दायित्व दिया है। इस पर करीब छह लाख रुपये खर्च होगा। लगभग इतनी ही राशि बुजुर्ग नागरिकों के अनुभव और यादों को समेटने पर खर्च करने का फैसला किया है। इसके तहत बुजुर्ग व वृद्ध जनों की यादों को पुस्तक के रूप में संरक्षित किया जायेगा।

विभाग के सहायक निदेशक ओंकार प्रसाद सिंह के अनुसार इससे बिहार की युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत को जान सकेगी एवं बुजुर्गों को भी अपनी संवेदना और विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर मिलेगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए दस दिनों के अंदर विचारों को मांगा है। एक से चार मार्च तक होने वाले वि कप महिला कबड्डी खिलाड़ियों के प्लेन टिकट और वाहन उपलब्ध कराने के लिए प्रथम किस्त में चालीस लाख रुपये दिये गये हैं और बीस लाख रुपये और दिया जाना बाकी है। इसी कार्यक्रम के लिए होटल सम्राट इंटरनेशल, होटल मगध को बुक किया गया है और इसके लिए करीब दो लाख अस्सी हजार रुपये का भुगतान किया गया है। मुम्बई की संस्था आर्ट एंड आर्टिस्ट को तिरंगा कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए 25 लाख रुपये की राशि दी गयी है। दो लाख रुपये खर्च कर सरकार ने चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में इंटर कॉलेज फेस्टीवल पर खर्च करेगी। इसी तरह बिहार के ऐतिहासिक पुरातात्विक विरासत को फिल्म में समेटने के लिए काशी प्रसाद जायसवाल को एक लाख रुपये दिये हैं।

अब भी अपने कार्यक्रम से बिहार दिवस में रौनक लाने की दावा करने वाले लोगों का शिक्षा विभाग में आना जाना लगा है। बिहार के सौ साल पूरा होने के उपलक्ष्य में विभाग ने दिखायी दरियादिली आयोजकों को चट मंगनी पट ब्याह की तर्ज पर मिल रही स्वीकृति 1. आर्ट एंड आर्टिस्ट इंडिया प्रा. लि. 25 लाख रुपये 2. सूत्रधार, खगौल पटना एक लाख रुपये 3. भारतीय जननाटय़ संघ, पटना 75 हजार रुपये 4. श्रीमती नीतू कुमारी पांच हजार रुपये 5. श्री मनोरंजन ओझा पांच हजार रुपये 6. आरबी सिंह, साक्षी कम्यूनिकेशन पांच लाख पांच हजार 50 रुपये 7. आशीष कुमार मिश्र, पत्रकार चार लाख 95 हजार रुपये 8. डा.एसपी सिंह चाणक्या लॉ यूनिवर्सिटी, पटना दो लाख रुपये 9. डा. सुनीता राय और प्रो. प्रभाकर झा पटना विवि एक लाख रुपये 10. डा. विजय कुमार चौधरी निदेशक, काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान एक लाख रुपये.

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