: अपडेट : मौसम चुनाव का है तो पत्रकार भी कोई मौका चूकना नहीं चाहता है. पेड न्यूज पर लगाम लग गया है तो कई पत्रकार सदमे की स्थिति में हैं. अब जिसको जैसे मिल रहा है प्रत्याशियों की जेब से पैसे निकाल रहा है. या कहिए जिसकी किस्मत अच्छी है प्रत्याशी खुद ही उसे पैसे दे दे रहे हैं. एक ऐसा ही मामला मेरठ का है. पर बेचारा पत्रकार चुगलखोरी की चपेट में आ गया और प्रबंधन ने जांच बैठा दी. हालांकि माना जा रहा है कि पूरा खेल कार्यालय के भीतर की राजनीति से जुड़ा हुआ है. हालांकि ताजा खबर है कि जांच के प्रत्याशियों के आने की खबर सही नहीं पाई गई है.
खबर यह थी कि अमर उजाला के सिटी चीफ ज्ञान प्रकाश जी के बच्चे का जन्म दिन था. उन्होंने बच्चे के जन्म दिन पर तमाम लोगों को इनवाइट किया था. इसी बीच जन्मदिन की पार्टी में तमाम दलों से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी भी पहुंच गए. अब उन्होंने बुलाया था या नहीं बुलाया था, इसकी जानकारी नहीं है, पर कई प्रत्याशियों के पार्टी में पहुंच जाने की सूचना आई थी. खबर मिली थी कि इन लोगों ने तरल रुप में भी बधाई दी. बताया जा रहा है कि इस बात की जानकारी अमर उजाला कार्यालय को भी नहीं थी. नहीं बुलाए जाने से कुछ सहकर्मी भी नाराज थे. सूंघते-सांघते वे न बुलाए जाने के असली खबर तक भी पहुंच गए. बताया जा रहा है कि पार्टी में ना बुलाए जाने से नाराज किसी चुगलखोर ने उनके बच्चे की पार्टी में प्रत्याशियों द्वारा जमकर तरलीकरण किए जाने की खबरें प्रबंधन तक पहुंचा दी. प्रबंधन ने आव देखा ना ताव इनके खिलाफ आंतरिक जांच कमेटी गठित कर दी.
बताया जा रहा है कि जांच के बाद प्रबंधन ने जन्मदिन पार्टी की सीडी देखी है. सूत्रों का कहना है कि इस सीडी में एक भी प्रत्याशी नहीं दिख रहा है. पार्टी में किसी भी खास व्यक्ति के आने की खबर नहीं है. सूत्र बताते हैं कि अमर उजाला के भीतर की राजनीति के चलते ज्ञान प्रकाश पर निशाना साधा गया था. सूत्र बताते हैं कि सिटी चीफ बनने के बाद से पूरब-पश्चिम गुटों वाली राजनीति शुरू हो गई थी. हालांकि बताया जा रहा है कि सीडी जांच के बाद प्रबंधन उन्हें क्लीन चिट देने की तैयारी में है. सूत्र बताते हैं कि ज्ञान प्रकाश बिना वजह बात का बतंगड़ बनने से परेशान हो गए थे. बताया जा रहा है कि सीडी में पाक साफ साबित होने के बाद वे राहत की सांस ले रहे हैं.
वैसे भी अमर उजाला, मेरठ में इन दिनों सदाबहार मौसम चल रहा है. चुनाव है तो जिसको जैसे मौका मिल रहा है तरल लपक ले रहा है. पिछले दिनों एक ऐसी ही चर्चा थी कि इंडिया टीवी के स्टिंग ऑपरेशन में फंसे शाहनावाज राणा की बनी बनाई खबर अमर उजाला में इस लिए रोक दी गई कि उसमें बड़ा नकदीकरण हुआ था. इस खबर को रोकने के एवज में भारी मात्रा में नकदीकरण की बात सामने आई थी, क्योंकि ट्रैक पर तैयार खबर को रोकने का फरमान जारी किया गया था. हालांकि दैनिक जागरण ने जहां इस खबर को तानकर छापा था वहीं हिंदुस्तान एवं जनवाणी ने भी इसे भीतर के पेज में सलटाया था पर अमर उजाला ने एक लाइन नहीं लिखी थी. इसी को लेकर गासिप शुरू हो गई थी कि उजाला टीम ने लम्बा हाथ मारा है.





