राजस्थान पत्रिका के हैदराबाद ब्यूरो में एमजे कुरैशी ने कार्यभार संभाल लिया है. गत माह पत्रिका समूह ने अपने 23 सीनियर कर्मियों के तबादले किए थे, उनमें कुरैशी भी एक हैं. कुरैशी ने अपना करियर जयपुर में दैनिक राष्ट्रदूत से आरंभ किया था. वे अमर उजाला, दैनिक जागरण और भास्कर समूह में चंडीगढ, उदयपुर और सीकर में रहे. हालांकि पत्रिका प्रबंधन ने राज्य ब्यूरो को विकसित करने के नाम पर यह तबादले किए हैं, लेकिन इसके पीछे वेजबोर्ड लागू होने के पहले की रणनीति है. किसी भी शहर में एडिटोरियल के नाम पर कोई सुविधा नहीं है. लोग अपने साधनों से काम कर रहे हैं. फिर भी उन पर रोज खबर भेजने का दबाव है.
कुरैशी ने पत्रिका का दामन भोपाल में लॉचिंग से पहले थामा था. वे वहां जागो जनमत, अमृतम जलम जैसे अभियानों के साथ ही माइनारिटी की रिपोर्टिंग के लिए विख्यात रहे, लेकिन वे भोपाल में राजस्थान बनाम मप्र की राजनीति का सदा शिकार रहे. उनके बेबाक अंदाज और ज्ञान ने उन्हें भोपाल में पौने चार साल स्थिर रखा. आखिर धनंजय प्रताप सिंह जैसों की चाल कामयाब रही, जिन्हें सदा प्रबंधन से सीधे बात करने वालों से खतरा महसूस होता रहा. अब देखना है कि कुरैशी जी हैदराबाद को कितना चमत्कार दिखा पाते हैं.





