बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न पत्रकार अक्षय कुमार (65 वर्ष) रविवार को नई दिल्ली के निगम बोध घाट पर पंचतत्व में विलीन हो गए। अक्षय कुमार का शनिवार को गुडगांव में निधन हो गया था। आगामी 15 फरवरी को 4 से 6 बजे के बीच दिवंगत अक्षय जी की महान आत्मा को श्रद्धांजलि देने के लिए चिन्मया मिशन हॉल, लोधी रोड में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया है। वे मीडिया एवं पीआर के क्षेत्र में 37 वर्षों तक जुड़े रहे। अक्षय कुमार का जन्म 19 दिसंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हुआ था। अक्षय जी ने आगरा यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद सन 1974 में उन्होंने दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन से प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली।
इसके अलावा उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डिफेंस, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, सरदार वल्लभ पटेल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और इंडियन एकेडमी ऑफ ऑडिट एंड अकाउंट्स जैसे संस्थानों से जुड़कर अपनी प्रतिभा को निखारा। अक्षय जी को कविताएं लिखने का भी बहुत शौक था। उनकी लिखी कविता “पत्थरों के बीच” काफी चर्चित भी हुई। इसके अलावा उन्होंने कई प्रचलित कविताओं का हिंदी में अनुवाद भी किया। उनके द्वारा प्रकाशित “भूख का विश्विद्यालय” कविता की देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रशंसा हुई।
अक्षय जी को उनके बेहतरीन कार्यों के लिए कई बार पुरस्कृत भी किया गया। सन् 2002 में अक्षय जी को उनके बेहतरीन पब्लिक रिलेशन वर्क के लिए रेल मंत्री ने उन्हें पदक देकर सम्मानित किया। सन् 1995 में साहित्यिक कार्यों के लिए उन्हें प्रज्ञा अवार्ड से भी सम्मानित किया गया, 1995 में ही उन्हें धर्मनिरपेक्ष भारतीय सद्भाव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अक्षय जी सन् 1996 में उत्तर प्रदेश कवि कल्याण और शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए। अक्षय जी ने प्रधानमंत्री के साथ कई देशों की यात्राएं की।





