: सहारा के भीतर खलबली : सहारा से बड़ी खबर है. एक बार फिर सहारा के भीतर बदलाव की आंधी आने की संभावना दिखने लगी है. उपेंद्र राय की फिर से वापसी को लेकर पूरे सहारा में चर्चा शुरू है. इसकी शुरुआत भी होती दिखने लगी है. उपेंद्र राय के समय में उनके खास रहे विजय राय की जिस टसक के साथ पुराने पद पर वापसी हुई है, उससे उपेंद्र के हाथ फिर से ताकत आने के कयास लगने शुरू हो गए हैं. एक महत्वपूर्ण फैसले में सहारा प्रबंधन ने विजय राय को एसएनबी हेड की पुरानी जिम्मेदारी सौंप दी है. वे प्रिंट औरे इलेक्ट्रानिक दोनों माध्यमों की जिम्मेदारी संभालेंगे. हालांकि कोआर्डिनेशन की जिम्मेदारी अभी नहीं मिली है.
ये वही विजय राय हैं, जिन्हें उपेंद्र राय का अत्यनत नजदीकी माना जाता है तथा जिन्हें सत्ता हाथ में आने के तत्काल बाद स्वतंत्र मिश्रा ने साइड लाइन किया था. उपेंद्र राय की सत्ता के समय विजय राय के पास एसएनबी हेड के रूप में प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक डिविजन की जिम्मेदारी तो थी ही, इनके पास कोआर्डिनेशन का दायित्व भी था. पर स्वतंत्र मिश्रा अपनी ताजपोशी के बाद विजय राय से कोआर्डिनेशन की जिम्मेदारी लेकर संजय पाठक को सौंप दी थी. विजय के पास केवल एसएनबी हेड की जिम्मेदारी रह गई थी, परन्तु कुछ समय बाद विजय से यह जिम्मेदारी भी ले ली गई तथा उसे मनोज दुबे को सौंप दिया गया. विजय राय को प्रिंट में भेज दिया गया तथा रणविजय सिंह को रिपोर्ट करने को कह दिया गया.
सहारा का इतिहास है कि यहां की सत्ता बदलती है तो तमाम मोहरे इधर से उधर किए जाते हैं. यहां चलने वाले शह-मात के खेल में कुछ भी चिर स्थायी या शाश्वत सत्य नहीं है. जैसे कभी उपेंद्र राय ताकतवर हुआ करते थे तो स्वतंत्र मिश्रा सहारा से बाहर होने के कगार पर पहुंच गए थे, पर उपेंद्र पर परेशानियों के बादल आते ही स्वतंत्र मिश्रा बड़ी मजबूती से वापस लौटे तथा सहारा मीडिया के हेड भी बन गए. कुछ मामलों में क्लीन चिट मिलने के बाद से ही उपेंद्र राय की सहारा में पूरी हनक से वापसी के कयास लगने शुरू हो गए थे, पर जिस तरह विजय राय अपने पुराने पद पर वापस आए हैं उसको देखते हुए तो इस बात को और भी बल मिल रहा है कि स्वतंत्र मिश्रा एंड कंपनी की विदाई भी नजदीक है. विजय राय के एनएसबी हेड बनने का सर्कुलर सभी यूनिटों में पहुंच गया है.
स्वतंत्र मिश्रा जिस तरह से पिछले काफी समय से नोएडा कार्यालय से गायब हैं, उससे इस बात को और बल मिल रहा है कि उनके लिए यहां सब कुछ ठीक नहीं है. अपने कई मामलों में उलझे स्वतंत्र मिश्रा को कई मोर्चे पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि कहा जा रहा है कि वे अपने कुछ व्यक्तिगत कारणों से लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं, पर जिस तरह से उनके खासमखास रहे मनोज दुबे की सहारा से विदाई हुई, उस समय ही संकेत मिलने लगे थे कि सहारा में बदलाव की आंधी चलने वाली है. विजय राय की वापसी के बाद इस तथ्य को और भी अधिक बल मिला है. इस नियुक्ति के बाद स्वतंत्र मिश्रा के नजदीकी लोगों के चेहरे पर शिकन साफ दिख रहा है. वहीं उपेंद्र राय के नजदीकी लोग खुश हैं.
पर इस बदलाव के बीच कुछ बड़े सवाल भी खड़े हैं. सवाल यह भी है कि उपेंद्र राय के समय में उनके खास रहे मनोज मनु का क्या होगा. क्योंकि मनोज मनु की सत्ता में उपेंद्र राय के जाने के बाद कमी नहीं आई बल्कि उसमें बढ़ोत्तरी ही हुई है. एमपी-सीजी चैनल के बाद स्वतंत्र मिश्रा ने उन्हें नेशनल चैनल का हेड भी बना दिया है. सहारा में इसी बात की चर्चा है कि रजनीकांत जैसे सुलझे हुए तथा तेजतर्रार पत्रकार की जगह लाए गए मनोज मनु क्या पुरानी ठसक के साथ ही रहेंगे या इन पर भी स्वतंत्र मिश्रा के नजदीकी बन जाने की गाज गिरेगी. फिलहाल इन सारे सवालों को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं. सहारा में शह-मात का खेल तो चलता ही रहता है. इस बार कौन किसको टारगेट करेगा और किसका टारगेट बनेगा अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, पर खेल होना तो पूरी तरह तय है. आप भी थोड़ा इंतजार कीजिए खेल शुरू होने का.





