ख़बर सनसनी फैला देने वाली है. सहारा इंडिया मीडिया के खिलाफ चुनाव आयोग शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है. कुछ दिनों पहले सहारा इंडिया मीडिया के हेड स्वतंत्र मिश्रा ने उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों के सिलसिले में सभी रिपोर्टरों स्ट्रिंगरों के साथ मीटिंग की थी और उस मीटिंग में सभी रिपोर्टरों को चुनाव के दौरान पांच-पांच लाख रुपये उगाही करने के निर्देश जारी किये गये थे, साथ ही ये धमकी भी दी गई थी कि जो रिपोर्टर-स्ट्रिंगर पांच लाख रुपये इकट्ठे नहीं करेगा उससे चैनल आईडी वापस ले ली जाएगी.
इस मीटिंग के बाद से सहारा मीडिया के सभी स्ट्रिंगरों में खलबली का माहौल था. इसी माहौल के बीच पंकज सारस्वत नाम के स्ट्रिंगर ने चुनाव आयोग से इस उगाही के सिलसिले में शिकायत की थी और सुबूत के तौर पर इस उगाही के आदेश के लिए भेजा गया ईमेल भी पंकज सारस्वत ने चुनाव आयोग के समक्ष रखा था, जिस पर संज्ञान लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने नोएडा निर्वाचन अधिकारी को इस मामले की जांच के आदेश दिये थे और इसी आदेश के नतीज़तन नोएडा के एडीएम वित्त एवं राजस्व सर्वजीत राम ने एक नोटिस सहारा इंडिया मीडिया को भेजकर एक हफ्ते के भीतर जवाब तलब किया है.
साथ नोटिस में ये भी जानकारी दी गई है कि अगर एक हफ्ते के भीतर जवाब पेश नहीं किया गया तो सहारा समय चैनलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस नोटिस को सार्वजनिक तौर पर नोएडा के कई मीडियाकर्मियों की मौजूदगी में सहारा मीडिया के प्रतिनिधि को सौंपा गया. इस नोटिस के बाद से सभी मीडिया कार्यालयों में चर्चा का माहौल है. हर कोई हैरान है कि सहारा जैसा बड़ा मीडिया नेटवर्क आखिर इतना नीचे कैसे गिर सकता है. किसी ने ठीक ही कहा है कि बैलगाड़ी चलाने वाले को अगर हवाई जहाज उड़ाने की छूट दोगे तो हवाई जहाज क्रैश तो होगा ही कुछ ऐसा ही हाल मौजूदा दिनों में सहारा मीडिया का भी होता जा रहा है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





