भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों की पंचायत बुलाने की घोषणा करके सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। प्रदेश के पत्रकारों के अलावा पूरे हिंदुस्तान में पत्रकारिता की नई परिभाषा लिखने के उनके इस अंदाज ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मध्यप्रदेश वास्तव में राजनीति की प्रयोगशाला है जहां से पूरे देश के सुशासन के फार्मूले तैयार हो रहे हैं। पत्रकारों की समस्याओं के समाधान खोजने की इस पहल का प्रदेश के पत्रकारों ने भी स्वागत किया है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इस घोषणा से सत्ता के दलाल कहे जाने वाले लोग परेशान हैं। उन्हें लग रहा है कि यदि मुख्यमंत्री प्रदेश के आम पत्रकारों से सीधे जुड़ जाएंगे तो उन लोगों की पोल खुल जाएगी कि किस तरह वे अब तक झूठी सूचनाएं फैलाकर सरकार को गुमराह करते रहे हैं। पत्रकारों की इस पंचायत का स्वागत करने के लिए आज प्रदेश के पत्रकारों की ओर से श्री आदित्य नारायण उपाध्याय, श्री ओम प्रकाश हयारण और श्री आलोक सिंघई ने प्रेस वार्ता आयोजित की। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर पत्रकारों के विचार सरकार तक पहुंचाने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जो पत्रकारों की ओर से मिलने वाले सुझाव एकत्रित करेगी। प्रदेश के पत्रकार ये सुझाव ईमेल या पत्र के माध्यम से भेज सकते हैं। ये ईमेल [email protected] पर भेजे जा सकते हैं। पत्र व्यवहार के लिए प्रेस इंफार्मेशन सेंटर, ऊपरी भूतल-7,अलकनंदा काम्पलेक्स, इंदिरा प्रेस काम्पलेक्स, जोन-1, एमपी नगर भोपाल के पते पर अपनी प्रतिक्रियाएं भेजी जा सकती हैं। पत्रकारों की समस्याओं और सुझावों को बिंदुवार रूप में संकलित करके सरकार तक पहुंचाया जाएगा। इस जानकारी में सुझाव भेजने वाले पत्रकार का नाम, पता, फोन नंबर, मोबाइल नंबर और ई मेल पता भी दर्शाया जाएगा।
पत्रकारों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पत्रकारों की समस्याओं पर विचार करने और प्रदेश में स्वस्थ संवाद का तंत्र कायम करने की दिशा में जो रुचि दिखाई है वह सराहनीय है। हाल ही में पत्रकार भवन को बारह सालों बाद पहली बार पत्रकारों की समिति को सौंपा गया है। इससे प्रदेश के पत्रकारों को राजधानी में एक बार फिर अपना स्थायी मंच मिल गया है। उन्होंने बताया कि भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्केंण्डेय काटजू ने कई मंचों पर पत्रकारिता की स्थितियों पर क्षोभ व्यक्त किया है। उनका प्रयास है कि देश में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूती प्रदान की जाए और उसे संवैधानिक आधार प्रदान किया जाए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय प्रेस परिषद की उसी मंशा के अनुरूप पत्रकारों से संवाद करने और प्रेस को मजबूत आधार प्रदान करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
पत्रकारों की समस्याओं से सरकार को अवगत कराने के इन प्रयासों में ये तथ्य भी उजागर किया गया है कि वर्तमान सरकार ने जनसंपर्क विभाग का बजट पांच गुना बढ़ाकर लगभग दो सौ करोड़ रुपए कर दिया है। इससे प्रदेश की पत्रकारिता को मजबूत आधार प्रदान किया जा रहा है। सरकार अपने इन प्रयासों से बेहतर जनसंवाद कायम करने जा रही है। इसके बावजूद सत्ता के दलाल इस बजट को अवैधानिक तरीकों से हथियाने में जुटे हैं, जिससे सरकार के प्रयासों का लाभ पत्रकारों को नहीं मिल पा रहा है। पत्रकार पंचायत के माध्यम से इस बजट के बेहतर वितरण की व्यवस्था की जा सकेगी। इससे पत्रकारों की समस्याएं तो दूर होंगी ही साथ में सरकार को भी सुशासन कायम करने में सहयोग मिलेगा।






