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तीसरे चरण में निर्णायक हो सकता है पूर्वांचल राज्‍य का मुद्दा

: 15 फरवरी को होगा मतदान : उत्तर प्रदेश से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाने को वर्षों से संघर्ष कर रहे यूपी के पूर्वी जिलों (पूर्वांचल) के करीब पौने दो करोड़ मतदाताओं (मतदाताओं की वास्तविक संख्या 17590935) के लिए यह चुनाव काफी महत्व रखते हैं। अबकी पहली बार अलग पूर्वांचल बनाओं की मांग विभिन्न मंचों पर काफी तेज सुनाई पड़ी। राष्ट्रीय लोकमंच के अमर सिंह जैसे नेताओं ने इस मुद्दे को खूब हवा-पानी दिया तो माया सरकार ने तो विधान सभा में पूर्वांचल को अलग राज्य बनाए जाने का प्रस्ताव ही पास करके केन्द्र को भेज दिया था। कुछ हद तक समाजवादी पार्टी को छोड़कर किसी भी दल ने अलग पूर्वांचल राज्य का विरोध नहीं किया। अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर पूर्वांचल में राजनीतिक रंग पूरे शबाब पर दिखा तो अब पूर्वांचल के मतदाता 15 फरवरी को बटन दवा कर बताएंगे कि उन्हें किसकी बातों पर भरोसा है।

: 15 फरवरी को होगा मतदान : उत्तर प्रदेश से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाने को वर्षों से संघर्ष कर रहे यूपी के पूर्वी जिलों (पूर्वांचल) के करीब पौने दो करोड़ मतदाताओं (मतदाताओं की वास्तविक संख्या 17590935) के लिए यह चुनाव काफी महत्व रखते हैं। अबकी पहली बार अलग पूर्वांचल बनाओं की मांग विभिन्न मंचों पर काफी तेज सुनाई पड़ी। राष्ट्रीय लोकमंच के अमर सिंह जैसे नेताओं ने इस मुद्दे को खूब हवा-पानी दिया तो माया सरकार ने तो विधान सभा में पूर्वांचल को अलग राज्य बनाए जाने का प्रस्ताव ही पास करके केन्द्र को भेज दिया था। कुछ हद तक समाजवादी पार्टी को छोड़कर किसी भी दल ने अलग पूर्वांचल राज्य का विरोध नहीं किया। अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर पूर्वांचल में राजनीतिक रंग पूरे शबाब पर दिखा तो अब पूर्वांचल के मतदाता 15 फरवरी को बटन दवा कर बताएंगे कि उन्हें किसकी बातों पर भरोसा है।

प्रस्तावित पूर्वाचल राज्य में जो जिले शामिल हैं, उसका एक बड़ा भाग (दस जिले) तीसरे चरण में मतदान करने जा रहा है। वैसे यहां एक मात्र अलग राज्य बनाने का मुद्दा ही छाया रहेगा, ऐसा भी नहीं है। प्रदेश के अन्य जिलों की तरह यहां की भी जनता बिजली-पानी-सिंचाई-भ्रष्टाचार-मंहगाई के अलावा यहां के परम्परागत कालीन और साड़ी उद्योग के चौपट होने से भी दुखी है। बुनकर कर्ज में डूबे हैं। पॉवरलूम बंद पड़े हैं। मतदाता आरक्षण, मंदिर-मस्जिद विवाद, नेताओं के बीच जारी बाहरी-भीतरी की लड़ाई से अलग रोजमर्रा की समस्याओं से छुटकारा और चौपट होते उद्योग-धंधों को फिर से खड़ा होता देखना चाहती है।

तीसरे चरण में 15 फरवरी को दस जिलों सुलतानपुर, छत्रपति शाहूजी महराज नगर, कौशाम्बी, इलाहाबाद, जौनपुर, वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही जिले की 56 सीटों के लिए मतदान होगा। नये परिसीमन ने इन जिलों की विधानसभा सीटों का भूगोल पूरी तरह बदलकर रख दिया है। पुराने नामों की जगह नये क्षेत्रों ने ली ली है। पूर्वांचल में जो प्रमुख चेहरे चुनावी जंग जीतने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं, उसमें भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व विधान सभा अध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी, प्रदेश काग्रेस अध्यक्षा रीता बहुगुणा जोशी के भाई शेखर बहुगुणा, जितेन्द्रनाथ सिंह, श्याम सूरत उपाध्याय, उदयभान करवरिया, ओम प्रकाश दुबे, बसपा सरकार में मंत्री नंद गोपाल नंदी, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह, लोकायुक्त की जांच के दायरे में आए बसपा नेता रंगनाथ मिश्र, जयप्रकाश चतुर्वेदी, पूर्व डिप्टी एसपी वाराणसी शैलेन्द्र सिंह (जिन्होंने भ्रष्टाचार से तंग आकर नौकरी छोड़ दी थी), नदीम जावेद जैसे नेता शामिल हैं। वही बाहुबली अतीक अहमद, मुन्ना बजरंगी, विजय मिश्र, अवधराज सिंह ,अजय प्रकाश सिंह, प्रेम सिंह, केशव प्रसाद, रविकांत, यशभद्र सिंह, अब्दुल समद अंसारी, सुशील सिंह जैसे नाम शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के जिन दिग्गज नेताओं और स्टार प्रचारकों की ही प्रतिष्ठा दांव पर लगी हैं उसमें कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी, भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी, सपा के दिग्गज रेवतीरमण सिंह और बसपा के कद्दावर नेता इन्द्रजीत सरोज का नाम प्रमुख है। तीसरे चरण में कुल 1029 प्रत्याशी अपनी किस्मत अजमा रहे हैं, इसमें से 122 प्रत्याशी करोड़पति हैं। सबसे अधिक धनी उम्मीदवारों की लिस्ट में बसपा मंत्री नंद गोपाल नंदी का नाम सबसे ऊपर है। उनके पास 95 करोड़ से अधिक की सम्पति है। सपा प्रत्याशी अनूप सांडा, कांग्रेस की अनिता सिंह, भाजपा के उदयभान करवरिया, बसपाके अनिल मौर्या, बसपा के रंगनाथ, अपना दल के अतीक अहमद, पीएमएसपी के बृजेश सिंह भी करोड़पतियों की लिस्ट में शामिल हैं। सभी उम्मीदवार पैसे वाले हों ऐसा भी नहीं है। वाराणसी उत्तर से पीस पार्टी के ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह के पास मात्र 37,476 रुपए हैं। जो प्रत्याशी लखपति भी नहीं हैं उसमें प्रमुख रूप से कौमी एकता दल के जावेद अख्तर, मोहित कुमार, अपना दल के श्रीकांत, जदयू के ओम प्रकाश शामिल है। वहीं दागी उम्मीदवारों की लिस्ट में ब्रृजेश सिंह 39 आपराधिक मामलों के साथ ताल ठोंक रहे हैं। इस चुनावों में सभी दिग्गज प्रत्याशी अपना मुकाबला बसपा से ही मान रहे हैं तो बसपा को भी अपनी प्रतिष्ठा बचाने की चिंता है।

सोलहवीं विधानसभा के लिए सजे इस चुनावी समर में इन क्षेत्रों में प्रमुख राजनीतिक दलों के दिग्गजों के मान सम्मान के साथ ही खुद चुनाव लड़े कई पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव, पूर्व सांसदों की प्रतिष्ठा भी दांव पर हैं। ये नेता खुद तो मुकाबले में हैं ही? इसके अलावा कई सीटों पर उनके परिजन भी मैदान में डटे हुए हैं। बात पिछली विधानसभा की करी जाए तो 15वीं विधान सभा में इन नौ जिलों में 53 सीटें ही थी। मगर इस बार तीन सीटें बढ़ गयी हैं। बीते चुनाव में बसपा ने 31 सीटें जीत विरोधियों को धूल चटा दी थी। सपा को 12, भाजपा को छह, कांग्रेस को तीन और जनता दल यू को एक सीट मिली थी। मगर इस बार समीकरण बदल गये हैं। बसपा सत्तारूढ़ दल के रूप में चुनावी समर में हैं पार्टी नेतृत्व ने इन क्षेत्रों से चुनाव जीते 12 ऐसे विधायकों के टिकट काट दिए हैं, जो पांच साल तक मायावती मंत्रिमंडल में शामिल रहे। बसपा ने पुराने चेहरों में से 14 को टिकट दिया है। लोकायुक्त जांच में दोषी पाये जाने पर मंत्री के बाद पद गंवाने वाले रंगनाथ मिश्र जातीय समीकरण में फिर से मिर्जापुर से उम्मीदवारी पाने में सफल हो गये।

तीसरे चरण की इन विधानसभा सीटों में शामिल अमेठी सबसे अधिक चर्चा में है। यहां से निकली हाथ-जीत ही नहीं, हार-जीत के अंतर की भी खूब समीक्षा होती है। अमेठी से एक बार फिर श्रीमती अमिता सिंह चुनावी जंग में हैं। उनके पति डा संजय सिंह खुद सुल्‍तानपुर से सांसद हैं। संजय सिंह के रिश्ते कभी गांधी परिवार से काफी घनिष्ट थे। वैसे भी अमेठी विधान सभा क्षेत्र कांग्रेस युवराज राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र का अहम हिस्सा हैं। कौशाम्बी जिले की मंझनपुर सीट से बसपा के कद्दावर नेता व राज्य के समाज कल्याण मंत्री इन्द्रजीत सरोज तो इलाहाबाद की फाफामऊ सीट से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा के भाई शेखर बहुगुणा भाग्य आजमा रहे हैं। इसी जिले की हण्डिया सीट से मायावती सरकार में पांच साल तक उच्च शिक्षामंत्री रहे राकेशधर त्रिपाठी को टिकट कटने पर अब निर्दल ही बसपा प्रत्याशी व अपने भतीजे से चुनावी जंग लड़नी पड़ रही है। इलाहाबाद जिले की फूलपुर सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक जोखूलाल यादव अब केसरिया रंग में रंगे किला फतह करने में जुटे हैं।

इलाहाबाद जिले की करछना सीट से लंबे समय तक विधायक चुने गये रेवती रमण सिंह के बेटे उज्जवल रमण सिंह अभी विधायक हैं। उज्जवल एक बार फिर क्षेत्र में साइकिल पर सवार हैं। इलाहाबाद (दक्षिण) सीट से विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी फिर भाग्य आजमा रहे हैं। उनके मुकाबले में बसपा सरकार के मंत्री नन्दगोपाल गुप्ता नन्दी है। नन्दी ने ही पिछली बार केशरीनाथ त्रिपाठी को हराया था। इलाहाबाद (उत्तरी) सीट से बसपा नेत्री रंजना बाजपेई के बेटे हर्षवर्धन बाजपेयी मैदान में हैं। उनका मुकाबला भाजपा  विधायक उदयभान करवरिया से है। बसपा सरकार में मंत्री धर्मराज निषाद को अम्बेडकर जिले के स्थान पर जौनपुर की शाहगंज सीट से मैदान में उतारा है। यहां उन्हें विरोधियों की कड़ी चुनौती झेलनी पड़ रही हैं। इसी जिले की जफरबाद सीट से कई बार से चुनाव जीत रहे प्रदेश के रेशम मंत्री जगदीश नारायण राय चुनावी समर में विरोधियों को शिकस्त देने को जुटे हैं। बसपा द्वारा संस्कृति मंत्री सुभाष पाण्डेय को टिकट नहीं दिया है। जौनपुर की मल्हनी सीट से पूर्व सांसद पारसनाथ यादव सपा उम्मीदवार हैं तो वाराणसी की पिण्डरा सीट पर बाहुबली अजय राय कांग्रेस का झंडा उठाए हुए हैं।

वाराणसी (दक्षिण) से छह बार विधायक चुने जा चुके श्याम देव राय चौधरी के हाथ भाजपा ने एकबार फिर ‘कमल‘ खिलाने की  जिम्मेदारी सौंपी हैं। कांग्रेस ने अबकी वाराणसी के दिग्गज नेता और पूर्व रेल मंत्री स्व. कमलापति त्रिपाठी के परिवार के ललितेशपति त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाकर ब्राह्मण वोटों को अपने पाले में करने की रणनीति बनायी हैं तो ठाकुर मतदाताओं पर पकड़ बनाने को कांग्रेस ने पूर्वमंत्री वीरेन्द्र सिंह को शिवपुर सीट से उतारा है। मिर्जापुर जिले की चुनार सीट से लम्बे समय से विधायक चुने जा रहे भाजपा विधानमंडल दल के नेता ओमप्रकाश सिंह फिर जनता के बीच हैं। मिर्जापुर जिले की बात करें तो पूर्व प्रमुख सचिव राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय इस बार समाजवादी बन मझवां सीट से चुनावी जंग लड़ रहे हैं। प्रमुख रजनीतिक दलों के इन प्रत्याशियों के अलावा बाहुबली और माफिया भी मैदान में हैं। इनमें अतीक अहमद ( इलाहाबाद) मुन्ना बजरंगी (वाराणसी) और बृजेश सिंह (चंदौली) जिले से जेल में बंद रहकर ही चुनाव जंग में लोहा ले रहे हैं।

कई छोटे दलों के प्रत्याशी भी चुनावी जंग में बड़ों को पानी पिलाने की तैयारी में हैं। अमर सिंह का राष्ट्रीय लोकमंच के अमर सिंह, पीस पार्टी के डा. अयूब, अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल जैसे नेताओं की यहां अपनी अलग पहचान हैं। इन दलों के नेता काफी लम्बे समय से जनता से जुड़े मुद्दों को हवा दे रहे थे, चुनावी फसल काटने की बारी आई तो बड़े दल मैदान में उतर आए। देखना यह है कि यह छोटे दल कितना विश्वास मतदाताओं का जीत पाते हैं। तीसरे चरण में भी महिला सशक्तिकरण कहीं गायब दिख रहा है। महज आठ फीसदी महिला उम्मीदवार मैदान में हैं। बसपा ने 04, सपा ने 05, कांग्रेस ने 03, भाजपा ने 06, जदयू ने 04 महिला प्रत्याशियों को ही उम्मीदवार बनाया है। कुल 1029 प्रत्याशियों में मात्र 78 महिलाएं शामिल हैं।

लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार की रिपोर्ट. अजय ‘माया’ मैग्जीन के ब्यूरो प्रमुख रह चुके हैं. वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं.

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