बिहार की सरकार कानून के राज का नारा अमल में लाये जाने की बात कहती है पर असलियत कोसों दूर है. यह बात अलग है कि असलियत अखबारों में नहीं आती क्योंकि यहाँ लिखना मना है. नीतीश कुमार के राज का गुणगान करने वाली पत्रकार बिरादरी इस खबर को पढ़कर अफ़सोस नहीं जाता पायेगी लेकिन दूसरे लोग कह उठेंगे वाह री सरकार वाह रे प्रशासन वाह रे पत्रकार. बात को घुमाने फिराने के बजाय मुद्दे की बात की जाए. बिहार के महात्मा गाँधी सेतु पर टोल टैक्स की वसूली करने वाले गुंडों ने पत्रकार के पूरे परिवार को दौड़ा दौड़ा कर पीटा. जमकर पीटा. सड़कों पर लिटा कर पीटा. तब तक पिटाई होती रही जब तक की वैशाली जिले के गंगा ब्रिज थाने की गश्ती गाड़ी वहां नहीं पहुँची.
हमवतन साप्ताहिक अखबार के ब्यूरो प्रमुख जीवन ज्योति और भागलपुर हिंदुस्तान कार्यालय के सीनियर पत्रकार कुमार जितेन्द्र ज्योति अपने पूरे परिवार के साथ समस्तीपुर से अपनी बहन का तिलक चढ़ा कर लौट रहे थे. पटना वापसी के क्रम में टोल टैक्स की वसूली के काम में लगे गुंडों ने कुमार जितेन्द्र ज्योति की गाड़ी को रोका और चालान कटाने को कहा. जितेन्द्र ज्योति पैसे निकाल कर टोल टैक्स मांगने वाले को देने लगे. पैसे देने के बाद टोल टैक्स वाले ने रसीद दिया और जब पूरा परिवार आगे बढ़ा तो दुबारा इन लोगों को रोक कर रसीद मांगा. कुमार जितेन्द्र ज्योति ने रसीद दिखाया पर शराब के नशे में चूर लोगों ने रसीद को नकली बताया.
जितेन्द्र ज्योति ने रसीद को असली बताया और कहा कि वो चाहें तो काउंटर पर जाकर जांच कर लें. इतना कहते ही गुंडों ने जितेन्द्र ज्योति का कालर पकड़ लिया और गालियाँ बकनी शुरू कर दी. ज्योति द्वारा विरोध करने के बाद उनके साथ मारपीट शुरू हो गयी. जितेन्द्र ज्योति के साथ मौजूद उनके चाचा ने जीवन ज्योति को इसकी सूचना दी. जीवन ज्योति जब पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट शुरू हो गयी. जीवन ज्योति और उनके भाईयों ने विरोध किया तो लाठी डंडे के साथ दो दर्जन की संख्या में रहे गुंडों ने सबों की पिटाई शुरू दी. पत्रकार भाईयों के साथ पूरे परिवार को सड़को पर दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया.
किसी तरह सब लोग जान बचाकर भागे पर इतने से भी गुंडों का मन नहीं भरा और पत्रकार परिवार के भागने के बाद वाहनों पर सवार होकर गुंडों ने इनकी गाड़ियों को ओवरटेक कर रोका और दुबारा पिटाई शुरू की गयी. करीब आधे घंटे तक सबों की पिटाई जारी रही. इसी बीच वैशाली जिला के गंगा ब्रिज थाना की गश्ती गाडी आई और पुलिस जमादार प्रभुनाथ सिंह ने किसी तरह बीच बचाव कर पत्रकारों को छुड़ाया. सुबह होने पर जीवन ज्योति ने इस शर्मनाक घटना की जानकारी अपने मित्र कुमार कृष्ण को दी. कुमार कृष्ण ने तत्काल जद यू विधान पार्षद नीरज कुमार और वैशाली के एसपी उपेन्द्र कुमार सिन्हा को मामले से अवगत कराया और हस्तक्षेप की गुहार लगाई. नीरज कुमार ने भी तत्काल एसपी से बात की और कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा.
एसपी ने भी घटना को दुखद बताया और डीएसपी को जीवन ज्योति से बात कर पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया. डीएसपी ने जीवन ज्योति से बात कर कार्रवाई का आश्वासन दिया. एसपी के निर्देश पर कुमार जितेन्द्र ज्योति के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी. एसपी ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. पूरी घटना से साफ़ है कि गुंडों की मनमानी कितनी बढ़ी हुई थी. हालांकि इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुयी थी. पता चला है कि पत्रकारों के परिवार को पीटने वाले निजी सुरक्षा संस्था एसआईएस से जुड़े हैं. देखना होगा कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है. पहले भी नितीश राज में पत्रकारों पर हमले होते रहे हैं पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुयी है.





