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‘दीपक चौरसिया और संदीप चौधरी के पास उर्जा बहुत है पर दर्शकों के काम की नहीं’

अजीत अंजुम ने फेसबुक पर दीपक चौरसिया को टीवी मीडिया का सबसे ज्यादा एनर्जेटिक रिपोर्टर क्या बताया, बड़ी बहस की शुरुआत हो गई. दीपक चौरसिया और न्यूज चैनलों की पत्रकारिता को लेकर लोगों ने अपने अपने विचार रखने शुरू कर दिए. कुछ ने अजीत अंजुम की बात से असमहति जताई तो कुछ ने नौकरी देने का अनुरोध करते हुए वादा किया कि मौका मिलने पर वे दीपक से बड़ा तीर मारेंगे. कई एंगल आए. पढ़ेंगे तो आप भी सोच विचार के हर पहलू से अवगत हो सकेंगे. -एडिटर, भड़ास4मीडिया

अजीत अंजुम ने फेसबुक पर दीपक चौरसिया को टीवी मीडिया का सबसे ज्यादा एनर्जेटिक रिपोर्टर क्या बताया, बड़ी बहस की शुरुआत हो गई. दीपक चौरसिया और न्यूज चैनलों की पत्रकारिता को लेकर लोगों ने अपने अपने विचार रखने शुरू कर दिए. कुछ ने अजीत अंजुम की बात से असमहति जताई तो कुछ ने नौकरी देने का अनुरोध करते हुए वादा किया कि मौका मिलने पर वे दीपक से बड़ा तीर मारेंगे. कई एंगल आए. पढ़ेंगे तो आप भी सोच विचार के हर पहलू से अवगत हो सकेंगे. -एडिटर, भड़ास4मीडिया


Ajit Anjum : टीवी मीडिया में दीपक चौरसिया से ज्यादा Energetic रिपोर्टर दूसरा कोई नहीं ..उत्तराखंड और पंजाब से लेकर यूपी तक …स्टार न्यूज पर दीपक को लगातार Shows करते देख रहा हूं …एक शहर से दूसरे शहर …लगातार….हालांकि कई बार इतना हंगामा होने लगता है कि पता नहीं चलता कि कौन क्या कह रहा है . हवा में टंगे कैमरे ऊपर नाचने लगते हैं और मुंडियां गिनने के सिवा आप कुछ नहीं कर सकते …कम से कम कुछ सुन – समझ तो नहीं सकते ….


        Anand Dutta : wo jitne reportr hain utne hi polotician v hai, isliye itni aasani se ye sb kr rahe hain…..
        
        Atul Agrawaal वाकई सर. मैं डीडी न्यूज़ में उनकी टीम में था. पता ही नहीं चलता कि वो सोते कब हैं और जागते कब लेकिन ख़बर की क्या मज़ाल दीपक चौरसिया से बच के निकल जाए. अद्भुत उर्जा का पुंज हैं दीपक सर.
        
        Abhishek Anand हूं.. अमूमन और लगातार मीडिया में कहां आ गए.. अभी भी वक्त है निकल जाओ.. जैसे बातें..वो भी तर्क के साथ सुनने के बाद जो निगेटिव इनर्जी आ जाती है उसे बैलेंस करने के लिए दीपक चौरसिया जैसे लोगों के वक्तव्य.. रिपोर्टिंग.. एंकरिंग काफी फायदेमंद होता हैं.. गांधी मैदान के एक शो के दौरान उनकी टीम के साथ था.. अबीर और गुलाल से भीड़ के उन्हें हांफने पर मजबूर कर दिया था.. प्रोड्यूसर किसी तरह बचा लिएं..
        
        Alok Kumar ‎@anand ji- ख़बर चल कर आपके पास नहीं आती..इसके लिए आपको जाना पड़ता है..ख़ास कर पॉलिटिकल रिपोर्टिंग
        
        Puneet Shukla आपकी बात ठीक है सर लेकिन इसके लिए तीन चीज का होना जरूरी है -किस्मत, ऊर्जा, और कद………
        
        Alok Kumar ऊर्जा है तो क़द भी मिलेगा..हां किस्मत का मामला अलग है.. आजतक की पहली पीढ़ी से होने के फायदे को नकारा नहीं जा सकता.
        
        Ajay Singh अपनी उर्जा अगर निष्‍पक्ष रिपोटिंग में लगये तो पत्रकारिता जगत का भलाई हो। पी साईनाथ जैसे पत्रकार बिना लाईमलाइट में रहे जो काम कर जाते है वह पत्रकारिता का मापदंड बन जाता है। कुमार दीपक (पीपली लाईव) जैसे पत्रकारिता का क्‍या औचित्‍य ।
        
        Tarun Kumar Tarun
        एनर्जेटिक दीपक नहीं, उनका चैनल है ! इसका पूरा क्रेडिट सिर्फ दीपक को नहीं दे सकते. स्टार का प्रभुत्व और ग्लैमर उन्हें ज्यादा ज्यादा भव्य और ऊर्जावान रिपोर्टर पेश करता है. दीपक ने यही कमाल दूरदर्शन न्यूज़ में क्यों नहीं दिखाया था? अगर दीपक किसी टोटल टीवी या पी7 में ऐसी ही रिपोर्टिंग करते दीखते तो क्या उनकी भव्यता झलकती या आप इसकी चर्चा करते? उनके मामले में मैकलूहान का यह सिद्धांत काम कर रहा है कि "मीडियम इज द मेसेज"! दीपक को बेहतर माध्यम मिला हुआ है. उनकी योग्यता को नाकारा नहीं जा सकता, पर उन्हें लीक बनाने वाला रिपोर्टर भी नहीं माना जा सकता. उनकी विश्लेषण क्षमता भी औसत दर्जे की रही है. दीपक रिपोर्टिंग का हंगामाखेज और कारपोरेट फेस हो सकते हैं!
       
        Sandeep Jha सर वाकई राजनीतिक रिपोर्टिंग में उनकी उर्जा देखते ही बनती है। स्टूडियो के अंदर यही हाल पूण्य प्रसून जी का है। मार्केट ने इन चेहरों को अलग अलग कर दिया। कभी फिर से एक बैनर के नीचे सब खड़े हों तो मजा आ जाए।
       
        Adarsh Jha : Absolutely right Sir….i have seen him during bihar elections and also worked under his guidence while internship in aajtak…. I was also there in bihar for election coverage but he is really very good and inspirational too.
       
        Ankit Mutreja सर ..हिन्दी पत्रकारिता का जो फटीचर काल चल रहा है… कुछ भी हो मुझे अंदर की जानकारी नही है पर कुछ चुनिंदा पत्रकार है जो उसका अस्तित्व उसकी आत्मा है या उसे सीलने में लगे है उसे फटने नही देते जैसे के अजीत अंजुम सर, रविश कुमार सर, अभिज्ञान प्रकाश सब अपनी अपनी कला में माहिर है. इन्हे देख ठगा महसूस नहीं करता. | दीपक सर का कौन बनेगा मुख्यमंत्री देखा पब्लिक कुर्सिया आलू,टमाटर की तरह फेके जा रही थी लेकिन उन्होने फिर भी ना जाने किस दिलेरी से सवाल जवाब का सिलसिला चालू रखा और जो आदमी किसी पार्टी का वाह वाह करने लगता उससे माइक छीनने में भी परहेज नही किया. है चल रहा है |
       
        Jayram Viplav दीपक चौरसिया और संदीप चौधरी, इन दोनों के पास उर्जा बहुत है पर दर्शकों के काम की नहीं है| इनका चुनावी शो सोनपुर का गुलाब विकास थियेटर नजर आता है| ( हो-हल्ला …. छिना झपटी -कूड़ा फंदी ………)
       
        Tarun Kumar Tarun अजित जी आपने बड़ी आसानी से दीपक को सर्वाधिक एनर्जेटिक पत्रकार का तमगा और प्रमाणपत्र थमा दिया. यह आपके विजन से मेल नहीं खाता. विजुअल मिडिया आँखों से देखने की आदत लगाता है, वहां दिमाग की भूमिका को थोड़ा गौण माना जाता है ! जो दिखाया जाता है उसे ही पूरी पत्रकारिता मान लिया जाता है. यह माध्यम कई बार 'अंधे धृतराष्ट्र के लिये संजय की रिपोर्टिंग' का ढर्रा तय करता है. दीपक चौरसिया की 'पंचरासिया पत्रकारिता' का जय जय गान करने वाले लोगों को मीडिया की विराटता में से कोई ऐसा रत्न चिन्हित करना चाहिए जो वाकई परफेक्शनिस्ट पत्रकार होने का माद्दा रखते हों ! दीपक ने पत्रकारिता के इतिहास में शुमार करने लायक कोई देश-दुनिया हिलाऊ रिपोर्ट कभी सृजित की होगी तो बताइएगा, किताब लिखूंगा तो उसमे शामिल करूँगा !
       
        Umesh Kumar अजीत जी…. दीपक मध्य प्रदेश के छोटे से गाँव से निकलकर आज अपनी मेहनत से जहाँ पहुंचे हैं ….वहां पहुंचना किसी भी व्यक्ति के लिए एक उपलब्धि है…. उन्हें किसी की टिप्पणी की जरुरत नहीं है…. अजीत जी आपने जो लिखा वो बिलकुल सही है. और मै समझता हूँ की दीपक पर वो टिप्पणी करे जो कद में उसके समकक्ष या बड़ा हो.
        
        Ajit Anjum तरुण जी , मैं ये नहीं मानता कि सिर्फ मौके मिलने भर से हर रिपोर्टर दीपक चौरसिया जैसी ऊर्जा और रफ्तार हासिल कर सकता है… दीपक के समकालीन बहुत से रिपोर्टर हैं, जिन्हें काफी मौके मिले हैं …..
        
        Deepak Pokharia : Sahi kaha ajit sir
        
        Vikas Tripathi अवसर और अंदर की आग दोनो का संयोग बनाता है आपको खास…..
        
        Mukund Shahi मीडिया का संक्रमण काल चल रहा है…मीडिया में चापलूसों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है…ऐसे में बस लोग अपने बॉस की चमचागिरी करके चंद सालों में ये समझ बैठते हैं कि अब उन्हें सीखने के लिए कुछ बचा नहीं…आज वैसे ही रिपोर्टर तरक्की की राह पर अग्रसर हैं…लेकिन इस संक्रमण काल में भी दीपक जी जैसे चंद लोग हैं जो खुद को आज भी रिपोर्टर ही समझते हैं….हम सब को सीख लेनी चाहिए….न कि मौके की बात कहकर विधवा विलाप….
        
        Tarun Kumar Tarun यहाँ कद और आदमकद होने की बात नहीं है. 'असहमति का स्वर' भी पत्रकार का फ़र्ज़ है. मातहती विचार का इजहार आप सब (अजित जी को छोड़कर) को दीपक के करीब तो ले जायेगा, पर पत्रकरिता के विजन से दूर रखेगा. वैचारिक रीढ़ बची रहेगी तो अच्छी पत्रकरिता कर पाएंगे आप सब. अजित जी, ऊर्जा और तेज पत्रकार की रचनात्मकता में होते हैं, भोपूं और गलाफाड़ प्रस्तुति में नहीं ! कामयाबी की परिभाषा सापेक्ष और निरपेक्ष दोनों होती है. अपने किस लिहाज से दीपक का आकलन किया है, वो तो आप जाने. हाँ आज की गलाकाट स्पर्धा के लिहाज से आपने उनकी कामयाबी का जो मानक तय किया है, उसमे मैं थोड़ा सहमत और थोड़ा असहमत भी हूँ! और दीपक ही इस देश में एक अदद कामयाब पत्रकार भी नहीं हैं! अर्णव, राजदीप, आदि का भी तो हम ख्याल कर सकते हैं!
        
        Ankit Gupta : Sir… aapki baat se puri tarah ittefaq rakhta hun… aur log iske vipaksh mein apne vichaar rakh rahe hai zara ek field mein aakar is tarah se fipublic ko handle karke dikhaye tab zameeni haqiqat ka andaaza hoga…. waise bhi electronic me…See more
        
        Tarun Kumar Tarun दीपक को रामजेठमलानी ने जब बोलती बंद कर माइक लेकर भागने पर मजबूर किया था, वह याद नहीं है बंधुओं!
        
        Chanchal Tripathi मेरी नजर मे दीपक जी एक बहुत ही ऊर्जावान और बेहतरीन रिपोर्टर हैं, उन्हें गाँव तक के लोग भी जानते हैं कि यह है दीपक चौरसिया । रही कौन बनेगा मुख्यमंत्री प्रोग्राम मे अपना आपा भी खो बैठे एक युवक को मुँह पकड़कर धक्का जोर का दिया था, मुझे कभी कभी लगता है कि दीपक काफी दबाव में रहते हैं । कई कार्यक्रमों मे पारदर्शिता नजर नहीं आती हो सकता है इसमे दीपक का कसूर नहीं है, जो दीपक के ऊपर है शायद उनके दबाव मे ये सब करते हों ।।
        
        Anant Kumar Jha नो कमेन्ट…….लब सिल लिए हैं हमने.
        
        Sudhir Kumar Pandey सर आप दीपक जी को compliment कर रहे हैं या फिर star news पर comment कर रहे हैं ??????
        
        Sabir Khan : jo dikega… bus vo he bikega… no comments..!!
        
        Vivek Anand सर कई बार नहीं ….लगभग हरेक बार हंगामा होता है…बिहार बिधानसभा के दौरान मुझे याद है कि वो सिवान में कार्यक्रम करने गए थे…घोड़े से उतरे और मो0 सहाबुद्दीन के बारे में कुछ कहा…पिर क्या था समर्थकों ने घोड़े से उतरने का इंतजार भी नहीं किया… और मचाने लगे तांडव…इस दौरान उम्हें चोटों भई आयीं थी…लेकिन ठीक इसके एक दिन बाद जब मैं अपनी टीम लेकर गया तो ये सुनने में आया कि लोग कह रहे थे कि कल वो पिटा था आज ये पिटेगा…लेकिन दीपक जी के साथ हुए वाक्ये से मैने सबक ले ली थी..और मैंनें कार्यक्रन को एक घंटे तक अछ्छई तरह से चलाया…और काफी तेवर के साथ….तो सर ये घटनाएं होती रहती हैं…और एक सच्चाई ो ङी होची गै कि आगे की पंक्ति में बैठे लोग कार्यकर्ता ही तो होते हैं..आगर उनकी पार्टी के लोगों को बोलने का मौका दे दिया जाए तब तो ठीक है …अगर नहीं दिया…तब तो प्रोग्राम का हो गया सत्यानाश…गुस्सा तो खूब आता है मगर किया भी क्या जा सकता है..
        
        Dinesh Mansera : sir humen bhi koi aisa package de do ..aapki umeedo per khara uternge,,..
        
        Kavita Sharma : me too i m waiting for ths
        
        Pankaj Kaushik : sir aapne jo likha hai usame sahmat hu
        
        Ubaidur Rehman एक दिन मैंने दीपक जी से पूछा था उनकी कामयाबी का राज़ जवाब मिला "काम काम और सिर्फ काम दूसरी चीज़ सही समय पर सही जगह पाए जाना"! बात में दम था इसलिए मैंने अगला सवाल नहीं किया ! स्टार और दीपक दोनों ही रौशनी करते है इसीलिए काम करने वाले लोग स्टार न्यूज़ में चमक जाते है !
        
        Sunit Tyagi : bahut khoob

साभार : फेसबुक

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