स्टार न्यूज का "कौन बनेगा मुख्यमंत्री" का कानपुर में आज एक शो हुआ. "दीपक चौरसिया" की एन्करशिप में. लोकसभा चुनाव में भी कानपुर में इन्हीं महोदय ने ऐसा ही कार्यक्रम किया था. एक बार उन्होंने फिर जता दिया की वे बहुत मिस-मैनेज्ड एंकर हैं. और, केवल हंगामा खड़ा करना ही इनकी पत्रकारिता का उसूल बन चूका है. पूरे प्रदेश में अब तक कई जगह ये ऎसी ही घटना क्रियेट कर चुके हैं. इसके लिए इन्हें कोई मलाल नहीं है. जैसा कि बताना ये चाह रहा हूँ, उस पूर्व के कार्यक्रम की पुनरावृत्ति हुयी. एक बार फिर कुर्सियां, जूतम-लात सब चला…
चश्मदीद बताते हैं, इस घटना के लिए दीपक चौरसिया बहुत हद तक जिम्मेदार हैं. "वो" जानबूझकर ऐसा कर रहे थे कि जनता और नेता गुस्से में आ जाएँ. पहले तो उन्होंने भाजपा के युवा, दमदार और सीधी टक्कर के प्रत्याशी हनुमान मिश्र का नाम गलत लिया, फिर विधान सभा क्षेत्र का नाम गलत बताया. हनुमान मिश्र को बार-बार नीचा दिखाने का प्रयास किया. कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में भगवंतनगर, उन्नाव के प्रत्याशी को बुलाकर उन्होंने खेल किया. कानपुर में कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं को दरकिनार कर उसने ऐसे गुमनाम और नए चेहरे को दिखाया जिसे कानपुर की समस्याओं से कोई नाता नहीं रहा था.
समाजवादी प्रत्याशी अशोक अंश्वानी पर सपा के केंद्र के समर्थन के मुद्दे पर बेवजह दबाव बनाने का प्रयास किया गया. निर्मल तिवारी को अनावश्यक समय दिया गया. भाजपा के रघुनंदन भदौरिया से बंद पड़ी एन.टी.सी. मिलों के बारे में जो सवाल पूछा वो कांग्रेसी नेता का सवाल था. चश्मदीद बताते हैं, सबसे बड़ी बात ये रही कि नौटंकीबाज इरफ़ान सोलंकी को लगातार तमाशेबाजी की शह इस महान पत्रकार ने दी.
और, कनपुरियों की क्या कहें? अभी दस दिन भी नहीं हुए हैं कि इंडिया टी. वी. का इसी तरह का कार्यक्रम कुछ धंधेबाजों के द्वारा फेल कर दिया गया था. देश-दुनिया में शहर की क्या इमेज बन रही है, इसकी किसी को कोई फ़िक्र नहीं थी. सभी गरियाने और नंगई में बिजी हो गए. बताते हैं कि दीपक चौरसिया यही चाहते थे. कारण? इस पर कई बातें कहीं जा रही हैं. ईश्वर उनका भला करे. अगर ये आरोप सच है, तो जांच हो कि ये दीपक चौरसिया -पत्रकार है या लुटेरा?
कानपुर के पत्रकार अरविंद त्रिपाठी की रिपोर्ट.





