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एचटी के खिलाफ दूसरे मुकदमे की सुनवाई भी शुरू, लिखित बयान दाखिल

भागलपुर। भागलपुर स्थित श्रम न्यायालय में मेसर्स हिन्दुस्तन टाइम्स लिमिटेड के विरुद्ध रेफरेन्स केस नं0-03/2008 में अदालती सुनवाई शुरू हो गई है। न्यायालय के आदेश पर मुंगेर निवासी कामगार सह स्कैनर राजेश कुमार ने न्यायालय में अपना लिखित वक्तव्य (रिटेन स्टेटमेंट) दाखिल कर दिया है। न्यायालय ने कामगार राजेश कुमार को अपने दावा के समर्थन में गवाह प्रस्तुत करने के लिए आगामी 5 मार्च की तिथि तय कर दी है।

भागलपुर। भागलपुर स्थित श्रम न्यायालय में मेसर्स हिन्दुस्तन टाइम्स लिमिटेड के विरुद्ध रेफरेन्स केस नं0-03/2008 में अदालती सुनवाई शुरू हो गई है। न्यायालय के आदेश पर मुंगेर निवासी कामगार सह स्कैनर राजेश कुमार ने न्यायालय में अपना लिखित वक्तव्य (रिटेन स्टेटमेंट) दाखिल कर दिया है। न्यायालय ने कामगार राजेश कुमार को अपने दावा के समर्थन में गवाह प्रस्तुत करने के लिए आगामी 5 मार्च की तिथि तय कर दी है।

श्रम न्यायालय के न्यायाधीश सह पीठासीन पदाधिकारी अशोक कुमार पांडेय के समक्ष पेश लिखित वक्‍तव्‍य में कामगार राजेश कुमार ने बयान दिया है कि -‘‘मेसर्स हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड(नई दिल्ली) ने उसे अपने मुंगेर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में ‘स्कैनर‘ के पद पर अस्थाई रूप में 31 जनवरी, 2001 से बहाल किया था। उनकी नियुक्ति भागलपुर हिन्दुस्तान संस्करण के तात्कालीक यूनिट प्रभारी विमल सिन्हा और स्थानीय संपादक महेश खरे ने की थी।‘‘

कामगार राजेश कुमार ने अपने वक्‍तव्‍य में आगे लिखा है कि -‘‘यद्यपि उन्हें मुंगेर कार्यालय में स्कैनर के पद पर मौखिक आदेश से नियुक्ति की गई, यूनिट प्रभारी, भागलपुर विमल सिन्हा के आदेश से कामगार से कार्यालय में समाचार विज्ञप्तियों को संग्रहित करने, बांटे गए विभागों के अनुकूल कार्यालय के पत्रकारों के बीच समाचारों का वितरण करने का काम लिया जाता था। इसके अतिरिक्त उनसे प्रखंड के संवाददाताओं क्रमशः प्रकाश प्रियंवद(जमालपुर), मनोज सिंह(बरियारपुर), राजेश ठाकुर (हवेली खड़गपुर), मनोज सिंह (तारापुर), रण्धीर सिंह (संग्रामपुर) और रामप्रवेश सिंह (टेटियाबंबर) से महत्वपूर्ण समाचारों को टेलीफोन पर नोट करने, कार्यालय की फैक्स मशीन पर खबर की कापी प्राप्त करने, अखबार के विज्ञापनदाताओं से विज्ञापन संग्रह करने और विज्ञापन विपत्रों के भुगतान के लिए संबंधित विभागों में तगादा करने का काम भी लिया जाता था।‘‘

कामगार ने अपने स्टेटमेंट में आगे लिखा है कि ‘‘यूनिट प्रभारी और स्थानीय संपादक खुश थे, परन्तु मणिसाना वेज बोर्ड के प्रावधान के अनुरूप में जब से उसने दोनों पदाधिकारियों से नियुक्ति पत्र निर्गत करने और वेतन भुगतान की मांग शुरू की, दोनों पदाधिकारियों का व्यवहार बदल गया और दोनों ने अखबार से निकालने की धमकी देनी शुरू कर दी।‘‘

राजेश कुमार ने आगे बताया है कि ‘‘भागलपुर संस्करण के यूनिट प्रभारी और स्थानीय संपादक से जब भी वे मिले, वे लोग मणिसाना वेजबोर्ड का नाम सुनकर आग-बबूला हो जाते थे और झूठा आश्वासन देकर उससे आठ घंटों से अधिक का काम लेते थे। भागलपुर संस्करण के यूनिट प्रभारी और स्थानीय संपादक दैनिक हिन्दुस्तान और अंग्रेजी दैनिक हिन्दुस्तान टाइम्स के लिए अखबार का धौंस देकर सरकारी विभागों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से विज्ञापन जारी कराने का आदेश दिया। परन्तु, उन्होंने (कामगार) उनके आदेश का मानने से इन्कार कर दिया क्योंकि यह काम कानून अपराध (भयादोहन) के अन्तर्गत आता है।‘‘

अतः जब उसने मणिसाना वेज बोर्ड के प्रावधान के तहत नियुक्ति पत्र और वेतन की मांग की और सरकारी पदाधिकारियों का भयादोहन करने से इनकार कर दिया, तब प्रबंधन ने अचानक वर्ष 2002 के सितंबर माह में कार्यालय में घुसने पर पाबंदी लगा दी। काम से हटाने की कोई लिखित सूचना प्रबंधन ने उसे नहीं दी। एक माह बाद, मुंगेर कार्यालय प्रभारी मनीष कुमार ने पुनः उसे बहाल कर लिया और नौकरी की तिथि से वेतन देने और मणिसाना वेज बोर्ड के अनुकूल स्कैनर पद के लिए वेतन भुगतान का आश्वासन दिया। वह पूर्व की भांति काम करने लगा। पुनः जब उसने नियुक्ति पत्र और वेतन भुगतान की मांग की, प्रबंधन ने उसे वर्ष 2003 के अप्रैल माह में अकारण हटा दिया और कार्यालय में घुसने पर पाबंदी लगा दी। फिर उसे आज तक काम पर वापस नहीं लिया गया।

कामगार ने न्यायालय में रिटेन स्टेटमेंट में आगे बयान किया है कि -‘‘जब उसने मुंगेर कार्यालय प्रभारी से मनीष कुमार से न्याय की गुहार की, उन्होंने उसे डांट-फटकार कर कार्यालय से धक्का मारकर निकाल दिया और कहा कि मणिसाना वेज बोर्ड के तहत वेतन मांगने वालों को कंपनी लात-मारकर निकाल देती है। जाओ, साले, जाओ। राष्‍ट्रपति तक कोई नहीं सुनेगा। असखबार की शक्ति इस भारतवर्ष में ईश्वर से भी अधिक है। ज्यादा उछल-कूद करोगे, तो कंपनी के भाड़े के गुण्डे तुम्हें दूसरी दुनिया में पहुंचा देंगे।‘‘

राजेश ने लिखा है कि -‘‘वह मणिसाना वेज बोर्ड के प्रावधान के तहत वर्किंग जर्नलिस्ट के ग्रुपिंग के अन्तर्गत ग्रुप थ्री (ए) के अन्तर्गत वेतनपाने का हकदार हैं। वह अन्य श्रम कानूनों की सुविधाओं को पाने का भी हकदार है। वह मणिसाना वेज बोर्ड के प्रावधान के अनुरूप जनवरी, 2001 से अप्रैल, 2003 तक अर्थात 27 महीनों के वेतन, जो लगभग एक लाख, 54 हजार, 275 रुपए होता है, पाने के हकदार हैं, जिसे कंपनी को भुगतान करना है।‘‘

मुंगेर से श्रीकृष्‍ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नम्‍बर 09470400813 के जरिए किया जा सकता है.

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