गोरखपुर के किसी अख़बार में दम नही है कि वह यहां के सांसद योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कोई खबर छाप दे. लेकिन नए लांच अखबार जनसंदेश टाइम्स ने यह मिथक 16 फ़रवरी को तोड़ कर अपने साहस और अपने मोटो (खबर के भीतर का सच) को साबित कर दिया. 16 फ़रवरी के महानगर संस्करण में पेज 3 पर आधा पेज से भी ज़यादा बड़ी एक खबर प्रकाशित की गयी है. खबर की हेडिंग है- योगी नहीं चाहते ओवरब्रिज बने. खबर पर सीनियर रिपोर्टर जितेंद्र पांडे का नाम भी है. अंदर के तथ्यों मे सूरज कुंड व तरंग ओवर ब्रिज़ का ज़िक्र है कि किस प्रकार योगी इसे नहीं बनाने दे रहे हैं. खबर की पुष्टि के लिए कुछ स्थानीय लोगों का फोटो सहित बयान भी है.
यह समाचार निकलने के बाद अचानक जनसंदेश टाइम्स अखबार की चर्चा बढ़ गयी. एक खबर से ही गोरखपुर में जनसंदेश टाइम्स की पूछ होने लगी. पूरे शहर में बस यही चर्चा है कि किसी ने योगी के खिलाफ भी लिखने का साहस कर दिया. यहां यह भी बताते चलें कि गोरखपुर से निकलनेवाले प्रायः सभी अख़बारों में योगी के पालतू पत्रकार हैं. ये लोग योगी की सिफारिश पर नौकरी करते हैं. उन पालतू पत्रकारों का काम है योगी की खबर को मैनेज करना. विरोध की खबर को किसी प्रकार रुकवा देना. इसके बदले में योगी उन्हें मंदिर मे विशेष सुविधा और जायज़ नाजायज़ खर्च भी देते हैं. आज जब योगी की पोल खुली तो आम जनता ने भी जनसंदेश टाइम्स को सराहा.
जिस जितेंद्र पांडे ने जनसंदेश टाइम्स में यह खबर लिखी है, उन्हीं ने जब राष्ट्रीय सहारा में योगी के खिलाफ एक खबर लिखी थी तो योगी सहारा वालों पर चढ़ गए और सहारा वाले कायराना काम करते हुए सहारा से जितेंद्र को बाहर का रास्ता दिखा दिया था. बताते हैं कि सहारा के लिए ज़मीन के मामले मे जितेंद्र ने बड़ी मदद की थी. अब जनसंदेश वाले जितेंद्र के साथ क्या करेंगे यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन जितेंद्र की एक खबर ने गोरखपुर में ही नहीं, पूरे पूर्वांचल में तहलका मचा दिया है. लोग यह भी ताज्जुब कर रहे हैं कि जिस शैलेंद्र मणि ने कभी साहस के साथ सच नहीं छापा, आज उनके भी तेवर बदले बदले हैं. अब तो गोरखपुर में सच और साहस की पत्रकारिता ही चल पाएगी. चापलूसी का जमाना लगता है जा रहा है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. आप भी मीडिया को लेकर कुछ कहना बताना सुनाना चाहते हैं तो लिखकर [email protected] पर भेज दें. अनुरोध करने पर आपका नाम गोपनीय रखा जाएगा.





