: कानाफूसी : कितना महान है न्यूज चैनल 'न्यूज11' का सीएमडी अरूप चटर्जी : रांची : जिन्होंने भी ''हरि नारायण सिंह एवं बैजनाथ मिश्र : बुरे दिनों में अदला- बदली'' शीर्षक से जानकारी खबर भड़ास पर भेजी/छपवाई है, उनकी जानकारी बढाने के लिए और भड़ास के सुधि पाठकों तक मुकम्मल जानकारी पहुंचाने हेतु कुछ अतिरिक्त जानकारी दे रहा हूँ….. श्री हरि नारायण सिंह न्यूज़11 आने से पहले सन्मार्ग में ही सलाहकार सम्पादक थे….. विनोद सिन्हा एवं अरूप चटर्जी के यहाँ आयकर विभाग के छापा मारने के बाद दो नंबर के पैसों की इनकमिंग बंद होने के बाद अरूप चटर्जी को एक दुधारू गाय की जरूरत थी जो उसकी जरूरत को पूरा कर सके…..
अपने अपने कारणों से दोनों (अरूप एवं श्री हरि नारायण सिंह) को एक दूसरे की तात्कालिक जरूरत थी…. इसलिए दोनों ने एक दूसरे का साथ स्वीकार किया…. लेकिन यहाँ श्री हरि नारायण जी को लगातार अरूप के हाथों गाहे-बगाहे, ऑफिस के अन्दर तथा ऑफिस के बाहर शर्मिन्दा होना पड़ता था…. इन्ही घटनाओं से हरि नारायण जी ने कई बार दूसरे मीडिया हाउसों में अपने और अपनी टीम के लिए प्रयास किया लेकिन बात बन नहीं सकी….हरि जी टेलीविजन की दुनिया से दूर प्रिंट की दुनिया में वापस आना चाहते थे… ऐसे में सन्मार्ग को रिलांच करने के लिए प्रेम शंकरण जी को इनसे बढ़िया उम्मीदवार कोई दिखाई नहीं दिया और हरि जी तथा प्रेम जी ने हाथ मिला लिए……
अरूप ने हरि जी को कभी नहीं निकाला लेकिन जाते समय रोका भी नहीं क्योंकि उसे मालूम था हरि जी का जितना इस्तेमाल वह कर सकता था… वह कर चुका था…. हरि जी उसके लिए बेकार हो चुके थे (ऐसा अरूप का मानना है) नहीं तो पिछले कई मौकों पर ऐसी स्थिति आने से वह रात रात भर उनकी खुशामद किया करता था…… आज भी हरि जी का चैंबर खाली पड़ा है….. श्री बैजनाथ मिश्र, श्री गुंजन सिन्हा, श्री दिलीप श्रीवास्तव "नीलू"…. अभी तक किसी को भी वह गद्दी आवंटित नहीं हुई है…….
अरूप को तलाश है एक ऐसे दूसरे हरि नारायण सिंह की जो इसके चैनल के लिए पैसा भी ला सके और राजनीतिक गलियारों में इसकी मार्केटिंग भी कर सके…. उसी शख्स का उस गद्दी पर राज्याभिषेक होगा… नहीं तो तब तक….हरि जी अरूप के टेप को सुनते रहेंगे….. पुराना टेप….. कि… आपके लिए ही खाली है…. आपका ही चैनल है…. आपको ही चलाना है….. जब मन करे तब आकर ज्वाइन कर लीजियेगा….. कितना महान है यह सीएमडी न्यूज़11 का….. वाह रे लीला……….ऐसे डायलोग रोज ना जाने कितने लोग सुनते होंगे…. भगवान् भला करें….सदबुद्धि दें…ऐसे लोगों को….
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





