ह्यूस्टन : सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनी गूगल यूजर्स की निजता के उल्लंघन के मामले में चारों ओर से मुश्किलों में घिर गई है. गूगल पर आरोप है कि उसने एप्पल के वेब ब्राउजर ‘सफारी’ पर यूजर्स की प्राइवेसी को भंग किया है. कंपनी को ऑनलाइन लोगों की निगरानी के लिए उपभोक्ता अधिकार संगठनों से आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही गूगल को इस मामले में कानूनी परेशानियां भी झेलनी पड़ सकती हैं. सफारी के एक यूजर ने गूगल पर मुकदमा भी ठोक दिया है. साथ ही कुछ सांसदों ने संघीय व्यापार आयोग (एफटीसी) से इस मामले की पूरी जानकारी मांगी है.
इस मामले का खुलासा वाल स्ट्रीट जर्नल में छपी स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय की सिक्योरिटी लैब व सेंटर फोर इंटरनेट एंड सोसायटी की रिपोर्ट से हुआ. जोनाथन मेयर की इस शोध रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गूगल अपने डबलक्लिक एड नेटवर्क के लिए सफारी में निजता सेटिंग को धता बता रही है. अध्ययन में गूगल के अलावा वाइब्रेंट मीडिया, मीडिया इनोवेशन ग्रुप व प्वाइंटरोल पर भी उपयोक्ताओं की निजता सेटिंग के उल्लंघन का आरोप लगा है.
इलिनोय के एक सफारी यूजर ने मामले में भूमिका के लिए गूगल पर वायरटैपिंग कानूनों सहित अन्य निजता कानूनों के उल्लंघन का मामला दायर किया है. तीन सांसदों ने अमेरिकी के संघीय व्यापार आयोग पूछा है कि क्या इस मामले में गूगल ने पुराने समझौते का उल्लंघन किया है. 2011 में गूगल ने अपने ‘बज’ फीचर में निजता के उल्लंघन के एक मामले एफटीसी से समझौता किया था. कंज्यूमर वाचडॉग ने भी एफटीसी से गूगल पर कार्रवाई की मांग करते हुए पत्र लिखा.
उल्लेखनीय है कि सफारी के वेब ब्राउजर में डिफाल्ट सेटिंग के तौर पर ही तीसरे-पक्ष की कुकीज को ब्लॉक कर दिया जाता है. लेकिन गूगल और अन्य कंपनियों ने जानबूझकर इस सेटिंग के दायरे से बाहर काम किया. गूगल के डबलक्लिक सॉफ्टवेयर ने ऐसे कुकीज छोड़े जो उपयोक्ताओं की गतिविधियों पर नजर रख सके. इस बात से लाखों यूजर प्रभावित हुए हैं. सफारी दुनिया में मोबाइल पर नेट इस्तेमाल करने वालों के बीच सबसे लोकप्रिय ब्राउजर है. जनवरी के आंकड़ों के अनुसार बाजार में उसका 55 फीसदी हिस्सा है. साथ ही वह आईफोन व आईपैड का मुख्य वेब ब्राउजर है.
इस बीच, गूगल का कहना है कि उसने जानबूझकर किसी यूजर की निजता का उल्लंघन नहीं किया. साथ ही उसने सफारी ब्राउजर से इस तरह की कुकीज हटाने शुरू कर दिए हैं. गूगल की कम्युनिकेशंस एंड पब्लिक पॉलिसी वाइस प्रेजिडेंट रैचल वेटस्टोन का कहना है कि उसने ये कुकीज अपने ‘प्लस वन’ सर्च फीचर के लिए लगाए थे. इससे गूगल सफारी ब्राउजर पर गूगल की ‘प्लस वन’ सुविधा लेने वाले ग्राहकों के बारे में जान सकता था. गूगल का कहना है कि इसके जरिए कोई निजी जानकारी हासिल नहीं की गई. गूगल के मुताबिक, सफारी के ब्राउजर में मौजूद एक फंक्शन की वजह से गूगल के दूसरे कुकीज ब्राउजर पर आ गए. ऐसा जानबूझकर नहीं किया गया.





