: आयोग में अलग से सोशल मीडिया विंग बनाने की तैयारी : नई दिल्ली : चुनाव आयोग में सोशल मीडिया विंग बनाने की तैयारी चल रही है. मतलब, चुनाव आयोग जल्द ही ट्विटर पर भी प्रकट होने वाला है. चुनाव सुधार या दूसरे अहम मसलों पर आम लोगों की राय जानने के लिए आयोग बहुत जल्द ट्विटर पर सक्रिय होगा. यूपी के विधानसभा चुनाव में फेसबुक का फार्मूला हिट होने के बाद चुनाव आयोग उत्साहित है. अब बड़े लेवल पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है.
आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि चुनाव के दौरान सोशल मीडिया के इस्तेमाल के बेहतर नतीजे मिले हैं. पांच राज्यों का चुनाव खत्म होने के बाद वोटर जागरूकता के लिए सोशल मीडिया पर खास मुहिम चलाई जाएगी. इसका टारगेट खास तौर पर शहरी इलाकों का युवा वोटर वर्ग होगा. बीते साल नवंबर महीने में आयोग ने इसके लिए पहल की थी. सोशल मीडिया और चुनाव सुधार के तमाम एक्सपर्ट्स सहित आयोग की पूरी कमिटी ने दो दिन तक लगातार बैठकर राय – मशविरा किया था कि इसका खाका कैसा होगा. इस चर्चा के आधार पर पूरी गाइडलाइंस के साथ एक्शन रिपोर्ट बनाई गई है. प्रॉजेक्ट से जुड़े एक सीनियर अफसर ने बताया कि पांच राज्यों के चुनाव के बाद इस पर तत्काल काम शुरू किया जाएगा.
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने इन चुनावों के दौरान सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया है. फेसबुक पर तमाम जानकारियां दी गईं और वोटरों को जागरूक करने के लिए भी इसका सहारा लिया गया. उमेश सिन्हा के अनुसार, इसका पॉजिटिव असर पड़ा. उनके इस कदम की सराहना चुनाव आयोग ने भी की और दूसरे राज्यों में भी इस लागू करने का संकेत दिया. दिल्ली में भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर वोटर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.
सोशल मीडिया के उपयोग के पीछे एक तर्क यह भी है कि आयोग के पास उसके दिए गए ई-मेल पर कई लेटर आ रहे हैं. मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी को हर दिन औसतन दो सौ से तीन सौ मेल आते हैं जिनमें चुनाव सुधार से संबंधित प्रस्ताव या इससे जुड़े सुझाव होते हैं. आयोग का मानना है कि जब इसके लिए अलग मीडियम तैयार हो जाएगा तो मुमकिन है और काम की बात सामने आएगी और लोगों का जुड़ाव और बढ़ेगा. यूपी में अब तक तीन दौर के चुनाव में शहर के मुकाबले गांवों में ज्यादा वोट पड़े हैं. हालांकि, शहरी वोटरों ने पिछली बार के मुकाबले इस बार 11 फीसदी ज्यादा वोट डाला है. हालांकि गुरुवार को हुए मुंबई बीएमसी चुनाव में पोलिंग पर्सेंटेज बेहद खराब (44 फीसदी) रहा जिससे एक बार फिर यह बात साबित हुई कि शहरों में वोट देने का ट्रेंड कम है.





