: हत्याकांड के विरोध में बंद रहा उमरिया, जांच एसटीएफ के हवाले : भोपाल : प्रदेश के उमरिया जिले में एक पत्रकार और उनके पूरे परिवार की हत्या की जांच स्पेशल टास्क फोर्स करेगी. इस हत्याकांड के विरोध में रविवार को उमरिया बंद रहा. जिले के प्रभारी मंत्री जय सिंह मरावी और पुलिस महानिदेशक एसके राउत ने घटनास्थल का दौरा किया. इस घटना से गुस्साए लोग कलेक्टर-एसपी को हटाने की मांग कर रहे हैं. हत्याकांड में दो दिन पहले एक बच्चे का अपहरण करने वाले गिरोह का हाथ होने की आशंका है.
प्रदेश के आदिवासी बहुल इस जिले में शनिवार शाम एक दैनिक अखबार के जिला प्रमुख चंद्रिका राय की दफ्तर में ही हत्या कर दी गई थी. उनकी लाश दफ्तर से ही बरामद हुई है जबकि घर से उनकी पत्नी दुर्गा राय (38), पुत्र सजल (20) और बेटी निशा (16) के शव शनिवार शाम बरामद हुए. यह हत्याकांड शुक्रवार रात को अंजाम दिया गया. राय के साथी पत्रकार उन्हें लगातार फोन लगा रहे थे और वे कॉल रिसीव नहीं कर रहे थे. जब लोग घर और दफ्तर गए तो चारों के शव पड़े थे.
इस घटना से उमरिया में दहशत है. घटना की जानकारी मिलते ही डीजीपी एसके राउत उमरिया पहुंचे. वे एक दिन पहले जबलपुर में ही थे. राउत ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां पत्रकारों के अलावा अन्य संगठनों से चर्चा की. नागरिकों ने कलेक्टर व एसपी को हटाए जाने की मांग की. सभी की मांग थी की हत्याकांड की जांच सीबीआई को दी जाए. डीजीपी ने कहा कि वे मामले की जांच प्रदेश पुलिस की एसटीएफ से कराएंगे. एसटीएफ संगठित गिरोहों के खिलाफ जांच करता है. राय करकेली ब्लॉक के जनपद सदस्य रहे हैं और वर्तमान में उनकी पत्नी दुर्गा जनपद सदस्य थीं.
पत्रकार और उनके पूरे परिवार की हत्या के पीछे मूल रूप से दो कारण सामने आ रहे हैं. पहला कारण कोयला माफिया को बताया जा रहा है, जबकि पुलिस दो दिन पहले हुए एक अपहरण कांड से इसे जोड़कर देख रही है. लोक निर्माण विभाग के एसडीओ हेमंत झारिया के छह वर्षीय बेटे अनंत का अपहरण हो गया था और उसे अपहरणकर्ताओं ने फिरौती लेकर शहडोल जिले के ब्यौहारी में मुक्त किया था. पुलिस बदनामी से बचने के लिए फिरौती की बात से इंकार कर रही थी. आशंका है कि पत्रकार राय को अपने स्रोत से अपहरणकर्ताओं की जानकारी लग गई थी, इसलिए उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया. एसटीएफ से जांच कराने के पीछे भी यही कारण नजर आ रहा है. डीजीपी राउत ने दावा किया कि एसटीएफ जल्द ही हत्यारों को पकड़ लेगी.
इस सामूहिक हत्या को लेकर पत्रकार जगत और नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है. पत्रकारों ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग रखी. पत्रकारों ने डीजीपी से मांग की है कि हत्यारों को 24 घण्टे के भीतर पकड़ा जाय. पोस्टमार्टम के बाद शवों को तब तक नहीं उठाने दिया गया जब तक डीजीपी नहीं पहुंच गए. उन्होंने भरोसा दिलाया कि उच्चस्तरीय जांच होगी.
स्थानीय पुलिस के खिलाफ व्याप्त आक्रोश को देखते हुए उन्होंने यह भी कहा है कि जिला पुलिस में जल्दी ही फेरबदल होगा. इस बीच पत्रकार चंद्रिका राय, उनकी पत्नी दुर्गा राय, पुत्र जलज तथा पुत्री निशा के शवों का रविवार को उनके गृहग्राम कछरवार में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया. मुखाग्नि चंद्रिका राय के छोटे भाई मिथलेश ने दी.
पत्रकार व उनके पूरे परिवार की जिस निर्मम तरीके से हत्या की गई है वह अभी भी रहस्य बनी हुई है. नगर और जिले भर में आज दिन यही चर्चा रही कि आखिर उनकी किसी से ऐसी क्या दुश्मनी रही कि परिवार का ही सफाया कर दिया. पुलिस को भी समझ में नहीं रहा है कि हत्या की क्या वजह हो सकती है. मिलनसार पत्रकार चंद्रिका की किसी से कोई रंजिश की बात भी सामने नहीं आ रही है. डीजीपी द्वारा मामले की जांच एसटीएफ को सौपने के बाद आशा की जा रही है कि आरोपियों को शीघ्र पकड़ लिया जाएगा.






