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नई दुनिया – दैनिक जागरण डील का क्या हुआ? कई चर्चाएं

दैनिक जागरण वाले नई दुनिया को खरीद रहे हैं या नहीं, इसको लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. कुछ लोगों का कहना है कि डील में पेंच आ गया है और जागरण वाले पीछे हट गए हैं. वहीं कुछ विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि डील पूरी तरह पक्की है.  9 मार्च को आफिसियल एनाउंस किया जाएगा. 9 अंक जागरण वाले अपने लिए बेहद शुभ मानते हैं. इसीलिए वे सारे बड़े काम व फैसले 9 अंक वाली तारीख के दिन ही करते हैं. अतीत में देखा जाए तो 9, 18 और 27 तारीख को ही जागरण वालों ने ज्यादातर बड़ी लांचिंग, एनाउंसमेंट व एग्रीमेंट किए हैं.

दैनिक जागरण वाले नई दुनिया को खरीद रहे हैं या नहीं, इसको लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. कुछ लोगों का कहना है कि डील में पेंच आ गया है और जागरण वाले पीछे हट गए हैं. वहीं कुछ विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि डील पूरी तरह पक्की है.  9 मार्च को आफिसियल एनाउंस किया जाएगा. 9 अंक जागरण वाले अपने लिए बेहद शुभ मानते हैं. इसीलिए वे सारे बड़े काम व फैसले 9 अंक वाली तारीख के दिन ही करते हैं. अतीत में देखा जाए तो 9, 18 और 27 तारीख को ही जागरण वालों ने ज्यादातर बड़ी लांचिंग, एनाउंसमेंट व एग्रीमेंट किए हैं.

नई दुनिया डील प्रकरण में सारा काम हो चुका है. सब पेपर तैयार हो गए हैं. केवल साइन करना बाकी है. और यह काम 9 मार्च को होगा. मीडिया जगत में नई दुनिया – दैनिक जागरण डील को लेकर तरह तरह की चर्चाएं जारी हैं. सब अपने हिसाब व अपनी जानकारी के आधार पर व्याख्याएं व ऐलान करने में जुटे हैं.

इस बीच चर्चा यह भी है कि आलोक मेहता का नवजीवन लांच करने का प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया है. चर्चा है कि आलोक मेहता एंड कंपनी ने मेरठ से प्रकाशित जनवाणी के मालिकों से संपर्क साधा और उनसे जनवाणी का दिल्ली एडिशन लांच करने की बात की है. यह चर्चा कितनी सही या झूठ है, यह तो आलोक मेहता जानें, लेकिन यह सच है कि आलोक मेहता और उनकी टीम के लिए यह वक्त बेहद कठिन है. इनके सामने चुनौती किसी नए अखबार को पकड़ने की है ताकि ढेर सारे लोग सड़क पर आने से बच सकें.

नई दुनिया, आलोक मेहता आदि को लेकर अगर आपके पास भी कोई नई जानकारी हो तो [email protected] पर मेल कर सकते हैं. नीचे एक पत्र प्रकाशित किया जा रहा है जो भड़ास4मीडिया के एक पाठक ने भेजा है, नाम न प्रकाशित करने के अनुरोध के साथ…


माननीय महोदय, आपका आलेख बहुत गजब का है, लेकिन आलेख से एक बात साथ ही सिद्ध हो रही है कि पिछले लंबे समय से अंबानी बंधुओं से धन लेने, पंजाब नेशनल बैंक से लोन लेने, शादी में करोडों रुपए खर्च करने, दिल्ली सहित देश के अन्य शहरों एवं इंदौर में महॅंगे कर्मचारी रखने का निर्णय को कोई गलत कैसे मानेगा। जैसा कि आपने लिखा है जमीनों में अकूत दौलत, ज्वैलर्स की कमाई और केवल नईदुनिया के लिए धन की कमी काफी विरोधाभास है।

यह सही है कि वर्तमान सम्पादक के बारे में जो भी सुना, पढा जा रहा है उससे विश्वास तो नहीं होता है, लेकिन शक होना लाजमी है। नईदुनिया के वर्तमान प्रबंधन की एक और आदत है कि जिले में बैठे ब्यूरो को विज्ञापन का प्रेशर दो और उन्हें कम वेतन दो व उनकी तुलना में इंदौर कार्यालय में महॅंगे कर्मचारी रखो। नईदुनिया का रिकवरी विभाग जितनी तल्लीनता से काम करता है उससे कम तल्लीनता विज्ञापन विभाग की है और वर्तमान में सबसे कम तल्लीन सम्पादकीय विभाग है।

यह तो बात नईदुनिया है, लेकिन अब बात करें प्रदेश के दो प्रमुख अबखारों की जो प्रदेश में कभी शीर्षस्थ थे। एक तो नईदुनिया है और दूसरा नवभारत। नवभारत का एनबी बांड और उसके बाद की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। अखबार की आड में किस प्रकार गरीबों के गले काटे और प्रफुल्ल माहेश्वरी के निकट दिखने की चाह में कई जिलों के ब्यूरों प्रमुख ने समय-समय पर उनका ढेरों मालाओं से सम्मान किया। अब आज नवभारत की स्थिति किसी से छिपी नहीं है।

एक बात और जो दोनों अखबारों के लिए है और वह कि दोनों अखबारों के प्रारंभ में इसे संभालने वाले लोग नैतिक, चारित्रिक और बौद्धिक दृष्टि से समृद्ध रहे हैं। धन की चाह में संस्कारों से समझौता दोनों के मनिषियों ने नहीं किया है। यही कारण रहा कि यह दोनो अखबार कम सीख देने वाले साधन ज्यादा रहे हैं। नईदुनिया के अभय छजलानी और आलोक मेहता को पदमश्री अवार्ड मिला। अब माना जा रहा है कि अभय जी को जो सम्मान मिला वह शिक्षा के क्षेत्र में लिए दिया गया या यूं कहे कि दिलाया गया और मेहता को मिला पत्रकारिता क्षेत्र की उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए। इसकी सच्चाई का भी पता लगाना चाहिए।

यह भी बताना गैरवाजिब होगा कि नईदुनिया प्रबंधन ने आलोक मेहता को दिल्ली की कमान सौंपकर कौन सी रणनीति अपनाई है। कुछ समय पहले अंबानी बंधुओं की लगातार खबर छापने के बाद नईदुनिया ने उस पर एकदम विराम लगा दिया इसे अब पाठक समझने लगे हैं। प्रश्न यह है कि तमाम महॅंगे कर्मचारी, उंचे खर्च के बाद भी नईदुनिया की बिक्री की बात गले नहीं उतरती है। नाम गोपनीय रखें।

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