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टीवी टुडे नेटवर्क के सीईओ जॉय चक्रवर्ती ने स्ट्रिंगरों के पेट पर मारा लात

जिसके पास जितना पैसा है, वह उतना ही ज्यादा बचाने और कमाने के लिए परेशान है. जिनके पास सिर्फ इतने पैसे हैं कि वे दो जून का चूल्हा जला सकें और बच्चों को पढ़ा सकें, सिस्टम उनसे वह पैसा भी छीनने पर आमादा है. कहने को देश का नंबर वन न्यूज चैनल है आजतक. लेकिन इस चैनल से जुड़े स्ट्रिंगरों की हालत बेहद खस्ता है. इस चैनल के नए आए सीईओ जॉय चक्रवर्ती ने अपनी नौकरी पक्की करने के चक्कर में अपने सैकड़ों स्ट्रिंगरों को भुखमरी के कगार पर ला दिया है.

जिसके पास जितना पैसा है, वह उतना ही ज्यादा बचाने और कमाने के लिए परेशान है. जिनके पास सिर्फ इतने पैसे हैं कि वे दो जून का चूल्हा जला सकें और बच्चों को पढ़ा सकें, सिस्टम उनसे वह पैसा भी छीनने पर आमादा है. कहने को देश का नंबर वन न्यूज चैनल है आजतक. लेकिन इस चैनल से जुड़े स्ट्रिंगरों की हालत बेहद खस्ता है. इस चैनल के नए आए सीईओ जॉय चक्रवर्ती ने अपनी नौकरी पक्की करने के चक्कर में अपने सैकड़ों स्ट्रिंगरों को भुखमरी के कगार पर ला दिया है.

आजतक चैनल वाले अब अपने स्ट्रिंगरों से विजुवल नहीं लेते. इसके लिए समाचार एजेंसी एएनआई से करार कर लिया गया है. बताते हैं कि स्ट्रिंगरों से विजुवल मंगाने में हर माह 27 लाख रुपये खर्च होते थे. एएनआई से यही काम तीन लाख रुपये में हो रहा है. देखने में तो यह सौदा फायदे का लग रहा है आजतक के लिए लेकिन 25 लाख रुपये बचाने के चक्कर में आजतक की ब्रांड इमेज और आजतक से जुड़े स्ट्रिंगरों का मनोबल का कितना नुकसान हो रहा है, इसका अंदाजा सीईओ जॉय चक्रवर्ती को बिलकुल नहीं है.

मालिक अरुण पुरी भी चुप हैं क्योंकि किस मालिक को पैसा नहीं भाता. वैसे तो अरुण पुरी को अलग किस्म का मालिक माना जाता है लेकिन इस प्रकरण में उनकी चुप्पी यह बताने के लिए काफी है कि बनिया बनिया ही होता है, चाहे वह जितने भी रंग के खोल ओढ ले. आजतक से जुड़े एक स्ट्रिंगर ने बताया कि आजतक के लोग स्टोरी आइडियाज अपने स्ट्रिंगर से लेते हैं और उस आइडिया पर विजुवल लाने का काम एएनआई को सौंप देते हैं. इस तरह के दर्जनों प्रमाण व उदाहरण स्ट्रिंगरों के पास हैं. इस धोखाधड़ी के जरिए आजतक वाले अपनी हद दर्जे की नीचता प्रदर्शित कर रहे हैं.

नकवी जैसा संपादक आजतक में है. हाल फिलहाल सुप्रिय प्रसाद जैसे युवा पत्रकार ने भी आजतक में वापसी की है. कई अन्य नामचीन लोग हैं. लेकिन सभी चुप्पी साधे हैं. आखिर खुद लाखों रुपये लेकर ये लोग किस तरह स्ट्रिंगरों की हजारों की लड़ाई लड़ सकते हैं. खुद में त्याग की भावना न हो तो दूसरों की लड़ाई लड़ने का माद्दा कभी पैदा नहीं होता. जॉय चक्रवर्ती जैसे सीईओ को क्या कहा जाए. इनकी जिंदगी इसी गुणा गणित और लाभ हानि में बीत जाती है. मालिक को खुश करने के चक्कर में इस शख्स ने आजतक की ब्रांड इमेज को पलीता लगा दिया है. हर जिले में आजतक के संवाददाता की माली हालत फटीचर वाली हो गई है. गिरे मनोबल के साथ आजतक के स्ट्रिंगर अब आजतक प्रबंधन को ही गाली देते घूम रहे हैं.

इसे भी पढ़ सकते हैं– नंबर वन और सबसे तेज चैनल के स्ट्रिंगर सबसे ज्यादा दुखी

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