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अमर उजाला, देहरादून के न्यूज एडिटर रवि पंत का कैंसर से लखनऊ में निधन

युवा पत्रकार रवि पंत को कैंसर ने हमसे छीन लिया. रवि अमर उजाला, देहरादून में न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत थे. उनका इलाज लखनऊ में पीजीआई में चल रहा था. वहां वे कीमियोथिरेपी के लिए गए हुए थे. तीन दिन पहले वे देहरादून के लिए चले तो तबियत बिगड़ गई. उन्हें फिर से लखनऊ में एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया. बताया जाता है कि वहीं आज सुबह उनका देहांत हो गया. रवि पंत को काफी समय से गले का कैंसर था और उसका वे लगातार इलाज करा रहे थे. वे एम्स, दिल्ली से लेकर कई जगहों पर कैंसर की बीमारी का इलाज करा चुके थे.

युवा पत्रकार रवि पंत को कैंसर ने हमसे छीन लिया. रवि अमर उजाला, देहरादून में न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत थे. उनका इलाज लखनऊ में पीजीआई में चल रहा था. वहां वे कीमियोथिरेपी के लिए गए हुए थे. तीन दिन पहले वे देहरादून के लिए चले तो तबियत बिगड़ गई. उन्हें फिर से लखनऊ में एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया. बताया जाता है कि वहीं आज सुबह उनका देहांत हो गया. रवि पंत को काफी समय से गले का कैंसर था और उसका वे लगातार इलाज करा रहे थे. वे एम्स, दिल्ली से लेकर कई जगहों पर कैंसर की बीमारी का इलाज करा चुके थे.

हिंदुस्तान, बनारस में एडिटर रहते हुए भी रवि पंत का इलाज चलता रहा. रवि ठीक होते ही आफिस आ जाते और अपना काम निपटाते. बेहद कम बोलने वाले, विनम्र और धैर्यवान रवि के गुजर जाने से उनके परिवार पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा है. उनके दो छोटे छोटे बच्चे हैं. उनके निधन के बाद देहरादून में रहे रहीं उनकी सास व परिजन लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं. पत्नी पहले से ही लखनऊ में उनके साथ थीं.

रवि पंत अमर उजाला और हिंदुस्तान से पहले दैनिक जागरण, मेरठ में भी कार्यरत रहे. उनकी उम्र चालीस वर्ष के आसपास थी. वे उत्तारखंड के निवासी थे. रवि पंत को गले का कैंसर बताया जाता है. हालांकि रवि ने कभी तंबाकू, सिगरेट या शराब का सेवन नहीं किया, फिर भी उन्हें गले का कैंसर कैसे हो गया, यह एक रहस्य है. हाल के दिनों में तबियत काफी बिगड़ जाने के कारण रवि पंत खाना नहीं खा पा रहे थे. उन्होंने बोलना भी बंद कर दिया था.

कुछ लोगों का कहना है कि रवि पंत के गले में गांठ थी. साथ ही गले की हड्डियों में गैप आ गया था. इसके इलाज के दौरान ही पता चला कि उनके बाडी में कैंसर है. तब डाक्टरों ने पहले कैंसर के इलाज का काम शुरू किया. गले की गांठ के कारण रवि खा पी नहीं पा रहे थे. शरीर काफी कमजोर हो चुका था. कीमियोथिरेपी और हेवी डोज मेडिसीन को उनका शरीर नहीं झेल सका. इसी कारण उनका निधन हो गया.

अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार निशीथ जोशी ने रवि पंत के निधन पर गहरा दुख जताया. उन्होंने रवि को मेहनती, मृदुभाषी और योग्य पत्रकार बताते हुए कहा कि उन्हें तनिक विश्वास नहीं था कि यह शांत पत्रकार अपने अंदर इस किस्म की बीमारी से जंग लड़ रहा है. निशीथ जोशी ने कहा कि वे रवि के अचानक निधन से व्यथित हैं. कुछ समझ में नहीं आ रहा कि क्या कहूं. अमर उजाला, देहरादून के स्थानीय संपादक विजय त्रिपाठी ने भी रवि पंत के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया. रवि पंत के निधन की जानकारी मिलते ही विजय त्रिपाठी भी लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं. रवि का अंतिम संस्कार कल लखनऊ में ही किया जाएगा.

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