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सीएम के जिले में ही बसपा की हालत खस्‍ता है

: तीनों सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला :  चार दौर के मतदान के बाद उत्तर प्रदेश विधान सभा का चुनावी कारवां पश्चिम की तरफ बढ़ रहा है. दिल्ली से लगे यूपी के इलाकों में छठे दौर में वोट डाले जायेंगे. अब चुनाव अभियान जोर पकड़ गया है. शुरू में जो लोग विजेता लगते थे वे अब बहुत पीछे खिसक गए हैं और जिन उम्मीदवारों को कमज़ोर समझा जा रहा था वे मुकाबले में आ गए हैं. मेरठ कमिश्नरी का गौतमबुद्ध नगर जिला वैसे तो उत्तर प्रदेश का हिस्सा है लेकिन अब यह पूरी तरह से दिल्ली का एक उपनगर बन गया है. इसी जिले में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का गाँव बादलपुर भी है. इस हिसाब से इसका राजनीतिक महत्व बहुत ज्यादा है. जिले में तीन सीटें हैं और सभी मुख्य पार्टियों के बीच मज़बूत मुकाबले में हैं. इसी हफ्ते यहाँ उत्तर प्रदेश में काम कर रहे सभी पार्टियों के स्टार प्रचारक यहाँ चुनावी सभा करने वाले हैं. मायवती, राहुल गाँधी, अखिलेश यादव और अजीत सिंह की सभाएं गौतमबुद्ध नगर में इसी हफ्ते होने वाली हैं.

: तीनों सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला :  चार दौर के मतदान के बाद उत्तर प्रदेश विधान सभा का चुनावी कारवां पश्चिम की तरफ बढ़ रहा है. दिल्ली से लगे यूपी के इलाकों में छठे दौर में वोट डाले जायेंगे. अब चुनाव अभियान जोर पकड़ गया है. शुरू में जो लोग विजेता लगते थे वे अब बहुत पीछे खिसक गए हैं और जिन उम्मीदवारों को कमज़ोर समझा जा रहा था वे मुकाबले में आ गए हैं. मेरठ कमिश्नरी का गौतमबुद्ध नगर जिला वैसे तो उत्तर प्रदेश का हिस्सा है लेकिन अब यह पूरी तरह से दिल्ली का एक उपनगर बन गया है. इसी जिले में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का गाँव बादलपुर भी है. इस हिसाब से इसका राजनीतिक महत्व बहुत ज्यादा है. जिले में तीन सीटें हैं और सभी मुख्य पार्टियों के बीच मज़बूत मुकाबले में हैं. इसी हफ्ते यहाँ उत्तर प्रदेश में काम कर रहे सभी पार्टियों के स्टार प्रचारक यहाँ चुनावी सभा करने वाले हैं. मायवती, राहुल गाँधी, अखिलेश यादव और अजीत सिंह की सभाएं गौतमबुद्ध नगर में इसी हफ्ते होने वाली हैं.

गौतमबुद्ध नगर की जेवर विधान सभा सीट में ही भट्टा और पारसौल गाँव पड़ते हैं, जहां यूपी सरकार को चकमा देकर राहुल गांधी मोटर साइकिल पर सवार हो कर आ गए थे और गाँव में हुए पुलिस अत्याचार को राष्ट्रीय ख़बरों की सुर्ख़ियों में ला दिया था. उनकी सभा इसी चुनाव क्षेत्र में होगी. जेवर से कांग्रेस पार्टी ने अपनी प्रतिष्ठा को जोड़ लिया है. और वे इस सीट को हर हाल में जीतने के लिए कोशिश कर रहे हैं. यहाँ का कांग्रेस उम्मीदवार भी जातीय गणित के हिसाब से ठीक ठाक है. कांग्रेस के ठाकुर धीरेन्द्र सिंह इसी जिले के रबू पुरा गाँव के रहने वाले हैं और उनका परिवार इलाके के प्रभाव शाली परिवारों में गिना जाता है. राजनीतिक परिवार भी है. उनके भाई ठाकुर सुनील सिंह बुलंदशहर जिले की स्याना सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. यहाँ ठाकुरों के वोट सबसे ज्यादा हैं. शायद इसीलिये बीजेपी ने भी ठाकुर उम्मीदवार उतारा है लेकिन बीजेपी का अभियान अभी उठ नहीं रहा है. इसका कारण शायद यह है कि इलाके के कई मज़बूत गूजर नेता पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं. रक़म सिंह भाटी बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुके हैं. राजनाथ सिंह ने उन्हें टिकट दिलवाने की कोशिश की लेकिन नितिन गडकरी के दरबार से सुन्दर सिंह राना को टिकट मिल गया. उसके बाद रक़म सिंह ने समाजवादी पार्टी का रास्ता पकड़ लिया. समाजवादी पार्टी में जिले का एक और मज़बूत गूजर नेता शामिल हो गया है. लडपुरा गाँव के रबीन्द्र भाटी और उनकी पत्नी दोनों ही जिला पंचायत के सदस्य हैं. दोनों ही बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार बिजेंद्र भाटी की मदद में लग गए हैं. ज़ाहिर है कि समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार भारी पड़ रहा है. बहुजन समाज पार्टी ने अपने होम गार्ड मंत्री वेद राम भाटी को यहाँ से टिकट दिया है. भाटी बिरादरी यहाँ पर बड़ी संख्या में है. दलित वोटों की संख्या करीब ५० हज़ार बतायी जा रही है. यहाँ मुकाबला त्रिकोणीय होगा क्योंकि कांग्रेस उम्मीदवार भी किसी भी हालत में कमज़ोर नहीं है.

दूसरा क्षेत्र दादरी है. यहाँ चुनाव घोषित होने पर माना जा रहा था कि बसपा के मौजूदा विधायक सतवीर गुर्जर और बीजेपी के नवाब सिंह नगर के बीच मुख्य मुकाबला होगा. सतवीर गुर्जर को नवाब सिंह नागर से ज़बरदस्त चुनौती मिल रही है लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार समीर भाटी के आ जाने के बाद मुकाबले का रंग बिलकुल बदल गया है. समीर खुद भी विधायक रह चुके हैं. उनके पिता महेंद्र सिंह भाटी की भी यहाँ बहुत इज्ज़त थी और वे मंत्री भी रहे थे. दादरी एक दिलचस्प क्षेत्र हैं यहाँ से पिछली बार नवाब सिंह नागर चुनाव हार गए थे और उन्हें ५१ हज़ार वोट मिले थे जबकि उसके पहले के चुनाव में वे ४९ हज़ार वोट लेकर विजयी रहे थे. बसपा के खिलाफ बन रहे माहौल का फ़ायदा उन्हें मिल सकता है लेकिन समीर भाटी के आ जाने के बाद मुसलमानों के वोट कांग्रेस के खाते में जा सकता है, जिसके बाद बसपा का उम्मीद वार पिछड़ सकता है लेकिन मुकाबला त्रिकोण होगा और दिलचस्प होगा. यहाँ से समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार भी है लेकिन इलाके का दौरा करने के बाद समझ में आ जाता है कि उसकी मौजूदगी केवल नाम के लिए है. वह चुनाव में कोई आयाम नहीं जोड़ पा रहा है. भाटी वोट एकमुश्त कांग्रेस के खाते में जाते दिख रहे हैं.

नोएडा क्षेत्र से आम तौर पर माना जा रहा था कि बीजेपी के डॉ. महेश शर्मा चुनाव जीत जायेंगे. उनका कैलाश असपताल जिले की शान है. बहुत लोगों से उनका सम्बन्ध है. लेकिन कांग्रेस के उमीदवार डॉ. वीएस चौहान के मुकाबले में आ जाने के बाद सारा खेल पलटता दिख रहा है. जिले की डाक्टर बिरादरी लगभग पूरी तरह से डॉ. वीएस चौहान के साथ है. यह बहुत बड़ा फैक्टर है. नोएडा में ठाकुरों के भी कई गाँव हैं और वे लगभग पूरी तरह कांग्रेस के डॉ. चौहान के साथ हैं. सुलतानपुर, सद पुर, चौड़ा रघुनाथपुर, रायपुर, छलेरा, मंगरौली, साहापुर, वाजिदपुर और मामूरा के राजपूत कांग्रेस की तरफ नज़र आ रहे हैं. लेकिन अन्ना फैक्टर कांग्रेस के खिलाफ जा रहा है. यहाँ से ही अन्ना हजारे की भीड़ राम लीला मैदान में जाती थी इसलिए लगता है कि शहरी वोटर ज़्यादातर बीजेपी के डॉ. महेश शर्मा की तरफ ही जायेगा. इस क्षेत्र में यादवों के भी कई गांव हैं. सर्फाबाद, सौरखा पर्थला, होशियारपुर, चौखंडी और बहलोलपुर में यादव वोटर बड़ी संख्या में है और वे लगभग पूरी तरह से समाजवादी पार्टी की बात कर रहे हैं. यहाँ मुसलमानों की भी बड़ी संख्या है. सेक्टर आठ की झुग्गियों में मुसलमानों का बहुत वोट है इसके अलावा भी बहुत बड़ी संख्या में मुसलमान हैं. हल्दौनी, ककराल आदि मुसलमानों के गाँव हैं, जो उसी उम्मीद्वार को वोट देंगे जो बीजेपी को हरा रहा होगा. इसलिए अगर अगले तीन चार दिनों में माहौल बदलता है तो मुस्लिम वोट की दिशा भी उसी हिसाब से तय भी होगा, यहाँ मुकाबला हर हाल में तिकोना ही रहेगा. कुल मिलाकर अभी तस्वीर साफ़ नहीं है लेकिन एक बात बहुत भरोसे के साथ कही जा सकती है कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद में उनकी पार्टी की हालत अच्छी नहीं है.

लेखक शेष नारायण सिंह वरिष्‍ठ पत्रकार तथा जनसंदेश टाइम्‍स के रोविंग एडिटर हैं.

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