नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस बेताब हो गयी है. पार्टी की कोशिश है कि मीडिया में ज़्यादा से ज्यादा जगह घेर कर रखा जाए और खिलाफ पार्टियों को मीडिया से दूर रखा जाए. यह एक रणनीति का हिस्सा है. मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस के आला मंत्रियों ने चुनाव आयोग पर वार पर वार करने की योजना पर काम बंद नहीं किया था कि राहुल गांधी ने कानपुर में ऐसा कुछ कर दिया जिस से मीडिया में पिछले 24 घंटों से छाये हुए हैं. मीडिया पर बने रहने के आदी हो चुके बीजेपी वाले कांग्रेस की इस कारस्तानी से बहुत खफा हैं लेकिन सच्चाई यह है कि चुनाव के इस मौके पर वे कुछ कर नहीं पा रहे हैं.
चुनाव आयोग की ताक़त कम करने की कांग्रेसी रणनीति की जानकारी आज एक अखबार में छप जाने के बाद आज का दिन दिल्ली में पूरी तरह से कांग्रेस और चुनाव आयोग के विवाद के हवाले हो गया. नतीज यह हुआ कि बीजेपी ने भी अपने रूटीन वाले प्रवक्ताओं को पीछे धकेल कर अपने सबसे सक्षम प्रवक्ता को मैदान में उतारा. बात को बहुत दमदार बनाने की कोशिश में अरुण जेटली ने कांग्रेस को सीरियल अपराधी बता दिया और बात को गर्माना चाहा लेकिन उनके कुछ प्रिय पत्रकारों के अलावा किसी ने खबर को आगे नहीं बढ़ाया. उधर चुनाव आयोग ने बिलकुल साफ़ कह दिया है कि केंद्र सरकार की उस कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा, जिसके तहत वह चुनाव आयोग और आचार संहिता को बेअसर करने की कोशिश कर रही है. इस बीच प्रणब मुखर्जी का बयान आ गया कि ऐसी कोई चर्चा नहीं है. अखबार की खबर का भरोसा नहीं किया जाना चाहिए.
दिल्ली की राजनीति के एक बहुत पुराने जानकार पत्रकार ने बताया कि कांग्रेस भी चुनाव आयोग को कमज़ोर करने का ख़तरा नहीं लेने वाली है. उसकी तो कोशिश केवल यह है कि रोज़ ही इस तरह के मुद्दे चुनावी मैदान में फेंकती रहे जिससे विपक्ष को मीडिया में कम से कम जगह मिले. इस काम में दक्ष पुराने खिलाड़ी दिग्विजय सिंह तो आजकल गंभीर चुनाव विमर्श में लग गए हैं, जबकि बेनी प्रसाद वर्मा और सलमान खुर्शीद जैसे लोग मीडिया को घेरने के काम में लगे हुए हैं. आज तो मीडिया का सारा ध्यान राहुल गांधी के खिलाफ कानपुर में दर्ज रिपोर्ट पर है. उस पर तरह-तरह के बयान दिया जा रहे हैं और विपक्ष भी कांग्रेस की चाल में लगातार फंसता जा रहा है.
मंगलवार को दिन भर जिस दूसरी बात की चर्चा रही वह है केन्द्रीय कैबिनेट में चुनाव सुधारों के मुद्दे पर चर्चा, जिसमें चुनाव आयोग को कमज़ोर कर दिया जायेगा और आचार संहिता के अपराध अब चुनाव आयोग नहीं, अदालत तय करेगी. सूत्र बताते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है. चुनाव में मुसलमानों को वोट देने के लिए प्रेरित करने के लिए से शुरू की गयी सलमान खुर्शीद और बेनी प्रसाद वर्मा की योजना को भी भुला दिया जाएगा और राहुल गांधी भी एकाध दिन में खेद प्रकट कर देंगे. ज़ाहिर है यह सारा काम मीडिया के प्रबंधन के लिए किया गया है और चुनाव ख़त्म होते सारे विवाद ख़त्म कर दिए जायेंगे अगर कानून के हिसाब से ज़रूरी हुआ तो माफी आदि भी मांग ली जायेगी.
लेखक शेष नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार तथा जनसंदेश टाइम्स के रोविंग एडिटर हैं.






