पालीवाल प्रकाशन के द्वारा निकाली गई सम्पूर्ण स्वास्थ्य पत्रिका का पूरा मैटर विभिन्न पत्रिकाओं और बेवसाइटों से चोरी किया हुआ है। ध्यान रहे कि अभी जनवरी-फरवरी तक दो डमी और आगामी माह मार्च के लिये कुछ पत्रिकायें ही आई हैं। उन्हें मार्केट में ले जाने से सर्कुलेशन हेड महेन्द्र सिंह जस ने पूरी तरह से इनकार कर दिया है। वहीं मुख्य संवाददाता महेश झा ने पूरी तरह पत्रिका से किनारा कर लिया है तथा कोई कानूनी कार्रवाई होने की दशा में कार्यकारी सम्पादक स्वामी शरण को दोषी बताया है। उन्होंने बताया कि स्वामी शरण को मार्केट की परख नही है न ही उन्होंने स्वास्थ्य पत्रिका के नाम पर पाठकों के लिये कुछ खास दिया है। बस शौकिया ही पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है।
पालीवाल प्रकाशन वास्तव में उत्तर प्रदेश की प्रख्यात पैथालॉजी चलाने वाले डॉ. उमेश पालीवाल का संस्थान हैं। डॉ. उमेश ने बीते अगस्त 2011 में सम्पूर्ण स्वास्थ्य पत्रिका के लिये आरएनआई का आवेदन किया था। उक्त पंजीकरण महेश झा, जो डॉ. उमेश के करीबी दोस्त और पत्रिका के मुख्य संवाददाता हैं, के नाम से है। महेश झा ने कड़ी मेहनत कर के कानपुर समेत देश के कई नामीगिरामी डॉक्टरों से सम्पर्क कर आर्टिकल एकत्र किये और आज प्रकाशन के डिजाइनर से पत्रिका का बेहतरीन फ्रन्ट पेज समेत पूरी नवम्बर की पत्रिका तैयार करवायी थी, जिसको कार्यकारी सम्पादक स्वामी शरण श्रीवास्तव ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। जिस कारण महेश और स्वामी शरण की कार्यलय में कहासुनी भी हुई थी, तभी से वे कार्यालय नहीं आये हैं। इसके बाद से कार्यकारी सम्पादक स्वामी शरण श्रीवास्तव ने बेवदुनिया डाट कॉम, बीबीसी डॉट कॉम, अखंड ज्योति मासिक पत्रिका, दैनिक जागरण अखबार से मैटर कापी कर पत्रिका में शामिल कर लिया। स्वामी शरण ने मानसिक विकलांगता के चलते जनवरी, फरवरी और मार्च के संस्करण को एक साथ लांच किया है।

आईएसीएम के जीतेन्द्र अग्निहोत्री जो डा. उमेश पालीवाल के सहयोगी फ्रेन्चाइची कप्यूटर संस्थान के मैनेजर हैं। वे भी स्वामी शरण श्रीवास्तव की गलत व्यवहार से ग्रसित हैं। उन्होंने अपने संस्थान में काम करने वाले सभी फैकेल्टी मेम्बरस को स्वामी शरण से बात न करने व पालीवाल प्रकाशन में न जाने हिदायत दे रखी है। इसी संस्थान के इन्जीनियर सोनू से कार्यकारी सम्पादक की लड़ाई होने से कई दिनों तक संस्थान में अफरा-तफरी का माहौल रहा था। संस्थान में काम करने वाला एक कर्मी मॉ की गाली देते हुये बताता है कि स्वामी को बात करने की भी तमीज नहीं है। पता नहीं किस ने उन्हें यहां बिठा रखा है।
जोसेफ कॉसमस लायल
कानपुर





