: लोकायुक्त ने की सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय से जांच की सिफारिश : लखनऊ। सूबे में सीएम के बाद सबसे ताकतवर मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी की बैंड एक पत्रकार ने बजाई है. लोकायुक्त ने पत्रकार जगदीश नारायण शुक्ल की शिकायत पर ही नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनकी पत्नी हुस्ना सिद्दीकी के पास आय से अधिक सम्पति के मामले का खुलासा हुआ है. लोकायुक्त ने इस मामले में मुख्यमंत्री से इसकी जांच सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय से कराए जाने की सिफारिश की है.
लोकायुक्त नसीमुद्दीन के खिलाफ तीन शिकायतों की जांच कर रहे हैं. करीब ढाई महीने पहले नौ दिसम्बर को लखनऊ से प्रकाशित निष्पक्ष प्रतिदिन के संपादक जगदीश नारायण शुक्ला ने लोकायुक्त से सूबे के ताकतवर मंत्री नसीमुद्दीन और उनकी पत्नी हुस्ना के खिलाफ आय से अधिक संम्पत्ति समेत कई आरोप लगाए थे. लोकायुक्त ने जगदीश नारायण की शिकायतों में कई आरोप सही पाए. इसके बाद लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने अपनी 929 पेज की रिपोर्ट संस्तुतियों के साथ मुख्यमंत्री मायावती के पास भेज दी है. रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि नसीमुद्दीन की पत्नी हुस्ना के नाम बाराबंकी, लखनऊ, बांदा में जो सम्पत्ति है तथा नसीमुद्दीन ने जिन बेनामी सम्पत्तियों में अपना धन लगाया है वह उनकी आय के ज्ञात स्रोत से अधिक लग रही है. मंत्री दम्पति के आयकर रिर्टन के मुताबिक चार साल की आय करीब 1.93 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि लोकायुक्त जाचं में यह पाया गया है कि जिन सम्पत्तियों का मूल्यांकन संबंधित विभागों से कराया गया है वे न्यूनतम पचास करोड़ के आसपास है.
इस बारे में लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा का कहना है कि चूंकि उनके पास इस तरह के मामले की विस्तृत एवं विधिवत जांच करने के लिए कोई जांच एजेंसी नहीं है, इसलिए सम्पत्तियों की खरीदारी में जो तथाकथित काला धन लगाया गया है, उसकी जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जानी चाहिए. जांच में मनी लांड्रिंग का मामला पाए जाने पर सिद्दीकी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा मनी लांड्रिंग के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए. इसी कारण उन्होंने इस मामले की जांच सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की सिफारिश की है. सिफारिश पर कार्रवाई के लिए एक महीने की मोहलत दी गई है. बताया जा रहा है कि नसीमुद्दीन के खिलाफ अन्य शिकायतों में भी कुछ आरोप हैं, उसे दूसरी रिपोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी.
नसीमुद्दीन व हुस्ना सिद्दीकी पर पद का दुरुपयोग, आय से अधिक सम्पत्ति, क्यूएफ एजुकेशनल ट्रस्ट के नाम पर बाराबंकी में कृषि भूमि दिखाते हुए अकूत सम्पत्ति खरीदने, ट्रस्ट के नाम से करोड़ों का दान लेने, सम्पत्ति के बारे में गलत शपथपत्र देने, परिजनों के नाम पहाड़ व बालू के पट्टे करवाने, नजूल भूमि का अनियमित तरीके से फ्री होल्ड कराने, बुंदेलखंड पैकेज से रिश्तेदारों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने, कृषि मंत्री होने के नाते दायित्व का निर्वाह न करने समेत कई आरोप लगाए गए है.






