रांची : झारखंड को यहां के तथाकथित नेताओं और मीडिया प्रभुओं ने कई बार लहूलुहान और लांक्षित किया है। संबंधों का लाभ और जात-पात ने भी इस राज्य के सीने में खंजर भोंके हैं। इन दोनों वर्गो के तथाकथित कुछ लोगों की वजह से राज्य का अहित और अपमान हुआ है। ईश्वर की असीम कृपा है कि कुछ बड़े मामले खुद-ब-खुद उजागर होते गये हैं और नकाबपोशों के चेहरे नंगे भी। दुर्भाग्य है कि समय के साथ कुछ लोग जगह भी धर लेते हैं। मानों कुछ हुआ ही नहीं।
हम यहां जिक्र मीडिया में करियर प्रारम्भ करने वाले एक ऐसे व्यक्ति का कर रहे हैं जिसका नाम संदीप वर्मा है। वर्तमान में यह शख्स देश के प्रमुख औद्योगिक घराने रिलायंस के बड़े ओहदेदार और झारखंड से राज्यसभा सदस्य परिमल नथवाणी का सलाहकार है। संदीप वर्मा वह व्यक्ति है जो यहां के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा (जेल में दो वर्षों से बंद/4000 करोड़ के हेराफेरी का आरोपी) का दो वर्षों से अधिक तक प्रेस सलाहकार रहा। संदीप वर्मा भारतीय जनता पार्टी झारखंड के एक बड़े नेता दीपक प्रकाश का रिश्तेदार है। नेता दीपक प्रकाश चारा घोटाले के एक बड़े आरोपी केएम प्रसाद के निकट के रिलेशन में हैं। चारा घोटाले के कई मामले में सजा भुगत रहे हैं। खैर संदीप वर्मा पर बात यहीं नहीं खत्म होती है। झारखंड की सत्ता को अपदस्थ करने के मामले में भी संदीप की संलिप्तता उस वक्त उजागर हुई थी, जब वह उस समय के एक विधायक कमलेश सिंह के साथ (सरकार बनाने की कवायद) पलायन कर रहा था।
उस वक्त झारखंड मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा थे। संदीप और कमलेश पकड़ में भी आ गये थे। इस कारस्तानी के कुछ अरसे बाद अर्जुन मुंडा को कुर्सी गंवानी पड़ गयी और निर्दलीय मधु कोड़ा मुख्यमंत्री बन गये। कमलेश सिंह मंत्री। संदीप वर्मा मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार। संदीप वर्मा सहारा चैनल में कुछ दिनों तक काम चुका है। पूर्व मंत्री कमलेश सिंह अभी आय से अधिक मामले में जेल में बंद हैं। संदीप वर्मा कितना तेज है इसका अंदाजा इस बात से भी लगया जा सकता है कि मधु कोड़ा के मुख्यमंत्री पद गंवाने के बाद वह झारखंड में सूचना आयुक्त के पद के अत्यन्त करीब पहुंच चुका था। परन्तु प्रभात खबर में संदीप वर्मा की इस पद के लिए अयोग्यता उजागर होने पर सरकार ने अपने हाथ खींच लिये। संदीप वर्मा ने बहुत कम समय में झारखंड के नेताओं और नौकरशाहों से अच्छे संबंध बना लिये हैं। वह अकूत संपत्ति का मालिक बन बैठा है। वह कितना शातिर है इसका अंदाजा इसी बात से लगायें कि मधु कोड़ा की कुर्सी जाते-जाते वह सार्वजनिक वितरण प्रणाली निगरानी आयोग के सदस्य के रूप में नामित हो गया और अब सांसद और उद्योगपति परिमल नथवाणी के सबसे करीब पहुंच गया।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






