यदि आप एक पूर्व अपराधी या फिर कोई सफेदपोश हैं, तो एक माननीय का ठप्पा लगाने के लिए आपको बनारस क्लब की सदस्यता अति शीघ्र ले लेनी चाहिए. यदि सुबह के समय आप बनारस क्लब के परिसर में एक चक्कर लगाये तो वहा का नज़ारा देख कर आकी आँखे फटी की फटी रह जाएँगी. आपको पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियो और अपराधियों का अद्भुत संगम देखने को मिल जायेगा. अंदर के मैदान में कई प्रसासनिक अधिकारी ऐसे लोगो के साथ टहलते नज़र आयेंगे जिन पर घोटालो के गंभीर आरोप है. उनमे से प्रमुख हैं डॉक्टर एस पी यादव, डॉक्टर अश्वनी टंडन जिन पर पिछले वर्ष ही 'बी प एल' कार्ड धारको के नाम पर धोखाधडी के आरोप लगे थे.
आप बैडमिंटन कोर्ट में बनारस शहर के आला पुलिस अधिकारियो को अपराधियों के साथ खेलते देख पायेंगे. ये पुलिस अधिकारी कोई छोटे मोटे नहीं बल्कि आई. जी., डी. आई. जी., एस. पी. तथा कमांडेंट, स्तर के हैं. ये अपराधी इतने दबंग है की अपने साथ अपने चमचो को भी ले कर आते हैं जो की संस्था के सदस्य नही हैं और इस संस्था के नियमो के खिलाफ है. इन अपराधियों के नाम सुन कर आप दातों तले ऊँगली दबा लेंगे, उदहारण के तौर पर मुख्य रूप से इन नामों की चर्चा की जा सकती है, गुड्डू तिवारी (गोदोलिया छेत्र का बाहुबली) , बिज्जू पंडित (लहुराबीर छेत्र), लबेदी (मैदागिन छेत्र, गोलू (भदोही ), अतुल (जौनपुर), संजय (शराब माफिया) इत्यादि इत्यादि… इनमें से सभी पर हत्या जैसे गंभीर मुक़दमे चल चुके हैं या फिर चल रहे हैं.
मजे की बात ये है के इन सारे माननीयो की सदस्यता इनकी पत्नियों के नाम से है. ये अलग बात है की इनकी पत्नियों को इस स्थान पर किसी ने नहीं देखा. शाम को ये सारे माननीय इस क्लब के 'बार' में विभिन्न अधिकारियो के साथ शराब एवं सिगरेट का मज़ा लेते मिलेंगे. भारत सरकार के नियमों के अनुसार किसी भी सार्वजनिक स्थान पर सिगरेट पीना प्रतिबंधित है, पर यहाँ के 'बार' में आप सभी नियमों का उल्लंघन प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ही कर सकते हैं. क्लब में मीडिया का आना प्रतिबंधित है (सिर्फ कुछ विश्वसनीय पत्रकार बंधुओ को छोड़कर), इसी कारण ये जगह अधिकारियों के साथ 'सेटिंग' करने के लिए अति सुरक्षित है.
यहाँ के सेक्रेटरी डॉक्टर एनपी सिंह एक सरकारी डॉक्टर हैं पर उनका अधिकतर समय यही व्यतीत होता है, अपने अस्पताल कब जाते है किसी को समझ नहीं आता. इनकी पत्नी डॉक्टर मनीषा सिंह भी एक सरकारी डॉक्टर हैं और गाजीपुर में तैनात हैं, रहती बनारस में ही है मगर उनके हस्ताक्षर बराबर गाजीपुर में होते रहते हैं. पति पत्नी दोनों मिलकर एक 'नर्सिंग होम' चलाते हैं 'रमा मेडिकल' और उसी में रहते हैं और वेतन सरकार से लेते हैं. डॉक्टर एन पी सिंह को ये हाल है की इनको विवादों में रहने की आदत है. अपने पिछले कार्य काल में सदस्यता शुल्क के ऊपर अतिरिक्त धन लेकर करीब ३०० लोगों को क्लब की सदस्यता बिना उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि जांचे दे देने के कारण काफी विवाद में थे. उसी कार्य काल में इन के ऊपर एक करोड़ से ऊपर क्लब के धन का गबन का आरोप भी लगा था. लोगों का पैसा हड़पने के आरोप में इनके घर पर पुलिसे की एक आध दबिश भी पड़ चुकी है.
तीन चार वर्ष पहले क्लब के परिसर में हो रही नए साल के उत्सव के दौरान नशे में इन्होंने पत्रकारों के साथ हाथापाई की, जिस के बाद 'सहारा' टी. वी. के बनारस के तत्काकिक ब्यूरो चीफ ने सरेआम इनकी पिटाई की थी. अपने ही पिछले कार्यकाल के दौरान ये महाशय, पुलिस के रेड में 'पद्मिनी होटल' में जुआ खेलते पकड़े गए थे , और फिर इनको पुलिस के 'डंडा परेड' का सामना करना पड़ा था . तात्कालिक कमिश्नर वाराणसी 'उपाध्याय' जी के सीधे हस्तक्षेप से किसी तरह इनकी जान छूटी, पर इनके एक साथी 'राजू भैया' (राजीव सेंगर) को रात हवालात में गुजारनी पड़ी थी. अभी हाल में ही क्लब के एक आयोजन के दौरान नशे में, एक महिला के साथ ये काफी आत्मीयता दिखा रहे थे. इस पर एक नौसेना के अधिकारी के हाथों की गयी इनकी पिटाई के कारण ये फिर काफी चर्चा में थे. हर छह महीने पर ये अपनी गाड़ी और हर महीने अपना मोबाइल फ़ोन बदलते हैं. इतना पैसा इनके पास कहाँ से आता है ये तो शायद बनारस क्लब में रुकी सी. बी. आई. टीम भी पता नहीं लगा पायेगी. उपरोक्त नामित आपराधिक पृष्ठभूमि वाले माननीय भी इस क्लब में इन्ही के कार्यकाल में, बिना किसी कि पृष्ठभूमि कि जाँच किये ही शामिल हुए थे और आज कल इनके आगे पीछे चलते अंगरक्षक का काम करते हैं.
अपने इस कार्यकाल में उन्होंने पुलिसे से अपने सम्बन्ध बेहतर बनाने हेतु सभी छोटे बड़े अधिकारिओं को 'मानद सदस्यता' की रेवड़ी बांटी है. अब ये पुलिस अधिकारी अपने परिवार के साथ क्लब के सभी सुविधाओं का उपभोग मुफ्त में करते हैं. यानि कि उन सबकी मुफ्तखोरी का खर्च उन सदस्यों पर पड़ता है जो हर महीने नियम से शुल्क जमा करते हैं. सुबह सुबह तो क्लब कर परिसर इन अधिकारीयों के 'गनर' लोगों से भरा मिलता है, इन सभी गनर लोगों कि मुफ्त चाय का बंदोबस्त भी क्लब के पैसे से ही होता है.
क्लब के गिरते स्तर के कारण यहाँ के पुराने सदस्यों में से अधिकतर ने यहाँ आना या तो बहुत कम कर दिया या फिर बंद ही कर दिया है. क्लब के पुराने पदाधिकारियों से बदसलूकी एक आम बात हो चली है, उनमे से भी अधिकतर ने वहा जाना बंद कर दिया है. अभी हाल में ही एक दोस्ताना क्रिकेट मैच खेला गया 'बनारस क्लब' और 'इन्कम टैक्स बार असोसीएशन' के बीच. इस मैच में 'इन्कम टैक्स' विभाग के 'आयुक्त ' एवं 'सहायक आयुक्त' भी पुरे समय मैच का मज़ा ले रहे थे. इस मैच के दौरान सेक्रेटरी साहब ने माइक में बाकायदा बार बार घोषणा कर के सभी खिलाडियों और दर्शको को क्लब के ओर से मुफ्त 'वोदका' पीने का निमंत्रण दिया था जिसका खुलेआम सभी से लाभ उठाया. ये भी नहीं के ये शाम या रात का किस्सा है, ऐसा यहाँ दिन दहाड़े हुआ. मैच के दौरान बीच बीच में ही अच्छे खिलाडियों को 'बैंकाक' 'अकेले' जाने का टिकट देने और 'कहाँ कहाँ जाना है', उसकी जानकारी देने की भी माइक पर पेशकश हो रही थी.
चुनाव आयोग के सख्त नियमो में ये भी है कि कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी चुनाव प्रचार या फिर प्रचार करने वाले से मिल नहीं सकता. परन्तु बनारस चुनाव प्रचार को आई 'महिमा चौधरी' को डॉक्टर एन पी सिंह और डॉक्टर मनीषा सिंह ने बाकायदा क्लब में निमंत्रित किया, और पूरे समय उनके साथ साथ रहे. महिमा चौधरी ने खुल कर वहां भाषण दिया और कांग्रेस का समर्थन माँगा. यहाँ तक की एक समाचार पत्र में ये भी लिखा था की उन लोगो ने राजनीती के बारे में चर्चा भी की. चुनाव आचार संहिता का खुला उलंघन वह उपस्थित कई सम्मानित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारिओं के सामने हुआ पर कही से कुछ शिकायत नहीं हुई.
१४ जनवरी को 'लोढ़ी' के अवसर पर एक उत्सव का आयोजन क्लब में हुआ. उसमे सरकारी प्रतिबन्ध के बावजूद प्रतिबंधित जानवरों के करतब का तमाशा खुले आम हुआ. साँप जो कि ठन्डे खून (cold blooded animal ) वाले सरीसृप होते हैं, उनका प्रदर्शन जनवरी कि कड़ाके कि ठण्ड में खुले आम हुआ. बन्दर का नृत्य का आयोजन हुआ. कुछ बहादुर सम्मानित सदस्यों ने इन सापों को अपने गले में लिपटा कर बहादुरी दिखाते हुए फोटो खिचवाई. ८ – १० साल की नाबालिग छोटी लड़की को रस्सी पर संतुलन बनाकर चलाया गया और खूब तालियाँ बजवाई गयी. कहने की आवश्यकता नहीं की ये सब वहा उपस्थित कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारिओं एवं उनके परिवार के सामने हो रहा था.
यदि पूरे शहर में 'मद्य निषेध' घोषित हो (dry day ) तो आप बनारस क्लब आइये, आपको यहाँ का 'बार' सामने से तो बंद मिलेगा पर पीछे का दरवाज़ा खुला मिलेगा और सारी 'व्यवस्था' हो जाएगी. अगर आप सेक्रेटरी साब के 'खास' हैं तो उस खास दिन आपको क्लब के बार से सस्ते में पूरी 'बोतल' का इंतजाम हो जायेगा, उसे लेकर आप कही भी जाइये. उत्तर प्रदेश में एन. आर. एच. एम. घोटाले के जांच करने सी. बी. आई. की टीम जब वाराणसी आई तो उसके ठहरने का इंतजाम बनारस क्लब में ही किया गया. उनका ये इंतजाम डॉक्टर अनिल ओहरी (ये 'पंडित दीन दयाल उपाध्याय सरकारी अस्पताल' में सी.एम. ओ. के पद पर तैनात हैं) ने किया जो की सेक्रेटरी साहब के खास हैं तथा क्लब प्रबंध समिति के सक्रिय सदस्य भी हैं. मुद्दे की बात ये है कि एन. आर. एच. एम. के सारे वाराणसी के घोटाले डॉक्टर ओहरी के ही कार्यकाल में ही हुए थे. हालाँकि ये एक सोचने वाली बात है कि क्लब के अंदर ये लोग सी.बी.आई. की टीम के साथ भी कुछ 'सेटिंग' कर पाए या नहीं.
बनारस से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. कानाफूसी कैटगरी के राइटअप सुनी-सुनाई बातों पर आधारित होती हैं जिसमें सच्चाई संभव भी है और नहीं भी. इसलिए तथ्यों पर भरोसा करने से पहले एक बार अपने स्तर से भी जांच पड़ताल कर लें. अगर उपरोक्त उल्लखित तथ्यों में कोई कमी बेसी नजर आए तो नीचे दिए गए कमेंट बाक्स का सहारा ले सकते हैं या फिर [email protected] पर मेल कर सकते हैं.
अपडेट….
इस रिपोर्ट पर बनारस क्लब के पूर्व पदाधिकारी डा. अश्वनी टंडन का का कहना है कि…. बनारस क्लब को लेकर जो खबर भड़ास पर प्रकाशित हुई है उसमें तथ्यों की जांच नहीं की गई है. भड़ास ने किसी द्वारा भेजे गए आरोपों को हूबहू लिख दिया है. खबर की सच्चाई तक पता करने की कोशिश नहीं की गई. इस खबर से मैं बहुत आहत हुआ हूं. हमारे रेपुटेशन को भी काफी धक्का लगा है. उनका परिवार बनारस का एक प्रतिष्ठित परिवार है. कम से कम भड़ास को यह खबर छापने से पहले तथ्यों के बारे में तो पता करना चाहिए था. मुझसे बात करनी चाहिए थी. मेरे पर जिस बीपीएल की गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है, उससे मेरा कोई लेना देना नहीं है. यह बिल्कुल ही भ्रामक तथा मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाली खबर है.





