जिस तरह से हर रोज नए चैनल और अखबार जगह-जगह लांच हो रहे हैं, ठीक वैसे ही मीडिया के विभिन्न कोर्सों के लिए कुकुरमुत्तों की तरह संस्थान भी खुल रहे हैं. ऐसे ही एक संस्थान केडीएम इंस्टीट्यूट ने पांच छात्रों को ठगी का शिकार बनाया. ठगी करने वाले तो जीवन का आनंद ले रहे हैं, पर ठगे गए युवक बेचारे परेशान हैं. कहानी शुरू होती है साधना इंस्टीट्यूट से. झंडेवालान स्थित साधना के मीडिया संस्थान में नरेंद्र, पुनीत, विकास, मोहित एवं छात्रा मीडिया के कोर्स कर रहे थे.
साधना में इन लोगों को श्रीकांत पाण्डेय, संजय कुमार एवं सोनल त्रिपाठी फैकल्टी के रूप में पढ़ाते थे. इसी दौरान साधना में आतंरिक बदलाव हुआ. अलंकिता मानवी की जगह वरिष्ठ पत्रकार राजीव पंक्षी हेड बनकर आए. किसी बात को लेकर उन्होंने श्रीकांत पाण्डेय को संस्थान से कार्यमुक्त कर दिया. कार्यमुक्त किए जाने से नाराज श्रीकांत पाण्डेय ने अपना जाल बुनना शुरू किया. वे पहले संजय कुमार और सोनल त्रिपाठी को साधना से ले गए. इसके बाद ये लोग पीरागढ़ी में केडीएम इंस्टीट्यूट जुड़ गए. इस इंस्टीट्यूट के सीईओ आशीष मिश्रा थे. इसके बाद तीनों लोग इन पांच छात्रों को केडीएम ले जाने के लिए माइंडवास करना शुरू किया.
इन लोगों ने पांचों छात्रों से कहना शुरू किया कि साधना में कोई सुविधा और बढि़या फैकल्टी नहीं है. तुम सब लोग मेरे साथ केडीएम चलों वहां सारी सुविधाएं हैं तथा जॉब की भी पूरी गारंटी है. इन छात्रों ने इस आधार पर जाने से इनकार किया कि आधा सेमेस्टर तथा आधा फीस वो जमा कर चुके हैं इसलिए वो कैसे जा सकते हैं. फिर से नए सिरे से सब कुछ शुरू करना पड़ेगा, फीस देनी पड़ेगी, समय भी ज्यादा लगेगा. इस पर श्रीकांत पाण्डेय, सोनल त्रिपाठी एवं संजय कुमार ने इन लोगों को भरोसा दिलाया कि तुमलोगों को आधा फीस ही देना पड़ेगा. और समय का भी नुकसान नहीं होगा, जितना हमने पढ़ाया है उसके आगे का पढ़ाएंगे.
इन छात्रों का कहना है कि इन लोगों ने तथा सीईओ आशीष मिश्रा ने जॉब दिलाने की गारंटी दी थी. इन लोगों के दबाव तथा बहकावे में आकर पांचों लोग साधना छोड़कर केडीएम चले गए. यहां पर इन लोगों से औसतन पचास हजार रुपये फीस के नाम पर वसूले गए. किसी तरह कोर्स पूरा हुआ. जब जॉब दिलाने की बारी आई तो ये लोग टाल-मटोल करने लगे. नरेंद्र बताते हैं कि सीईओ आशीष मिश्रा हम चार लोगों को प्रोडक्शन हाउस में जॉब दिलाने के नाम पर मुंबई ले गए. उन्होंने कहा कि अभी चैनल वालों से उतना जान पहचान नहीं है इसलिए प्रोडक्शन हाउस में आप लोग काम करो.
नरेंद्र आगे बताते हैं कि हमलोगों को खुद के खर्चे पर बीस दिन तक मुंबई में रखा गया. आशीष मिश्रा आज-कल करते रहे लेकिन कहीं जॉब नहीं दिला पाए. पैसा खतम होने पर मजबूरन हम लोग वापस दिल्ली चले आए. जब भी श्रीकांत पाण्डेय और उनके सहयोगियों से जाब दिलाने की बात करते वे टाल जाते. जब हमने इस मामले की शिकायत करने की बात कही तो श्रीकांत पाण्डेय टाल गए और कहा कि हम कुछ जुगाड़ करवाते हैं. पर अब तक कोई जुगाड़ नहीं हो पाया. मैं लाखों रुपये खर्च करने के बाद शादी की वीडियोग्राफी कर रहा हूं. अन्य साथी भी मुश्किल से सर्वाइव कर रहे हैं और ये लोग मजे ले रहे हैं.
इस संदर्भ में जब श्रीकांत पाण्डेय से बात की गई तो उन्होंने माना कि इन लोगों के साथ गलत हुआ है, पर वे भी कल्प्रिट नहीं विक्टिम हैं. आशीष मिश्रा ने उनलोगों को भी धोखा दिया है. बच्चों के साथ भी धोखाधड़ी उसी ने की है. हमलोगों को भी अपनी बातों में बहकाया, फाल्स कमिटमेंट किया. मैंने विश्वास किया और धोखा खा गया. श्रीकांत ने बताया कि वो आशीष खुद मेरे संपर्क में नहीं है, मेरा भी उस पर बकाया है. इस संदर्भ में जब सोनल त्रिपाठी के नम्बर पर फोन किया गया तो उधर से कॉल उठाने वाली लड़की ने कहा कि इस तरह की कोई बात नहीं है, हमने किसी के साथ धोखेबाजी नहीं की है. हालांकि बाद में उस लड़की ने कहा कि मैं सोनल की कजिन बोल रही हूं, सोनल अभी नहीं हैं.





