Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

जनसंदेश टाइम्‍स, गोरखपुर में तबादले के जरिए छंटनी की तैयारी

जनसंदेश टाइम्‍स, गोरखपुर में हंगामा ही हंगामा है. अभी चौथाई सेलरी रोके जाने का मामला ठण्‍डा नहीं पड़ा है कि पत्रकारों को निकाले जाने और तबादला किए जाने की योजनाएं तैयार की जाने लगी हैं. मामला यहां भी काम का कम इगो का ज्‍यादा है. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और एमडी अनुज पोद्दार के बीच इगो का मामला फंस गया है. जिस हनक के साथ शैलेंद्र मणि जागरण छोड़कर आए थे, उतनी ही मुश्किल अब उनके सामने आने लगी है. पर इस लड़ाई के बीच फंस गए हैं बेचारे छोटे-मोटे कर्मचारी.

जनसंदेश टाइम्‍स, गोरखपुर में हंगामा ही हंगामा है. अभी चौथाई सेलरी रोके जाने का मामला ठण्‍डा नहीं पड़ा है कि पत्रकारों को निकाले जाने और तबादला किए जाने की योजनाएं तैयार की जाने लगी हैं. मामला यहां भी काम का कम इगो का ज्‍यादा है. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और एमडी अनुज पोद्दार के बीच इगो का मामला फंस गया है. जिस हनक के साथ शैलेंद्र मणि जागरण छोड़कर आए थे, उतनी ही मुश्किल अब उनके सामने आने लगी है. पर इस लड़ाई के बीच फंस गए हैं बेचारे छोटे-मोटे कर्मचारी.

सूत्रों का कहना है कि जनसंदेश टाइम्‍स गोरखपुर में लगभग 170 लोग शामिल हैं. इनमें ब्‍यूरो के लोगों की भी संख्‍या जुड़ी बताई जा रही है. सूत्र बताते हैं कि सीजीएम अनिल पाण्‍डेय एवं अनुज पोद्दार ने शैलेंद्र मणि को काट छांट कर इस लिस्‍ट को 110 से 120 तक लाने का फरमान सुना दिया है. यानी इतने लोगों से कंपनी को मुक्ति दिलाई जाए. पर अब बताया जा रहा है कि इन लोगों को सीधे न निकालकर तबादला योजना के तहत निकाले जाने की रणनीति तैयार की जा रही है. खबर है कि अनुज पोद्दार के निर्देशन में कारपोरेट एडिटर संजय तिवारी तबादले की लिस्‍ट तैयार कर रहे हैं.

बताया जा रहा है कि इन लोगों का तबादला अख्‍ाबार के दूसरे यूनिटों में किए जाने की रणनीति तैयार की गई है ताकि जिनको ज्‍वाइन करना हो करें और जिनको छोड़ना है, खुद ही छोड़ जाए. इस स्थिति में सबसे परेशानी उन लोगों के साथ है, जो जागरण या अन्‍य दूसरे अखबारों को छोड़कर जनसंदेश टाइम्‍स से जुड़े थे. उनके लिए स्थिति न तो घर की रह गई है और ना ही घाट की. एक तो बड़े ब्रांड को छोड़कर आए दूसरे यहां भी पेट पर लात पड़ने वाली स्थिति दिखने लगी है. इसमें सबसे ज्‍यादा निशाने पर शैलेंद्र मणि के चहेते कहे जाने वाले लोग हैं. बताया जा रहा है कि इन खास लोगों को ही तितर-बितर करने की योजना है ताकि शैलेंद्र मणि को कमजोर किया जा सके.

पर प्रबंधन के लोग इस शह-मात के खेल में भूल गए हैं कि कुछ हजार पाने वाले रिपोर्टरों या सब एडिटरों का क्‍या होगा. अगर प्रबंधन को यही करना था तो पहले ही एक संख्‍या निर्धारित कर दिया जाना चाहिए था, पर तब तो प्रबंधन ने जागरण को धूल-धूसरित करने की योजना तैयार की, अब जो इन लोगों पर विश्‍वास करके आ गए उनके साथ छल किए जाने की योजना बनाई जा रही है. इसमें सबसे ज्‍यादा परेशान छोटी सेलरी वाले स्ट्रिंगर और रिपोर्टर हैं कि अगर यहां पेट पर लात पड़ी तो वो आगे कहां जाएंगे. जागरण तो उन्‍हें वापस लेने से रहा अन्‍य अखबारों में भी इतनी जगह नहीं होगी कि सबको तत्‍काल नौकरी मिल जाए.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...