उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव के एक वर्ष पहले से लेकर अब तक पूरे प्रदेश में दर्जनों की संख्या में समाचार पत्र व खबरिया चैनलों की शुरुआत हुई है। इनमें क्या लिखा जा रहा है या क्या दिखाया जा रहा है, इससे न तो रिर्पोटिंग टीम से मतलब है न ही संपादकीय टीम से मतलब है। मतलब सिर्फ चुनाव के समय नेताजी के या फिर पार्टी के विज्ञापनों से है। यदि हम प्रदेश की राजधानी लखनऊ की बात करें तो इस चुनावी माहौल में लगभग आधा दर्जन समाचार पत्र या तो नये शुरू हुये या साप्ताहिक से दैनिक हुये हैं।
इसी प्रकार एक-दो खबरिया चैनलों की शुरुआत भी हुई है। लेकिन इन सब में जो कन्टेंट आ रहा है यदि हम उसकी बात करें तो हेडलाइन कुछ, इन्ट्रो कुछ, फोटो किसी की, कैप्शन में किसी का नाम। इसके अलावा जब खबरें न मिलें तो गूगल बाबा का सहारा तो है ही, यह तो हाल है समाचार पत्रों का। समाचार चैनलों की बात की जाये तो उनके एंकर तो मासा अल्ला ही हैं। विजुअल कहीं का खबर कहीं की, नेता कोई उसका नाम व पद कुछ और। ऐसे ही तमाम गलतियां इस चुनावी समर में मीडिया में समर के दौरान देखने को मिल रही हैं।

अब यदि दिनांक 23 फरवरी की बात की जाये तो लखनऊ से पिछले माह शुरू हुये अखबार श्रीटाइम्स हिन्दी दैनिक में पढ़ने का और देखने को क्या मिला इसके बारे में मैं आपको बताता हूं। इस समाचार पत्र के पेज संख्या 13 में ''यूपी की मुख्यमंत्री की चाहत है पत्थर और पार्क : सुषमा'' शीर्षक से लगे समाचार में बात सुषमा स्वराज व मायावती की है, पर उसमें फोटो उमा भारती की है, समाचार पढ़ने के बाद मुझे तो यह नहीं समझ आ रहा कि खबर में उमा भारती जी का कहीं नामों निशान नहीं है, लेकिन फोटो लगी है। यह गलती किसकी है मुझ इससे नहीं मतलब है, लेकिन समाचार संपादक जी का ध्यान किस न्यूज पर था यह तो वही बता सकते हैं.
कानपुर से लकी श्रीवास्तव की रिपोर्ट.





