पत्रिका प्रबंधन की तानाशाही का एक अनोखा मामला सामने आया है. अखबार ने अपने दिल्ली ब्यूरो में कार्य कर रहे पत्रकार अजयभान, राकेश शुक्ला और मनोज कुमार को आनन-फानन में बर्खास्त कर दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दिनों पत्रिका के युवा मालिक निहार कोठारी ने एक मीटिंग कर इन रिपोर्टरों से दो टूक यह कहा कि वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार को ‘अस्थिर’ करें. उससे संबंधित ऐसे-ऐसे मुद्दे खोज कर लायें जिससे वह दोनों सरकार हिल जाये.
बताया जाता है उन सभी संवाददाताओं ने इस तरह सुपारी ले कर कम करने में असमर्थता जताई और कहा कि ऐसा करना न ही संभव है और न ही पेशेवर दृष्टिकोण से उचित. सभी रिपोर्टरों ने एक सुर से ये कहा कि जैसी परिस्थिति पत्रिका प्रबंधन द्वारा उत्पन्न की गयी है उसमें अब तो उन सबके लिए सामान्य खबर जुटाना भी मुश्किल हो रहा है. हर नेता उन्हें संदेह की दृष्टि से देखता है. कोई उन लोगों से बात तक करना गंवारा नहीं करता. ऐसे में आखिर खबर कहाँ से खोज कर लाएं वे? इस बात पर निहार कोठारी ने उन सभी से इस्तीफा मांग लिया और कहा कि अब वे ऐसे रिपोर्टरों को रखेंगे जो ऐसा काम कर सके.
उल्लेखनीय है कि पत्रिका प्रबंधन और छत्तीसगढ़ सरकार में कुछ दिनों से ठन सी गयी है. कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री के संबंध में एक खबर चलाने के कारण एक क्षेत्रीय चैनल और इस अखबार की काफी आलोचना हुई थी. चैनल ने सरेआम खेद व्यक्त कर मामले को रफा-दफा किया वहीं पत्रिका द्वारा अपनी खबर पर डटे रहने के बाद सरकार ने इस अखबार पर मानहानि का मुकदमा दायर किया है जो विचाराधीन है. जवाबी कारवाई में पत्रिका ने प्रेस काउंसिल में शिकायत दर्ज की है जिस पर प्रदेश शासन को नोटिस इशू किया गया है. इसी संबंध में भाजपा से जुड़े एक पत्रकार पंकज झा ने भी प्रेस काउंसिल को पत्रिका की शिकायत डाक से भेज़ते हुए तथ्यवार ‘पत्रिका’ की कारगुजारियों का ब्योरा परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू को भेजा है. पत्र में घटनाक्रम का जिक्र करते हुए इस अखबार पर टाइम्स नाउ मामले में चैनल पर कोर्ट द्वारा लगाए गए भारी जुर्माने जैसी कारवाई ‘पत्रिका प्रबंधन’ पर भी किये जाने की मांग की गयी है.





