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धन्य है जागरण, कीड़े मारने की दवा खाने से बेहोशी आएगी या होश आएगा?

देश का नंबर एक अखबार का तगमा रखने वाला दैनिक जागरण भले ही ख़बरों के चुस्त और दुरस्त परोसने के दंभ भरता है, लेकिन अखबार के दफ्तर के भीतर बैठे पत्रकार इस दंभ को चकनाचूर करने में तनिक भी देर नहीं लगाते हैं. जागरण डॉट कॉम अब नए कलेवर में लांच हुआ है तो गलतियां भी नए कलेवर की ही हो रही हैं. ऐसा ही हाल 23 फरवरी की सुबह देखने को मिला, जब दैनिक जागरण लोगों के हाथ में गया और लोगों ने देखा कि कीड़ों की दवाई से भी तबीयत दुरस्त हो जाती है यानी होश आ जाता है. तो लोग भी एक बारगी सोचने पर मजबूर हो गए कि रिपोर्टर ने क्या एक्सक्लूसिव स्टोरी निकाली है.

देश का नंबर एक अखबार का तगमा रखने वाला दैनिक जागरण भले ही ख़बरों के चुस्त और दुरस्त परोसने के दंभ भरता है, लेकिन अखबार के दफ्तर के भीतर बैठे पत्रकार इस दंभ को चकनाचूर करने में तनिक भी देर नहीं लगाते हैं. जागरण डॉट कॉम अब नए कलेवर में लांच हुआ है तो गलतियां भी नए कलेवर की ही हो रही हैं. ऐसा ही हाल 23 फरवरी की सुबह देखने को मिला, जब दैनिक जागरण लोगों के हाथ में गया और लोगों ने देखा कि कीड़ों की दवाई से भी तबीयत दुरस्त हो जाती है यानी होश आ जाता है. तो लोग भी एक बारगी सोचने पर मजबूर हो गए कि रिपोर्टर ने क्या एक्सक्लूसिव स्टोरी निकाली है.

खबर देखकर सभी चौंक गए, हेडिंग में स्पस्ट रूप से लिखा हुआ था कि किसी बच्चे ने कीडे़ मारने की दाव खायी और उसे होश आ गया, लेकिन खबर पढ़ी तो लगा कि उपसंपादक महोदय या फिर उसके ऊपर जांच पड़ताल करने वाले लोग आँख मूँद कर ही बैठे हुए थे. खबर में कहीं भी दवा से किसी मरीज के ठीक होने का जिक्र नहीं था. उसमें लिखा था कि दावा खाकर उसके साइड इफेक्ट से बच्चा बीमार हो गया. फिर उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया गया. दिल्ली एडिसन के बॉटम में लगी एक खबर कीड़े मारने की दवा खाकर बीमार बच्चे को आ गया होश को देखकर आप भी सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि ख़बरों के संपादन करने का जागरण में क्या हाल है. जबकि राष्‍ट्रीय सहारा और हिंदुस्तान ने भी ये स्टोरी कवर की है. वहां कोई भी त्रुटी नहीं है. उसने दवा से बच्चे के बीमार होने की ही बात कही है. नीचे जागरण की खबर.


                कीड़े मारने की दवा खाकर बीमार बच्चे को आ गया होश

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता : पेट में पल रहे कीड़े मारने की दवा के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही डिवार्मिग प्रोग्राम सातवीं कक्षा के प्रशांत कि लिए भारी पड़ गया। दवा का साइड इफेक्ट वह बर्दास्त नहीं कर सका और तबियत इतनी बिगड़ गई कि बेहोशी में चला गया। इसकी वजह से उसे एक मामूली अटैक भी आया। आनन फानन में पहले उसे संजय गांधी अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर जीबी पंत अस्पताल रेफर किया गया जहां अब वह होश में हैं। उसके पिता का आरोप है कि उसकी तबियत दवा खाने के बाद ही बिगड़ी है।

नांगलोई स्थित दिल्ली सरकार के सवरेदय स्कूल में पढ़ने वाला प्रशांत मंगलवार को डिवार्मिग दवा खिलाई गई। जिससे वह बीमार पड़ गया। इस बारे में दिल्ली सरकार की डिवार्मिग प्रोग्राम की नोडल अधिकारी डॉ. योगिता शर्मा ने बताया कि दवा की वजह से मरीज को ‘इनफैक’ अटैक आया। यह तब होता है जब मरीज दिल से कमजोर हो। इसमें दिमाग में हल्का असर पड़ता है। मरीज की एमआरआइ और इको किया गया है। घबराने की कोई बात नहीं है। हालांकि बताया जा रहा है कि मंगलवार की सुबह से ही प्रशांत की तबियत खराब थी और उसे हल्का बुखार था। इसके लिए उसे दवा भी दी गई थी।

इस बारे में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव अंशु प्रकाश ने कहा कि डिवार्मिग का असर होता है, इसलिए हमने पहले से ही सभी स्कूलों को इस बारे में तैयार रहने की सलाह दी थी और अस्पतालों को भी निर्देश दिया था। अभी तक कई बच्चों में ऐसी शिकायत आई है, जिसे इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हालांकि प्रशांत के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। इस बारे में प्रशांत कि पिता राजेश चौधरी ने कहा कि मंगलवार को जब प्रशांत आया तो उसकी तबियत ठीक नहीं लग रही थी, उसे बार-बार चक्कर आ रहा था और सिर दर्द की शिकायत कर रहा था। बाद में वह बेहोश हो गया। इस के बाद हम उसे संजय गांधी अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टर ने इलाज के बाद जीबी पंत अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। अब वह होश में है और बात भी कर रहा है।


एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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