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वेतन के लिए जीएनएन न्‍यूज में हड़ताल, नहीं रोल हुआ पांच बजे का बुलेटिन

जीएनएन न्‍यूज से खबर है कि वहां स्‍ट्राइक हो गया है. चिटफंडियों की इस कंपनी में कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन नहीं मिला है. वेतन कब तक आएगा इसकी भी जानकारी देने वाला कोई नहीं लिहाजा नाराज पीसीआर तथा कैमरा सेक्‍शन के लोग स्‍ट्राइक पर चले गए हैं, जिसके चलते पांच बजे का बुलेटिन रोल नहीं हुआ. चैनल लूप पर चल रहा है. राजस्‍थान में कई चिटफंड कंपनियों पर छापेमारी के बाद से ही जीएनएन न्‍यूज एवं जीएनएन भक्ति की हालत खराब चल रही है. जीएम जगजीत सिंह अरोड़ा भी बुलेटिन को रोल नहीं करा सके.

जीएनएन न्‍यूज से खबर है कि वहां स्‍ट्राइक हो गया है. चिटफंडियों की इस कंपनी में कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन नहीं मिला है. वेतन कब तक आएगा इसकी भी जानकारी देने वाला कोई नहीं लिहाजा नाराज पीसीआर तथा कैमरा सेक्‍शन के लोग स्‍ट्राइक पर चले गए हैं, जिसके चलते पांच बजे का बुलेटिन रोल नहीं हुआ. चैनल लूप पर चल रहा है. राजस्‍थान में कई चिटफंड कंपनियों पर छापेमारी के बाद से ही जीएनएन न्‍यूज एवं जीएनएन भक्ति की हालत खराब चल रही है. जीएम जगजीत सिंह अरोड़ा भी बुलेटिन को रोल नहीं करा सके.

जानकारी के अनुसार पिछले काफी समय से जीएनएन में काम कर रहे कर्मचारियों की सेलरी कई दिन लेट आ रही थी. इस बार भी जनवरी की सेलरी अब तक नहीं आई है जबकि फरवरी बीतने जा रहा है. आगे कई त्‍योहार भी आने वाले हैं. आश्‍वासनों के सहारे कर्मचारियों को टाला जा रहा था. चैनल की खराब वित्‍तीय हालत को संभालने के लिए जगजीत सिंह अरोड़ा को जीएम बनाकर लाया गया था, पर उनके आने के साथ ही हड़ताल भी शुरू हो गई. चैनल पर अब पुरानी बुलेटिनों को चंक करके चलाया जा रहा है. साढ़े छह बजे होने वाला डिस्‍कशन पैनल के कार्यक्रम को भी रद्द कर दिया गया है.

कर्मचारी अपनी सेलरी दिए जाने की मांग पर अड़े हैं. बताया जा रहा है कि चैनल के हेड के रूप में काम देखने वाले महरुफ रजा गायब हैं. आज वो आफिस नहीं आए. फोन पर ही उन्‍होंने बुलेटिन चलाने के लिए कहा पर किसी भी कर्मचारी ने रजा की बात नहीं सुनी. बताया जा रहा है कि जगजीत सिंह अरोड़ा ने भी कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया तथा आश्‍वासन दिया कि दो-तीन दिन में सेलरी आ जाएगी पर कर्मचारी मानने को तैयार नहीं हैं. प्रबंधन परेशान हैं. खबर दिए जाने तक आगे के कार्यक्रम सुचारू रूप से चलाने की कोशिशें जारी थीं, परन्‍तु बात नहीं बन पाई है. कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

उल्‍लेखनीय है कि चिटफंडियों का यह चैनल लांचिंग से पहले से ही विवादों में रहा है. कम समय में ही इस चैनल में कई सीईओ, मैनेजर और हेड बदले जा चुके हैं. सबसे दिलचस्‍प तथ्‍य यह है कि कहीं भी दिखाई न पड़ने वाले इस चैनल को दो-तीन दिन पूर्व बेस्‍ट डिस्‍ट्रीब्‍यूशन का पुरस्‍कार मिला था. स्‍टार न्‍यूज, आजतक, आईबीएन7, इंडिया टीवी जैसे चैनलों को पीछे छोड़ते हुए इस चैनल ने यह अवार्ड जीता था. आसानी से पता लगाया जा सकता है कि पत्रकारिता के क्षेत्र में दिए जाने वाले पुरस्‍कार भी किस तरह से सेटिंग-गेटिंग करके पाए जाते हैं. 

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