नोएडा : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, नोएडा परिसर के एसोसिएट प्रोफेसर अरुण कुमार भगत को पीएचडी की शोधोपाधि प्रदान की है. श्री भगत के शोध का विषय 'आपातकाल की हिंदी पत्रकारिता का अनुशीलन' था. डा. भगत ने बताया कि उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक प्रो. (डा.) ओम प्रकाश सिंह के मार्गदर्शन में पीएचडी की शोधापाधि प्राप्त की है.
श्री भगत के अनुसार भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में प्रेस पर अंकुश लगाने की यह घटना अपने में नया अनुभव लिए थी. संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खडित किए जाने का प्रभाव दिख रहा था. आपातकाल के 19 महीनों की यह छोटी सी अवधि पत्रकारिता की दृष्टि से अलग पहचान लिए हुए है. यही कारण है कि इस पर शोध कार्य करने की आवश्यकता महसूस की गई है. इस कालखंड के दौरान समाज जीवन की धड़कन ने पत्रकारिता को काफी प्रभावित किया. पुलिस-प्रशासन की करतूत और तांडव से जनमानस में भय, आतंक, संत्रास, खौफ और दहशत छा गया.
डा. भगत ने बताया कि इस शोध प्रबंधन के द्वारा आपातकाल की यथार्थ पृष्ठभूमि में पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका को उद्घाटित कर उसे रेखांकित किया गया है. उसमय के ऐसे अनेक आक्षरिक साक्ष्य बिखरे पड़े थे, जिन्हें शोध की दृष्टि से जांच-परखकर सामने लाया गया है. इस महत्वपूर्ण शोध-प्रबंध के द्वारा पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका को सामने लाकर उसे ऐतिहासिक मूल्य प्रदान किया गया है. अनुद्घाटित तथ्य इतिहास के हवाले हो गए हैं. पत्रकारिता के इतिहास की दृष्टि से भी यह एक प्रमाणिक कार्य हुआ है. आपातकाल की जंजीरों से देश को मुक्त कराने के लिए सभी यातनाएं भोगने वाले अनेक पत्रकार आज जीवित हैं. उनका साक्षात्कार भी भविष्य में ऐतिहासिक दस्तावेज बन जाएगा. इस शोध प्रबंध के माध्यम से आपातकाल की हिंदी पत्रकारिता का अनुशीलन समग्र रूप से हुआ है. प्रेस रिलीज





