बिहार में प्रेस की आजादी पर प्रेस कांउसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष मार्केडेय काटजू की तीखी टिप्पणी के मामले पर सोमवार को विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल आरंभ होते ही विपक्ष ने इस मुद्दे पर सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। नारेबाजी के बाद विपक्ष ने सदन का बहिष्कार भी कर दिया। इस मसले पर विपक्ष ने कार्यस्थगन का प्रस्ताव भी दिया जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने अवैधानिक बताते हुए नामंजूर कर दिया। शून्यकाल में भी इस मसले पर जमकर शोर हुआ।
विपक्ष काटजू के बयान से पूरी तरह सहमत दिखा। नेता प्रतिपक्ष अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि काटजू के वक्तव्य पर जिस तरह से उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने टिप्पणी की है वह अनुचित और अपमानजनक है। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस पर कहा कि जिस तरह से प्रेस कांउसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष श्री काटजू वक्तव्य दे रहे हैं वैसी स्थिति में केंद्र सरकार को इस पर विचार करना चाहिए कि ऐसे लोगों को इस तरह के पद पर रखा जाना चाहिए या नहीं। विपक्ष ने इस मसले पर ध्यानाकर्षण के समय भी सदन का बहिष्कार किया। इस दौरान भी काफी हंगामा हुआ।
शून्यकाल में भी इस मामले को उठाया गया। इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष अब्दुल बारी सिद्दिकी ने जब उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के नाम के साथ अपनी बात कही तो उप मुख्यमंत्री श्री मोदी ने कहा कि-यह तो मीडिया को तय करना है कि वह स्वतंत्र है कि नहीं? चार आदमी ने श्री काटजू को ब्रीफ कर दिया तो क्या उसके आधार पर वह टिप्पणी कर देंगे। दरअसल श्री काटजू अलग-अलग राज्यों में पहुंचकर इस तरह की टिप्पणी करते रहे हैं। महाराष्ट्र में गये तो वहां कह दिया कि महाराष्ट्र की सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए। गया में उन्होंने यह कहा कि बिहार सरकार को सबक सीखा देंगे। ऐसी बात तो विपक्ष भी नहीं करता है। कौन लोग हैं जो उन्हें बरगला रहे हैं। इस तरह के बयान देने से पहले पूरी तरह जांच करनी चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे को सदन में लाने से पहले से ठीक से पढ़ना चाहिए था। सरकार ने ऐसा कोई कानून तो बनाया नहीं है जो मीडिया पर बंदिश की बात करता हो। आखिर सरकार ने मीडिया पर कौन सा बंदिश लगा रखा है। श्री काटजू ने खुद कहा है कि वह बिहार में मीडिया की स्वतंत्रता की जांच कराएंगे। पहले जांच रिपोर्ट तो आ जाये। श्री यादव ने कहा नेता प्रतिपक्ष संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के बारे में मर्यादा के साथ टिप्पणी करने की बात कही है जबकि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद विपक्ष के कुछ सदस्यों ने राज्यपाल को सत्ताधारी दल का एजेंट कहा। इसको लेकर भी सरकार और विपक्ष में खूब हंगामा हुआ। एक दूसरे पर आरोप लगाए गए।
उल्लेखनीय है कि पटना में शुक्रवार को एक समरोह में काटजू ने कहा था कि बिहार में प्रेस की स्थिति अच्छी नहीं है। अगर यहां कोई सरकार या सरकारी अधिकारी के खिलाफ लिख दे तो उसे परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा था कि लालू के शासन काल से बिहार में विधि-व्यवस्था की स्थिति में सुधार जरूर हुआ है परंतु प्रेस की आजादी कम हो गई है। काटजू ने कहा था कि लालू के शासनकाल में यहां प्रेस आजादी के साथ काम करता था, परन्तु अब स्थितियां बदल गई हैं। अब सरकार के खिलाफ खबर लिखने पर पत्रकारों की नौकरी पर बन आती है। इधर, बिहार में पत्रकारिता की स्वतंत्रता की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है।






