काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति पदमश्री डा. लालजी सिंह ने पदभार ग्रहण करने के बाद 31 अक्टूबर 2011 को मीडिया से मुखातिब हुए। इस दौरान मीडिया द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर कन्नी काटते-काटते श्री सिंह आपा खो बैठे और एक रिपोर्टर के सुझाव पर ही उखड़ गए। उसके खिलाफ एक्शन लेने तक की धमकी दे डाली। कुलपति श्री सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस के शुरुआत में ही कहा कि वह मात्र एक औपचारिक मुलाकात कर रहे हैं। सभी से वे सलाह और सुझाव ले रहे हैं। इसी क्रम में मीडिया से भी मिल रहे हैं।
प्रश्न उत्तर के क्रम में अमर उजाला के रिपोर्टर ने कहा कि विश्वविद्यालय ने निवार्चित स्टूडेंट काउंसिल का गठन कर पूरे देश में मिशाल कायम किया है। लेकिन इसमें कुछ निर्वाचित सदस्यों के अपहरण तक की बात सामने आई। इसका वहां मौजूद विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने स्पष्टीकरण भी दे दिया। इसी के बाद हिन्दुस्तान के रिपोर्टर ने कहा कि इसमें कुछ फैकल्टी के छात्र मतदान से वंचित रह गए। क्योंकि कई संकाय से कोई कक्षा प्रतिनिधि के रूप में नामांकन नहीं किया। इस कारण इसमें कुछ बदलाव करना चाहिए। इस सुझाव पर कुलपति एकदम से आपा खो दिए। उनके तेवर एकदम बदल गए। काफी तल्ख तेवर में उन्होंने कहा कि कोई भी गलत बात वे सुन नहीं सकते। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वे जो भी मीडिया का व्यक्ति इस प्रकार की बात करेगा उसके खिलाफ वे एक्शन लेंगे।
कुलपति यहीं नहीं रूके। उन्होंने सभी प्रिंट मीडिया को कटघरे में खडे करते हुए कहा कि दो दिन पूर्व एक छात्र धरने पर बैठा था। क्योंकि उसका स्कालरशिप नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अखबार ने यह जानने की कोशिश नहीं किया कि उसका स्कालरशिप क्यों रोका गया। इसे सुन कर सभी मीडियाकर्मी सन्न रह गए। सबसे बड़ी बात की प्रेस कांफ्रेंस में जिन अखबारों ने ये खबरें छापी थी उनके सिटी चीफ, काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष तक मौजूद रहे। किसी ने कुलपति की चेतावनी पर जवाब देने की पहल नहीं की। कुलपति जी को मालूम होना चाहिए कि अखबार का काम खबर छापना है। अखबारों ने मात्र इतना ही छापा था कि छात्र धरने पर बैठा। अखबारों ने कोई आरोप नहीं लगाया।
विश्वविद्यालय में छात्र परिषद के सदस्यों के गायब होने की बातें हर जबान पर है तो अखबार अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए खबर छाप रहा है। अखबार ने कोई आरोप अपनी तरफ से नहीं लगाया है। विश्वविद्यालय में चल रहे धरने के विषय में हमें विश्वविद्यालय के पक्ष को लेने की जरूरत नहीं है। जब मात्र धरना दिया गया खबर देनी है। लेकिन अफसोस की बात यह कि इस तरह की धमकी के बावजूद किसी ने बोलने की जहमत नहीं की। काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष ने जरूर पहल की लेकिन बहुत देर से। वैसे इस वार्ता में कुलपति जैसे पहले से सोच कर आए थे कि वे न तो समस्या सुनेंगे न ही सुझाव लेंगे। सर सुन्दर लाल चिकित्साल की समस्याओं पर तो उन्होंने कहा कि पूरे देश में ऐसा अच्छा डाक्टरों का व्यवहार नहीं है। छात्रों की गाड़ी हास्टल के बाहर खड़ी होने की समस्या को तो कई बार कहने के बाद भी वह समस्या ही नहीं समझे। जबकि पत्रकारों ने ही नहीं अधिकारियों ने भी समस्या समझाने का प्रयास किया।





