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क्‍या इस चरण में सोलह की संख्‍या पार कर जाएंगे मुस्लिम विधायक?

लखनऊ। सातवें चरण के दस जिलों की 60 विधानसभा सीटों से क्या इस बार मुस्लिम विधायकों की संख्या बढ़ेगी? यह सवाल राजनीतिक हलके में इस समय चर्चा में है। 2007 के चुनाव में इन दस जिलों से 16 मुस्लिम विधायक चुनकर आये थे। इनमें सर्वाधिक चार मुरादाबाद से थे। पीलीभीत और बिजनौर से तीन-तीन, रामपुर और बरेली से दो-दो, बदायूं और खीरी से एक-एक मुस्लिम उम्मीदवार चुने गये थे। इस बार 16 की संख्या को बढ़ाने के लिए बसपा ने 24, सपा ने 25, कांग्रेस ने 18, रालोद ने तीन मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। और तो और भाजपा भी बदायूं की सहसवान सीट से शकील अहमद सैफी को मजबूती से लड़ा रही है।

लखनऊ। सातवें चरण के दस जिलों की 60 विधानसभा सीटों से क्या इस बार मुस्लिम विधायकों की संख्या बढ़ेगी? यह सवाल राजनीतिक हलके में इस समय चर्चा में है। 2007 के चुनाव में इन दस जिलों से 16 मुस्लिम विधायक चुनकर आये थे। इनमें सर्वाधिक चार मुरादाबाद से थे। पीलीभीत और बिजनौर से तीन-तीन, रामपुर और बरेली से दो-दो, बदायूं और खीरी से एक-एक मुस्लिम उम्मीदवार चुने गये थे। इस बार 16 की संख्या को बढ़ाने के लिए बसपा ने 24, सपा ने 25, कांग्रेस ने 18, रालोद ने तीन मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। और तो और भाजपा भी बदायूं की सहसवान सीट से शकील अहमद सैफी को मजबूती से लड़ा रही है।

रामपुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, बिजनौर, जेपीनगर, बदायूं, और बरेली मुस्लिम बाहुल्य जिले हैं। जहां की मुस्लिम आबादी 22 से 42 प्रतिशत तक हैं। इस चरण की 60 सीटों पर खड़े 962  उम्मीदवारों में मुस्लिम प्रत्याशियों की कुल संख्या 131 है। जिनमें 27 महिलाएं हैं। इस चरण में सपा के मुस्लिम चेहरे आजम खां (रामपुर), लोकदल के शहनवाज राणा (बिजनौर) और हाजी आजम कुरैशी (संभल), कांग्रेस से रामपुर के नवाब खानदान के नावेद मियां (स्वांर टाडा), बसपा से अरशद खां (बरखेड़ा) की प्रतिष्ठा दांव पर है।

रामपुर से आजम खां को इस बार हराने के लिए लोकमंच के अमर सिंह और जयाप्रदा ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा रखी है। वे रेशमा अफरोज (लोकमंच) को दरवाजे-दरवाजे ले जाकर जीत सुनिश्चित कराने में लगे हैं। रामपुर का नवाबी खानदान भी आजम की रास्ता रोकने की पूरी तैयारी में है। कांग्रेस ने आजम के खिलाफ डा. तनवीर को मैदान में उतार रखा है। भाजपा के बड़े मुस्लिम चेहरे मुख्तार अब्बास नकवी रामपुर में कैम्प कर अपने उम्मीदवार जागेश्वर दयाल दीक्षित को जिताने में लगे हैं। आजम चारों तरफ से घिरे हुए हैं। यही वजह है कि वे अपना क्षेत्र छोड़कर कम जगह ही प्रचार के लिए जा सके हैं।

कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशियों की इस चरण में काफी फजीहत होने के आसार हैं। पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी के चलते तथा जितिन प्रसाद के इशारे पर हाईकमान ने जाने-माने मुस्लिम चेहरे तथा लखीमपुर के सांसद जफर अली नकवी की उपेक्षा कर उन्हें चुनाव प्रचार में साथ नहीं लिया। नतीजतन शाहजहांपुर, लखीमपुर और बरेली का मुस्लिम मतदाता कांग्रेस से नाराज हैं। नकवी अपनी उपेक्षा से दुखी होकर घर बैठ गये हैं। सपा के सर्वाधिक 25 उम्मीदवारों में युसूफ अंसारी, शमीमुल हक (मुरादाबाद और देहात), फिजाउल चौधरी (कांठ), हाजी रिजवान अहमद (कुंदरकी), हाजी मोहम्मद इरफान (बिलारी), इकबाल महमूद (संभल), महबूब अली (अमरोहा), अशफाक खान (नौगावां), कमाल अख्तर (हसनपुर) नसीर खां (चमरव्वा), गफूर इन्जीनियर (स्वार टांडा), तनवीर खां (शाहजहांपुर), अनवर अली (तिलहर), आबिद रजा (बदायूं), शेरवाज पठान (चांदपुर), मो. शाहिद (नजीबाबाद), कफील अंसारी (बड़ापुर), कुतुबुद्दीन अंसारी (नूरपुर), फहीम साबिर (बरेली कैन्ट), अताउर्रहमान (बहेड़ी), हाजी जाहिद गुड्डू (मीरगंज), हाजी रियाज अहमद (पीलीभीत), आरए उस्मानी (निघासन) और इमरान (मोहम्मदी) हैं।

बसपा के 24 मुस्लिम प्रत्याशियों में हाजी नासिर कुरैशी (मुरादाबाद देहात), हाजी इलियास (ठाकुरद्वारा), रिजवान अहमद (कांठ), जुबैर (कुंदरकी), हाजी छिछा (संभल), अकीलुर्रहमान (असमौली), शाहिद प्रधान (अमरोहा), युसूफ अली( चमरव्वा), अजीम खान (स्वार टांडा), मो. असलम खां (शाहजहांपुर), रिजवान अली (ददरौल), हाजी बिट्टन (बिल्सी), मीर हाजी अली (सहसवान), काजी रिजवान (शेखूपुर), महमूद अहमद (बिजनौर), इकबाल (चांदपुर), तसलीम अहमद (नजीबाबाद), मो0 गाजी (बढ़ापुर), हाजी उस्‍मान अंसारी (नूरपुर), अनीस बेग (बरेली शहर), अखलाक अहमद (भोजीपुरा), अंजुम रशीद (बहेड़ी), साजिद अली (आंवला), अरशद खां (बरखेड़ा) है।

कांग्रेस ने जिन 18 मुस्लिम चेहरों को इस चरण में चुनावी दंगल में उतार रखा है। उनमें इफ्तेखार अंसारी (मुरादाबाद देहात), नवाब जान (ठाकुर द्वारा), मोहम्मद उल्ला (कांठ), सौलत अली (कुंदरकी), असरार अहमद (असमोली), मुन्ना अकील (अमरोहा), डा. तनवीर अहमद (रामपुर), मुतीउररहमान (चमरव्वा), नबाब काजिम अली (स्वार टाडा), फैजान अली खां (शाहजहांपुर), फकरे आलम शोबी (बदायूं), अनवर जमील (धामपुर), हुसैन अंसारी (बढ़ापुर), नबाब मुजाहिद खां (बरेली शहर), अलाउद्दीन खान (बिथरी चेनपुर), सलीम अख्तर (बहेड़ी), अनीस अहमद उर्फ फूलबाबू (बीसलपुर) और अशफाक उल्ला (मोहम्मदी) से उम्‍मीदवार हैं।

बिजनौर जिले की नजीबाबाद सीट से कांग्रेस, बसपा और सपा ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें अबरार आलम, तसलीम अहमद और शाहिद अली है। इसी जिले की बढ़ापुर सीट से खड़े 24 उम्मीदवारों में सात मुस्लिम हैं। सपा, बसपा और कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशियों के अलावा नवभारत निर्माण पार्टी का उम्मीदवार भी मुसलमान है। कांग्रेस (रालोद), सपा और बसपा ने जिन-जिन क्षेत्रों में अपने मुस्लिम उम्मीदवार आमने-सामने किए हैं। उनमें मुरादाबाद की कांठ, मुरादाबाद ग्रामीण, कुंदरकी, सम्भल, स्वार टांडा, रामपुर की चमरव्वा, बहेड़ी और शाहजहांपुर है। शाहजहांपुर में 23 प्रत्याशियों में आठ मुस्लिम है, जिनमें सपा के तनवीर खान, कांग्रेस के नवाब फैजन अली खान, बसपा के मोहम्मद असलम खां, सीपीआई के मोहम्मद सलीम, उलेमा काउन्सिल के अबरार मंसूरी, सोशलिस्ट पार्टी के इमरान और वंचित समाज पार्टी के मोहम्मद शाहिद मुख्य है। इन सबके बीच भाजपा के पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक सुरेश कुमार खन्ना सातवीं बार विधानसभा पहुंचने की कोशिश में हैं। 2007 में जीते जिन मुस्लिम विधायकों की प्रतिष्ठा इस चरण में दांव पर हैं, उनमें मोहम्मद गाजी, शाहनवाज राणा, इकबाल, अकीलुर्रहमान, इकबाल मसूद, नवाब काजिम अली, मोहम्मद आजम खां, रियाज अहमद, अरशदखां, अनीस अहमद खां और डा. आरए उस्मानी मुख्य हैं।

लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार की रिपोर्ट. अजय ‘माया’ मैग्जीन के ब्यूरो प्रमुख रह चुके हैं. वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं.

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