वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव के बारे में कई तरह की चर्चाएं भड़ास4मीडिया के पास आई हैं. सबका लब्बोलुआब ये है कि राहुल जी का आजसमाज अखबार में अंत समय आ चुका है. सूत्रों के मुताबिक प्रबंधन ने उन्हें इशारों इशारों में काफी दिनों पहले कह दिया था कि यहां अब आपकी जरूरत नहीं है. बावजूद इसके राहुल देव आज समाज से गए नहीं. वे उचित मंच और सही समय की तलाश में टिके हुए हैं. अब बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले शीर्ष प्रबंधन ने राहुल देव से दो टूक कह दिया कि आपने अब तक बहुत कुछ ग्रुप के लिए किया, अब आप कोई नया ठिकाना देख लें क्योंकि ग्रुप जो कुछ नया प्लान कर रहा है उसमें आपकी जगह नहीं बन पा रही है.
चर्चा ये भी है कि होली के आसपास कोई बाहरी व्यक्ति ग्रुप एडिटर के बतौर आज समाज में ज्वायन कर सकता है. ये कौन होगा, इसको लेकर कयास जारी है. ज्ञात हो कि आज समाज अखबार कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा का है जिनके पुत्र मनु शर्मा और कार्तिक शर्मा हैं. मनु शर्मा इन दिनों जेसिका मर्डर केस में फंसे होने के कारण तिहाड़ जेल में हैं जबकि कार्तिक शर्मा की पिछले दिनों धूमधाम से शादी हुई. विनोद शर्मा ग्रुप के चेयरमैन हैं. कार्तिक मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. राहुल देव से जब भड़ास4मीडिया ने उनके आज समाज से हटने से संबंधित चर्चाओं के बारे में पूछा तो उन्होंने इस पूरे मामले में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि वे नहीं मानते कि ये सब चीजें किसी खबर का हिस्सा बनने लायक हैं. उल्लेखनीय है कि राहुल देव को जब सीएनईबी से हटने के लिए प्रबंधन ने मजबूर किया था तब भी उन्होंने यह लगातार कहा कि वे सीएनईबी से कहीं नहीं जा रहे. पर उन्हें जाना पड़ा था.
आज समाज अखबार का ग्रुप एडिटर बनने पर भी राहुल देव को लेकर कई तरह के सवाल उठे थे. एक सवाल यह था कि उनके जैसे वरिष्ठ पत्रकार के आगे आखिर क्या मजबूरी रही जो उन्हें जेसिका मर्डर मामले में पुत्र मनु के फंसने के बाद मीडिया से दुखी पिता विनोद शर्मा द्वारा मीडिया में आने के लिए खोले गए अखबार आज समाज में जाना पड़ा. कहने वाले कहते हैं कि दिल्ली के ज्यादातर कथित बड़े बड़े पत्रकारों की कथनी और करनी में बहुत फर्क होता है. ये लोग वैसे तो नैतिकता की बातें करते फिरते रहते हैं लेकिन निजी जीवन में कुर्सी व सेलरी के लिए किसी के भी साथ जुड़ने को तैयार रहते हैं. देखना है कि राहुल देव अब कितने दिनों तक आज समाज से जुड़े रहते हैं. वैसे उनकी वहां पोजीशन इतनी कमजोर हो गई है कि कोई भी गैरत वाला पत्रकार अब तक इस्तीफा देकर बाहर निकल आया होता.





