लखनऊ : कुछ महीने पहले लखनऊ से दोपहर का टैबलाइड पेपर 'चेतना मंच' के नाम से लांच हुआ. उसके एमडी मो. ताहिर व संपादक राजेश श्रीनेत हैं. श्रीनेत जी बडे़ पेपरों में संपादक के पद पर रह चुके हैं. इस बात को देखते हुए 'चेतना मंच' को चलने का आसार अधिक दिख रहा था, जिसको देखते हुए कई लोग जुडे़. पेपर की छपाई हिन्दुस्तान से कराई जा रही थी. इस पेपर से हिन्दुस्तान से दो लोग पार्ट टाइम में जुडे थे और कई लोग अन्य पेपरों से.
सब कुछ ठीक चल रहा था. एक महीने की सेलरी सबको मिली, उसके बाद से सेलरी नहीं मिली. दो महीने बाद पेपर का पीडीएफ बनने लगा. एमडी ने कहा कि कागज की कमी है, जो मंगवाया जा रहा है और बाद में पेपर छापा जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. लोग इसी बात को मान कर बरसात में भीग-भीग कर आये और पीडीएफ बनाये. 12 पन्ने के पेपर का काम आसान नहीं होता है. तीन लोग बनाने वाले और एक लोग बनवाने वाले इसमें लगे रहे. अगले महीने पेपर छपेगा.
हैरत की बात रही कि इसके बाद भी एमडी माहिर ने यह नहीं कहा कि आप लोग तभी से काम करीएगा जब कागज आ जाएगा. दो महीने की सेलरी नहीं मिलने से काम करने वालों में रोष व्याप्त है. अगर होली तक सेलरी नहीं मिली तो एमडी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है. लोगों में काफी गुस्सा है. अब एमडी साहब मोबाइल भी स्वीच ऑफ करके बैठे हैं, लेकिन फेसबुक पर ब्यूरोचीफ का पद धारण किए बैठे हैं. आप से अनुरोध है कि इसमें आप कर्मचारियों की मदद करें. हां अगर पूरी सेलरी एक साथ नहीं दे पाते हैं एमडी ताहिर तो दो पार्ट में दे सकते हैं. अगर नहीं देते हैं तो मामला बढ़ेगा. वैसे अगर अखबार छापने की औकात नहीं है तो क्यों अखबार चलाते हैं ऐसे छुटभैये मालिक.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





