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अखबार विक्रेता दस रुपये सर्विस टैक्स ले रहे हैं पाठकों से!

मुजफ्फरनगर। इसे आप एंजेसी होल्डरों की धींगामस्ती कहें या फिर हॉकरों की मजबूरी कि ग्राहकों से सर्विस टैक्स के नाम पर प्रतिमाह दस रुपये अतिरिक्त लिये जा रहे हैं। किसी भी एक अखबार की बाजार में एक रुपये से तीन रुपये के बीच कीमत है। अखबार कोई भी हो, एक रुपये वाला हो या फिर तीन रुपये वाला। लेकिन हॉकरों का यह सर्विस टैक्स सभी पर बराबर लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं किसी घर में अगर तीन अखबार आ रहे हैं तो उन पर तीन टैक्स यानी दस रुपये के हिसाब से तीस रुपये प्रतिमाह ग्राहक को देना मजबूरी बन गया है।

मुजफ्फरनगर। इसे आप एंजेसी होल्डरों की धींगामस्ती कहें या फिर हॉकरों की मजबूरी कि ग्राहकों से सर्विस टैक्स के नाम पर प्रतिमाह दस रुपये अतिरिक्त लिये जा रहे हैं। किसी भी एक अखबार की बाजार में एक रुपये से तीन रुपये के बीच कीमत है। अखबार कोई भी हो, एक रुपये वाला हो या फिर तीन रुपये वाला। लेकिन हॉकरों का यह सर्विस टैक्स सभी पर बराबर लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं किसी घर में अगर तीन अखबार आ रहे हैं तो उन पर तीन टैक्स यानी दस रुपये के हिसाब से तीस रुपये प्रतिमाह ग्राहक को देना मजबूरी बन गया है।

आलम ये है कि कुछ लोगों ने इसे अवैध उगाही का नाम देते हुए अखबार पढऩा ही छोड़ दिया है। तो किसी ग्राहक को ये दस रुपये न दिए जाने पर हॉकरों द्वारा ही अखबार की सप्लाई बंद कर दी गई है। अखबार वितरकों की दलीले हैं कि हॉकर आंधी-बरसात, सर्दी हो या गर्मी, ग्राहकों को हर मौसम में सुबह-सवेरे अखबार सप्लाई करते हैं, जिसके चलते माह में एक बार दस रुपये देना ग्राहकों के लिए कोई बड़ी बात नहीं है। इस संबंध में एंजेसी होल्डरों और हॉकरों की एक मिटिंग हुई थी, जिसमें ये निर्णय लिया गया। इसके लिए पंफलेट अखबार के अंदर डालकर ग्राहकों से दस रुपये प्रतिमाह देने की गुजारिश की गई। सूत्रों की माने तो हॉकरों ने कम कमीशन दिए जाने पर रोष प्रकट करते हुए एंजेसी होल्डरों के माध्यम से अखबारों से कमीशन बढ़ाए जाने की मांग की थी, लेकिन होल्डरों ने अपने हाथ खड़े कर दिये और इस मीटिंग में 'सर्विस टैक्स' का ये प्रस्ताव पारित किया गया। कुछ हॉकरों का कहना है कि सर्विस टैक्स के रुप में लिए गए इन दस रुपयों में से पांच रुपये एजेंसी होल्डरों को भी देने पड़ते है। कमाल है भई?

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