फटा पोस्टर निकला हीरो….. उत्तर प्रदेश चुनावों के नतीजे आ गए है. पूरे सूबे की चुनावी कचहरी में डेढ़ महीने से चल रहा मजमा अब विक्रमादित्य मार्ग तक सिमट गया है, नेवले और साप की लड़ाई या सांडे का तेल बेचने की तर्ज पर दर्शक जुटाने वाले खबरिया चैनलों के मजमे का भी क्लाइमेक्स खत्म हो गया है. उत्तर प्रदेश में सत्ता सुंदरी ने अपना ठिकाना बदल लिया है. ५ कालिदास मार्ग पर सन्नाटा है और ५ विक्रमादित्य मार्ग पर होली का माहौल है. चौराहे से निकलने वाली सड़क पर गाड़ियों का जाम है. पर हार्न के शोर पर ढोल नगाडों की आवाज भरी पड़ रही है.
सड़क पर गुलाल बिखरा है तो समाजवादी पार्टी के कार्यालय के बाहर पार्टी के झंडे बैनर बेचने वाले अग्रवाल बंधु और दो दूसरी दुकानों पर झंडे खरीदने वालों की भीड़. ओवी वैनो की भीड़ ने सड़क के ट्रैफिक को बिगाड़ दिया है. किसी तरह चकार काट के पार्टी आफिस के गेट पर पहुचिये तो नृत्य करते युवाओं की टोली होलियाना माहौल बना रही है. हवा में उड़ता गुलाल और एक दूसरे को गले लगाना आज समाजवादी पार्टी के आफिस का यही माहौल है. इसी बीच पायल किन्नर की टोली आती है और माहौल फिर बदल जाता है. कल तक कांग्रेस में रहने वाली पायल के हाथ में आज समाजवादी झंडा है. वहाँ मौजूद युवा पायल के ताल से ताल मिलाने लगते हैं. खबरनवीसों का कैमरा उधर ही घूम जाता है. ….ढिंक चिका ढिंक चिका…. की धुन बजने लगाती है. समाजवादी मस्त बाकि सब पस्त, एक युवा नारा लगता है. भीड़ साथ देती है.
मीडिया सेल में बहुत भीड़ है पर पिचले चार सालों से मीडिया के साथ ताल मेल बनाने वाले राजेंद्र चौधरी गायब है. पूछने पर पता चलता है…. अंदर मीटिंग चल रही है. कांफिडेंट युवा सांसद धर्मेन्द्र यादव एक कमरे में लगातार बाईट देने में व्यस्त. पाश्चात्य वेशभूषा में युवा महिला टीवी पत्रकार कौतुहल से गंवई समाजवादियों को नृत्य करते देख रही हैं. वो दिल्ली से आई हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति को पहली बार देख रही हैं, अचानक उसके मुंह से निकलता है “दीज गयिज़ गाना मैड” …एक गंवई समाजवादी उसे घूरता है और अखिलेश भैया जिंदाबाद का नारा लगता है. लान में टोलियों में लोग बैठे हैं. सीट वाइज़ विश्लेषण चल रहा है और लगे हाथ मंत्रालयों के बंटवारे पर चर्चा भी. अचानक नेता जी के आने का शोर होता है, कैमरामैन कोठी की तरफ भागते हैं… एक कैमरामन कुछ अलग स्नैप के लिए एंगिल खोज रहा है, सीनियर पत्रकार इंतज़ार में हैं, सवालों को धार देने की कोशिश में होमवर्क चल रहा है.
पर एक बात है, एक अनोखा अनुशासन हर जगह मौजूद है जो अखिलेश यादव के उस वादे की और ध्यान दिला रहा है ….''हमारी पार्टी गुंडों की नहीं है…”
लेखक उत्कर्ष कुमार सिन्हा सोशल एक्टिविस्ट और वरिष्ठ पत्रकार हैं.





