अमर उजाला की प्रचंड मेहनत के बावजूद बाहुबली व धनबली डीपी यादव सहसवान विधान सभा क्षेत्र में बुरी तरह से हार गये हैं, जिससे अमर उजाला के बारे में तरह-तरह की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। अमर उजाला ने सामान्य तौर पर चुनाव की खबरों को लेकर गुणवत्ता बनाये रखी, लेकिन बरेली मंडल में अमर उजाला की पहले ही दिन से जमकर छीछालेदर हो रही है। शुरू में शाहजहांपुर में अमर उजाला द्वारा छापी जा रही पैड न्यूज की खबरें आ चुकी थीं, लेकिन प्रबंधन ने बरेली मंडल की ओर फिर भी ध्यान नहीं दिया, तभी अन्य ब्यूरो में पैड न्यूज का रोग फैल गया।
चुनाव के दौरान अमर उजाला को जिस डीपी यादव की धज्जियां उड़ानी चाहिए थी, उस अमर उजाला ने डीपी यादव की शान में जमकर कसीदे गढ़े, प्रति दिन एक-दो खबर डीपी यादव के पक्ष में दी, लेकिन आज जब चुनाव परिणाम आये, तो लोग कहने लगे कि अमर उजाला की घोर मेहनत के बाद भी डीपी यादव तीसरे नंबर चले गये। आश्चर्य की बात तो यह है कि बदायूं में सब-एडीटर कैलाश सिंह ब्यूरो चीफ भी थे, लेकिन वह स्वयं डीपी यादव के रंग में ही रंगे नजर आये, क्योंकि उन्होंने डीपी यादव के पक्ष में अपने नाम से इतनी स्टोरी छापी हैं कि रिकार्ड बन चुका है। अंत में जब खबरें कम पड़ गयीं तो उन्होंने डीपी यादव के बेटे कुणाल यादव से बात कर यदु शुगर मिल की शानदार स्टोरी देकर मतदाताओं की सोच परिवर्तित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन जनता ने अमर उजाला की सारी कोशिशों पर पानी फेर दिया। अमर उजाला की एक तरफा रिपोर्टिंग को लेकर चर्चायें हो रही हैं कि खेल ऊपर तक खेला गया, तभी यह सब संभव हो पाया। आप भी नीचे देखिए अमर उजाला में प्रकाशित कुछ खबरें –







एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





