यशवंत जी, शुभकामनायें. आपको यह सूचना देनी थी कि दाखिले का समय आते ही मैग्ज़ीनों और अख़बारों ने रैंकिंग का धंधा फिर से शुरू कर दिया है. संस्थानों को प्रलोभन दिया जा रहा कि वो विज्ञापन सुनिश्चित करें तो उन्हे अच्छी रैंकिंग प्रदान की जाएगी. बेचारे मंदी के मारे संस्थान, जो गुणवत्ता पर तो ध्यान नहीं दे पाते, वो इस ऑफर को स्वीकार करने में अच्छी पब्लिसिटी समझते हैं. लेकिन ये इन पत्रिकाओं के सुधी पाठकों से धोखा है. अगले महीने अमर उजाला में रैंकिंग देने का प्लान है और विज्ञापन के लिए प्रपोज़ल जा चुके हैं.
भड़ास के एक पाठक द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. मीडिया के भीतर चलने वाले इस तरह के खेल तमाशों का पर्दाफाश करने के लिए भड़ास आपका आह्वान करता है. आपके नाम व पहचान को गोपनीय रखा जाएगा. [email protected] पर मेल करें.





