: आईपीएस डीडी मिश्र ने कहा- यूपी शासन के करप्शन के सुबूत थे आईएएस अफसर हरमिंदर के पास, इसीलिए उन्हें मार डाला गया और सुसाइड का रूप दिया गया : ''शासन में सब भ्रष्ट हैं। इससे बड़ा घोटाला संभव नहीं है। खरीद-फरोख्त की फाइलों पर कल तक मेरे भी हस्ताक्षर हुए हैं, लेकिन मैं जानता हूं कि सब गलत है। आज मुझे होश आया तो रिस्क उठा रहा हूं। अग्निशमन विभाग में भ्रष्टाचार बुरी तरह फैला हुआ है। यहां करोड़ों की अवैध खरीद फरोख्त की गई है। पानी के 13 टैंकर की बॉडी के अवैध निर्माण में खरीद आदेश पर दस्तखत करने को फायर विभाग के एडीजी डॉ. हरीश चन्द्र सिंह मेरे पर दबाव डाल रहे थे।
राज्य में दमकल की गाड़ियों की खरीद में जमकर घोटाला हुआ है। यह बताना चाहता हूं कि आईएएस ऑफिसर हरमिन्दर राज ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उनकी हत्या की गई। हरमिन्दर राज के हाथ शासन के भ्रष्टाचार के कई सुबूत लग गए थे, इसलिए उनकी हत्या की गई। उनकी मृत्यु का कारण भ्रष्टाचार ही है। साल 2009 में आईएएस हरमिंदर राज की मौत के लिए भी सीधे-सीधे मायावती जिम्मेदार हैं। तत्कालीन प्रमुख सचिव आवास हरमिन्दर राज ने आत्म हत्या नहीं की थी बल्कि सरकार के इशारे पर एडीजी रेलवे ए.के. जैन ने उनकी हत्या करायी थी। मामले की जांच कर उसमें फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी थी। मैं फिर कह रहा हूं कि मायावती के करीबी कहे जाने वाली एडीजी ए.के. जैन ने प्रमुख सचिव आवास रहे हरमिन्दर राज सिंह की हत्या करायी थी। 28 नवम्बर 2009 को हरमिन्दर राज सिंह का शव उनके घर में मिला था जिसके बारे में कहा गया कि उन्होंने गोली मारकर खुदकुशी कर ली। हरमिन्दर की पत्नी ने भी इस बात का उठाया था कि उनके पति ने आत्म हत्या नहीं की बल्कि उनकी हत्या की गयी है लेकिन कुछ समय बाद प्रशासनिक दबाव के आगे उन्होंने अपने आरोप वापस ले लिए थे।
अगर मेरी इस कार्रवाई व कदम पर अगर मुझे निलंबित किया गया तो मैं कोर्ट जाऊंगा। मेरी जान को खतरा है लेकिन सुरक्षा के लिए मैं सरकार से कोई मांग नहीं करूंगा। मेरी सीट के पीछे महात्मा गांधी की तस्वीर लगी है। ईमानदारी की सीख इन्हीं से मिलती है। पूरी सेवा में कभी मैंने किसी की मिठाई नहीं खाई। गांधी जी के आदर्शो पर चलते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम बढ़ा रहा हूं। मैं गांधी और अन्ना से प्रभावित हूं।
गैलेंट्री अवॉर्ड के लिए चल रही दो सिपाहियों की फाइल पर मैंने लिख दिया है कि इन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए। यह दोनों पुलिस कर्मी गलत सूचना के आधार पर मेडल पाना चाहते थे। मुख्यमंत्री मायावती मेरी हत्या करवा सकती हैं। मायावती सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। यह सरकार भ्रष्ट ही नहीं महाभ्रष्ट है। ग्राम्य विकास मंत्री दद्दू प्रसाद भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है और अपनी विश्वनीयता खो बैठी है। प्रदेश सरकार के ज्यादातर क्रियाकलापों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मैं आरोप लगाने के बाद किसी अंजाम से नहीं डरता।
मेरे पास भ्रष्टाचार के खुलासे करने वाली ऐसी सरकारी फाइलें हैं जो तहलका मचा देंगी। लेकिन मैं इसका अभी खुलासा नहीं करूंगा। मैंने फाइलों पर अपनी टिप्पणी में लिखा दिया है कि सब अवैध है। काफी वक्त से मेरे पर विभाग के सामानों की खरीद-फरोख्त के लिए दबाव बनाया जा रहा था। विभाग के कई दबंग और भ्रष्ट कर्मचारियों को बचाने का भी मेरे पर दबाव था। कुछ फाइलों पर दबाव में दस्तखत कर भी दिए थे। लेकिन जब ये लगा कि अब ज्यादा ही दबाव बनाया जा रहा है तब यह बड़ा कदम उठा लिया। भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम शुरू करके मैं बेहद खुश और हल्का महसूस कर रहा हूं। मैंने ये बातें मीडिया के माध्यम से लोगों के सामने रख दी है, अब हल्का महसूस कर रहा हूं।''
-यूपी के अग्निशमन विभाग (फायर सर्विस) में तैनात डीआइजी देवेंद्र दत्त मिश्र उर्फ डीडी मिश्र ने कल मीडिया से बातचीत में जो कुछ कहा, उसका संपादित अंश. डीडी मिश्र अगले साल रिटायर हो रहे हैं और 1992 से उन्हें कोई प्रमोशन भी नहीं दिया गया है. उनका यह भी आरोप है कि उन्हें जानबूझकर राज्य़ सरकार प्रमोशन देने से रोक रही है. डी.डी. मिश्र की बेटी ने पत्रकारों से कहा कि उसके पिता करीब एक महीने से काफी व्यथित रहते थे लेकिन घर में वह कोई खास चर्चा नहीं करते थे. लड़की का कहना है कि महात्मा गांधी और प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे के प्रबल समर्थक उसके पिता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा लड़ाई लड़ी है.

विपक्ष की प्रतिक्रिया…
मायावती सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचािर में डूबी हुई है. इसकी पुष्टि लोकायुक्त की जांचों से स्पष्ट हो गया है. अब डीआईजी ने भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की और पुष्टि कर दी. विडम्बना है कि आरोपों की जांच कराने के बजाए इसका खुलासा करने वाले अधिकारी को मानसिक रोगी साबित करने में पूरी ताकत लगायी जा रही है. सपा इसके खिलाफ आन्दोलन करेगी और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करेगी.
-अखिलेश यादव (प्रदेश अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी)
आरोप अत्यंत गम्भीर है. इसलिए इसकी जांच उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायमूर्ति से ही कराया जाना चाहिए. सरकार यदि अपने को निर्दोष व निष्पक्ष साबित करना चाहती है तो डीआईजी के आरोपों की न्यायिक जांच करानी चाहिए. यदि सरकार ने न्यायिक जांच कराने में आनाकानी की तो यह मान लिया जाना चाहिए कि डी.डी.मिश्रा मिश्रा द्वारा लगाये गए आरोप सत्य हैं. डी.डी.मिश्रा मिश्रा की छवि बेहद ईमानदार किस्म के अधिकारी की है. वह झूठ नहीं बोल सकते. जिस तरह एक वरिष्ठ अधिकारी को जबरन अस्पताल ले जाया गया वह भी निन्दनीय है. डी.डी.मिश्रा मिश्र के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक अधिकारी हरमिन्दर सिंह राज की मृत्यु के बारे में लगाए गए आरोपों की भी जांच होनी चाहिए.
-विजय बहादुर पाठक (प्रदेश प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी)





