: राज्यसभा में जाकर अब सेंटर की राजनीति करेंगे मायावती और शशांक शेखर : लखनऊ से खबर है कि करारी हार का सामना करने वाली मायावती और उनके खास सिपहसालार शशांक शेखर सिंह अगले महीने से उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य होंगे. मायावती ने पार्टी के एमएलए, एमपी और कोआर्डिनेटरों के साथ एक बैठक में सभी को 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटने को कहा है. बताया जा रहा है कि राज्यसभा की रिक्त होने वाली सीटों पर भी बसपा की तरफ से नाम तय कर लिए गए हैं और मायावती को अधिकार दिया गया है कि वे इस मामले में अंतिम फैसला लें.
सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी अध्यक्ष मायावती राज्यसभा चली जायेंगी. उनकी सरकार के कैबिनेट सचिव रहे कैप्टन शशांक शेखर सिंह को भी बसपा के टिकट पर राज्य सभा भेजा जाएगा. हालांकि शशांक शेखर को रास भेजे जाने को लेकर अंदरुनी विरोध है पर मायावती के आगे कोई मुंह नहीं खोलेगा. शशांक शेखर सिंह ने अपने व्यवहार से पूरी नौकरशाही को नाराज कर रखा था. राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना आज जारी हो जायेगी. नयी विधान सभा मे बहुजन समाज पार्टी के 80 सदस्य हैं. इतने सदस्यों में केवल दो सदस्य ही आसानी से चुने जा सकेंगे.
मायावती पिछली बार भी मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद संसद चली गयी थीं. इसलिए पार्टी में इनके राज्य सभा जाने पर कोई संशय नही है. लेकिन पार्टी के भीतर शशांक शेखर को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने को लेकर काफी मतभेद है. ढेर सारे बसपाई शशांक शेखर को ही विधान सभा चुनाव में हार के लिए जिम्मेदार मानते हैं. कहने वाले यहां तक कहते हैं कि शशांक शेखर ने ही कार्यवाहक मुख्यमंत्री की तरह काम किया और पार्टी के विधायकों, सांसदों यहां तक मंत्रियों को भी मुख्यमंत्री के पास तक पहुंचने नही दिया.
ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद मायावती के खास रहे कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने सरकारी सेवा से समय से पहले रिटायर होने का फैसला कर लिया. उन्हें 31 मार्च को रिटायर होना था, पर वे नौ मार्च को ही रिटायर हो गए. प्रदेश में नौकरशाही के सर्वोच्च पद पर विराजमान शशांक शेखर की कार्यशैली मायावती सरकार में विवादित रही. सरकारी निर्णयों के साथ वह बसपा के निर्णयों की घोषणा भी मुख्यमंत्री की तरफ से करते थे. इसी के चलते उन्हें पद से हटवाने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया.
शशांक शेखर की सेवानिवृत्ति मई, 2010 में हो गई थी. लेकिन मायावती सरकार ने उन्हें दो साल का सेवा विस्तार दिया, यह सेवा विस्तार आगामी 31 मार्च को पूरा हो रहा था. चर्चा है कि मायावती और शशांक शेखर के राज्यसभा जाने के बाद यूपी में बसपा की बागडोर नसीमुद्दीन सिद्दीकी और स्वामी प्रसाद मौर्य के हाथ में दे दी जाएगी. इसी के तहत विधान परिषद में नसीमुद्दीन सिद्दीकी और विधानसभा में स्वामी प्रसाद मौर्या को बीएसपी की कमान सौंपी गई है. दोनों नेता लोकायुक्त जांच के दायरे में हैं.





